राष्ट्रपति मुर्मू की फिल्मी सितारों से दो टूक: सेहत बिगाड़ने वाले विज्ञापनों से बनाएं दूरी
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राष्ट्रपति मुर्मू की फिल्मी सितारों से दो टूक: सेहत बिगाड़ने वाले विज्ञापनों से बनाएं दूरी

राष्ट्रपति मुर्मू की फिल्मी सितारों से दो टूक: सेहत बिगाड़ने वाले विज्ञापनों से बनाएं दूरी

कला और सिनेमा समाज का आईना होते हैं, यह बात सदियों से कही जाती रही है। लेकिन जब इस आईने में चमकने वाले सितारे किसी गलत दिशा में इशारा करने लगें, तो उसका असर सीधे तौर पर देश की युवा पीढ़ी और आम जनमानस पर पड़ता है। साल 2026 के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों के मंच से एक ऐसा ही गंभीर और विचारणीय संदेश देश के नाम जारी हुआ है। विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित भव्य समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय सिनेमा के दिग्गजों के बीच एक ऐसी बात रखी, जिस पर अब देश भर में बहस छिड़ गई है।

72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार: सम्मान के साथ मिली बड़ी सीख

देश की राजधानी में आयोजित 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार समारोह (National Film Awards 2026) का माहौल बेहद खास था। एक तरफ जहां भारतीय सिनेमा की बेहतरीन प्रतिभाओं को उनकी कला के लिए देश के सर्वोच्च सम्मान से नवाजा जा रहा था, वहीं दूसरी तरफ मंच से दिया गया एक संदेश इस आयोजन का सबसे बड़ा आकर्षण बन गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने अपने संबोधन के दौरान पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए कला की सामाजिक जिम्मेदारी का बहुत ही संजीदगी से अहसास कराया।

राष्ट्रपति ने फिल्मी हस्तियों को संबोधित करते हुए दो टूक शब्दों में कहा कि उन्हें ऐसे किसी भी उत्पाद या वस्तु का विज्ञापन या प्रचार करने से बचना चाहिए जो सीधे तौर पर देश के नागरिकों, विशेषकर युवाओं और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित होते हैं। यह बयान ऐसे समय में आया है जब बड़े पर्दे के सितारे अक्सर तंबाकू, पान मसाला, और अन्य अनहेल्दी प्रोडक्ट्स के विज्ञापनों का हिस्सा बनते नजर आते हैं.

सिनेमा का प्रभाव और कलाकारों की नैतिक जिम्मेदारी

सिनेमा केवल मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि यह करोड़ों लोगों की भावनाओं और जीवनशैली को प्रभावित करने की सबसे बड़ी ताकत है। जब पर्दे पर कोई लोकप्रिय अभिनेता या अभिनेत्री किसी उत्पाद का समर्थन करती है, तो उनके प्रशंसक आंख मूंदकर उसका अनुकरण करने लगते हैं। राष्ट्रपति मुर्मू ने इसी सामाजिक प्रभाव (Social Impact) की ओर इशारा करते हुए कलाकारों की नैतिक जिम्मेदारी को रेखांकित किया।

  • युवाओं पर असर: देश के युवा अपने पसंदीदा स्टार्स को अपना आदर्श मानते हैं। उनकी हर अदा और पसंद का अनुकरण करना युवा पीढ़ी का स्वभाव बन चुका है।
  • स्वास्थ्य सर्वोपरि: व्यक्तिगत लाभ या भारी-भरकम विज्ञापनों के विज्ञापनों की चमक-दमक के पीछे छिपकर, समाज के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ करना किसी भी सूरत में उचित नहीं ठहराया जा सकता।
  • कलाकारों की ताकत: अपनी लोकप्रियता का इस्तेमाल समाज में सकारात्मक बदलाव लाने, जागरूकता फैलाने और राष्ट्र निर्माण के कार्यों में किया जाना चाहिए।

विज्ञापनों की दुनिया और नैतिकता का सवाल

आज के दौर में विज्ञापन जगत और मनोरंजन इंडस्ट्री का गठजोड़ बहुत गहरा हो चुका है। करोड़ों रुपये के कॉन्ट्रैक्ट्स कलाकारों को आकर्षित करते हैं, और कई बार वे यह भूल जाते हैं कि उनका यह कदम समाज को किस दिशा में धकेल रहा है। राष्ट्रपति द्वारा इस विषय पर खुलकर बात करना यह साबित करता है कि अब देश के सर्वोच्च स्तर पर भी इस बात की चिंता सताने लगी है कि कमर्शियल फायदों के चक्कर में नैतिक मूल्यों से समझौता किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि देश के शीर्ष नेतृत्व की ओर से इस तरह की बात कही जाती है, तो इसका असर दूरगामी होता है। कई बार कानूनी पाबंदियों से ज्यादा जरूरी आत्म-नियंत्रण और सामाजिक सरोकार होते हैं। कलाकारों को खुद यह तय करना होगा कि वे अपनी लोकप्रियता का इस्तेमाल किस प्रकार के संदेश देने के लिए करना चाहते हैं।

देश भर में हो रही है इस संदेश की सराहना

राष्ट्रपति मुर्मू के इस बयान के सामने आने के बाद से ही सोशल मीडिया से लेकर तमाम बौद्धिक मंचों पर इसकी चर्चा शुरू हो गई है। स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं, अभिभावकों और सामाजिक संगठनों ने राष्ट्रपति के इस रुख का खुले दिल से स्वागत किया है। लोगों का कहना है कि यदि सेलिब्रिटी ऐसे विज्ञापनों का बहिष्कार करना शुरू कर दें, तो समाज में एक बहुत बड़ा और सकारात्मक संदेश जाएगा।

विभिन्न क्षेत्रों के जानकारों का यह भी मानना है कि कलाकारों को अपनी ब्रांड वैल्यू का इस्तेमाल जनहित के कार्यों, शिक्षा, स्वास्थ्य और पर्यावरण जैसे गंभीर मुद्दों को बढ़ावा देने के लिए करना चाहिए, न कि ऐसी चीजों के लिए जो आने वाली पीढ़ी को बीमारियों के गर्त में धकेल दें।

क्या बदलेगा सिनेमा जगत का रुख?

अब सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि क्या 72वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार के इस मंच से उठी यह आवाज फिल्मी गलियारों तक गहराई से पहुंचेगी? क्या आने वाले दिनों में सितारे हानिकारक उत्पादों के विज्ञापनों से तौबा करेंगे? इसका जवाब तो वक्त ही देगा, लेकिन इतना तय है कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की इस अपील ने एक बार फिर से इस संवेदनशील मुद्दे को मुख्यधारा की बहस में ला खड़ा किया है।

कला और राष्ट्रभक्ति का चोली-साथ का दामन रहा है। जब देश का अन्न खाने और यहां की जनता से अपार प्रेम पाने वाले सितारे अपनी कला के साथ-साथ अपनी नैतिक जिम्मेदारियों को भी उतनी ही शिद्दत से निभाएंगे, तभी एक स्वस्थ, जागरूक और सशक्त राष्ट्र के निर्माण का सपना पूरी तरह से साकार हो सकेगा।

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रोली सिंह

रोली सिंह

Writer (स्थानीय खबरें)

रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

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