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नोएडा में अवैध यूनिपोल का खेल: सपा ने खोला मोर्चा, सीएम योगी को लिखा पत्र

नोएडा में अवैध यूनिपोल का खेल: सपा ने खोला मोर्चा, सीएम योगी को लिखा पत्र

क्या आपकी नज़र कभी नोएडा की सड़कों पर लगे उन विशालकाय यूनिपोल पर पड़ी है, जो ट्रैफिक के बीचों-बीच किसी खतरे की तरह खड़े नजर आते हैं? नोएडा के शहरी इलाकों में विज्ञापनों के नाम पर चल रहे खेल ने अब एक बड़ा राजनीतिक मोड़ ले लिया है। शहर में नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से लगाए जा रहे कथित अवैध यूनिपोल (Unipoles) के खिलाफ अब समाजवादी पार्टी (SP) पूरी तरह आक्रामक हो गई है। मामला सिर्फ विज्ञापनों का नहीं, बल्कि आम जनता की सुरक्षा और बड़े प्रशासनिक भ्रष्टाचार की ओर इशारा कर रहा है।

समाजवादी पार्टी नोएडा महानगर के अध्यक्ष डॉ. आश्रय गुप्ता ने इस पूरे मुद्दे पर नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली को सीधे तौर पर कटघरे में खड़ा कर दिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि शहर की सड़कों और चौराहों पर सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर ये अवैध ढांचे खड़े किए जा रहे हैं, जिससे कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है।

नोएडा प्राधिकरण की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल

आखिर किसकी शह पर नोएडा में नियमों के विरुद्ध यूनिपोल का जाल बिछाया जा रहा है? यह सवाल आज हर आम नागरिक के मन में है। सपा महानगर अध्यक्ष डॉ. आश्रय गुप्ता का कहना है कि उन्होंने स्थानीय स्तर पर नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों के सामने कई बार इस बात की शिकायत दर्ज कराई, लेकिन हर बार नतीजा सिफर रहा।

  • शिकायत के बाद भी कार्रवाई नहीं: प्राधिकरण के अधिकारियों की लचर कार्यप्रणाली के कारण अवैध यूनिपोल हटाने के बजाय उन्हें और बढ़ावा मिल रहा है।
  • अधिकारियों और ठेकेदारों की मिलीभगत: सपा ने आरोप लगाया है कि इस खेल में अनुमति देने वाले संबंधित अधिकारियों, कर्मचारियों और निजी ठेकेदारों की सीधी सांठगांठ है।
  • राजस्व को चूना: नियमों के विरुद्ध लगने वाले इन विज्ञापनों से जहां एक तरफ सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा है, वहीं दूसरी तरफ शहर की खूबसूरती और ट्रैफिक व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है।

अब मामला पहुंचा सीधा लखनऊ के दरबार में

जब स्थानीय स्तर पर नोएडा प्राधिकरण के कानों पर जूं नहीं रेंगी, तो समाजवादी पार्टी ने इस लड़ाई को राज्य स्तर पर ले जाने का फैसला किया। डॉ. आश्रय गुप्ता ने इस पूरे भ्रष्टाचार और नियमों की अनदेखी के मामले को उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय के संज्ञान में4लाया।

मामلا कितना गंभीर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नेता प्रतिपक्ष ने इसे बेहद गंभीरता से लेते हुए सीधे प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिख डाला है। इस पत्र में मांग की गई है कि पूरे मामले की निष्पक्ष उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और जितने भी अवैध यूनिपोल शहर में खड़े किए गए हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से हटाया जाए।

"नोएडा में यूनिपोल के नाम पर जनता की जान के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। यदि समय रहते इन अवैध ढांचाओं को नहीं हटाया गया, तो कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी।" - डॉ. आश्रय गुप्ता, महानगर अध्यक्ष, सपा नोएडा

हादसों का खतरा और जनता की सुरक्षा

विशेषज्ञों का मानना है कि तेज आंधी, तूफान या भारी बारिश के दौरान इस तरह के अवैध और बिना मानक के लगाए गए यूनिपोल गिर सकते हैं। देश के कई महानगरों में पहले भी ऐसे होर्डिंग्स और यूनिपोल गिरने से राहगीरों की जान जाने की दुखद घटनाएं सामने आ चुकी हैं। नोएडा और ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में भी हवा के तेज झोंके अक्सर इन विज्ञापनों के लिए खतरनाक साबित होते हैं।

सपा ने साफ कर दिया है कि यदि इस मामले में जल्द ही कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो पार्टी सड़क से लेकर सदन तक आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री कार्यालय के हस्तक्षेप के बाद नोएडा प्राधिकरण इस मामले में क्या और कितनी कड़ी कार्रवाई करता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. नोएडा में अवैध यूनिपोल का मुद्दा किसने उठाया है?

यह मुद्दा समाजवादी पार्टी (सपा) नोएडा महानगर के अध्यक्ष डॉ. आश्रय गुप्ता द्वारा उठाया गया है, जिन्होंने इसकी शिकायत विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय से की है।

2. नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री को पत्र क्यों लिखा है?

नोएडा प्राधिकरण की कथित मिलीभगत से शहर में नियम विरुद्ध लगाए जा रहे यूनिपोल की निष्पक्ष जांच कराने और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इन्हें हटाने के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखा गया है।

3. अवैध यूनिपोल से क्या खतरा हो सकता है?

नियमों की अनदेखी कर लगाए गए ये यूनिपोल कमजोर हो सकते हैं, जिससे तेज आंधी या तूफान में इनके गिरने और बड़ा सड़क हादसा होने का भारी खतरा बना रहता है।

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अनुराधा दुबे

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अनुराधा दुबे एक समर्पित और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जो भारत से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत खबरों को गहराई से समझकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। उन...

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