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दर्द निवारक गोलियों का अंधाधुंध इस्तेमाल दे रहा है किडनी को गंभीर दावत, सीडीएससीओ की बड़ी चेतावनी

दर्द निवारक गोलियों का अंधाधुंध इस्तेमाल दे रहा है किडनी को गंभीर दावत, सीडीएससीओ की बड़ी चेतावनी

छोटी-मोटी शारीरिक तकलीफों, सिरदर्द या बदन दर्द से राहत पाने के लिए मेडिकल स्टोर से तुरंत पेनकिलर (दर्द निवारक दवा) खरीदकर खा लेना आज के समय में एक आम आदत बन चुकी है। लोग बिना यह सोचे कि उनके शरीर के भीतर क्या चल रहा है, मामूली दर्द पर भी अंग्रेजी गोलियों का सेवन शुरू कर देते हैं। लेकिन, क्या आपने कभी यह गहराई से सोचा है कि आपकी यह जरा सी लापरवाही आपके शरीर के सबसे अहम अंगों में से एक यानी किडनी को हमेशा के लिए तबाह कर सकती है? देश के दवा नियामक संगठन ने इस पर बेहद गंभीर चिंता व्यक्त की है।

सीडीएससीओ (CDSCO) की सख्त चेतावनी: थमना चाहिए बिना डॉक्टर की पर्ची के दवाओं का खेल

केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) ने देश के नाम एक बेहद जरूरी और सख्त चेतावनी जारी की है। इस चेतावनी में स्पष्ट किया गया है कि आम जनता द्वारा बिना किसी डॉक्टर की वैध सलाह या पर्ची के पेनकिलर और एंटीबायोटिक्स का लंबे समय तक और बार-बार इस्तेमाल करना एक साइलेंट किलर की तरह काम कर रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, लोग अपनी मर्जी से मेडिकल स्टोर से दवाएं लाकर खुद का डॉक्टर बनने की कोशिश करते हैं, जो आगे चलकर जानलेवा साबित हो सकता है।

नियामक संस्था ने देश भर के डॉक्टरों, मेडिकल स्टोर्स और आम नागरिकों को आगाह किया है कि इन दवाओं के अंधाधुंध इस्तेमाल से शरीर पर जो दुष्प्रभाव (Side Effects) पड़ते हैं, वे कई बार पूरी तरह से अपरिवर्तनीय (Irreversible) होते हैं, यानी एक बार नुकसान होने के बाद उन्हें ठीक करना नामुमकिन हो जाता है।

कैसे पहुंचता है किडनी को नुकसान?

किडनी हमारे शरीर का नेचुरल फिल्टर है, जो खून को साफ करने और टॉक्सिंस (विषाक्त पदार्थों) को बाहर निकालने का काम करती है। जब आप लगातार पेनकिलर (जैसे नॉन-स्टेरॉडल एंटी-इंफ्लेमेटरी ड्रग्स या NSAIDs) का सेवन करते हैं, तो वे किडनी में ब्लड फ्लो को प्रभावित करती हैं। इसके परिणामस्वरूप:

  • किडनी की कोशिकाओं को पर्याप्त ऑक्सीजन और खून नहीं मिल पाता।
  • किडनी की फिल्ट्रेशन क्षमता धीरे-धीरे कम होने लगती है।
  • लंबे समय तक ऐसा चलने से क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) या किडनी फेलियर का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।

एंटीबायोटिक्स का गलत इस्तेमाल: एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस का संकट

दर्द निवारक गोलियों के साथ-साथ एंटीबायोटिक्स का बेजा इस्तेमाल भी एक दूसरी बड़ी राष्ट्रीय चिंता बनता जा रहा है। थोड़ी सी खांसी, जुकाम या वायरल इन्फेक्शन होने पर लोग खुद ही एंटीबायोटिक्स खाना शुरू कर देते हैं। सीडीएससीओ ने इस बात पर जोर दिया है कि एंटीबायोटिक्स का कोर्स अधूरा छोड़ने या बिना डॉक्टर के इन्हें खाने से बैक्टीरिया इन दवाओं के प्रति रेजिस्टेंट (प्रतिरोधी) हो जाते हैं।

इसे 'एंटीमाइक्रोबियल रेजिस्टेंस' (AMR) कहा जाता है, जिसका मतलब है कि भविष्य में जब आपको सचमुच किसी गंभीर संक्रमण के लिए इन दवाओं की जरूरत होगी, तो ये दवाएं आपके शरीर पर असर करना पूरी तरह बंद देंगी। इसके अलावा, कई मजबूत एंटीबायोटिक्स का सीधा असर भी लिवर और किडनी पर पड़ता है।

आम जनता की आदतें और मेडिकल स्टोर की लापरवाही

भारतीय समाज में यह एक आम प्रवृत्ति है कि लोग डॉक्टर की फीस और समय बचाने के लिए सीधे केमिस्ट के पास जाते हैं और कहते हैं, "सर, बदन दर्द की कोई तेज सी गोली दे दो।" केमिस्ट भी बिना प्रिस्क्रिप्शन के धड़ल्ले से ऐसी दवाइयां थमा देते हैं। यह गठजोड़ स्वास्थ्य प्रणाली के लिए एक बड़ा खतरा बन चुका है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक मेडिकल स्टोर्स पर सख्त निगरानी नहीं रखी जाएगी और बिना पर्ची के दवाओं की बिक्री बंद नहीं होगी, तब तक इस तरह के मामलों में कमी आना मुश्किल है।

किन लक्षणों को भूलकर भी न करें नजरअंदाज?

अगर आप भी उन लोगों में से हैं जो अक्सर सिरदर्द या बदन दर्द पर पेनकिलर लेते रहते हैं, तो आपको अपने शरीर में दिखने वाले इन संकेतों को लेकर सतर्क हो जाना चाहिए:

  • पेशाब की मात्रा में अचानक कमी आना या पेशाब का रंग बहुत गहरा होना।
  • चेहरे, आंखों के नीचे या पैरों और टखनों पर सूजन (Edema) दिखाई देना।
  • लगातार थकान महसूस होना, कमजोरी रहना और चक्कर आना।
  • भूख में अचानक कमी आना और जी मिचलाना।

यदि इनमें से कोई भी लक्षण आपको महसूस हो, तो तुरंत किसी नेफ्रोलॉजिस्ट (किडनी रोग विशेषज्ञ) से संपर्क करें और अपनी मर्जी से कोई भी दवा बिल्कुल न लें।

स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं, दवाओं पर निर्भरता घटाएं

विशेषज्ञों की सलाह है कि शरीर में हल्का-फुल्का दर्द होने पर उसे तुरंत केमिकल वाली गोलियों से दबाने के बजाय, प्राकृतिक तरीकों का सहारा लें। पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, नियमित रूप से योग और हल्का व्यायाम करें, और अपनी डाइट में पौष्टिक चीजों को शामिल करें। यदि दर्द असहनीय हो, तो हमेशा किसी योग्य चिकित्सक से परामर्श करने के बाद ही दवा का सेवन करें। याद रखें, आपकी जरा सी सावधानी आपकी किडनी और आपके पूरे जीवन को सुरक्षित रख सकती है।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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