सनातन संस्कृति में मोक्ष की भूमि के रूप में विख्यात गया जी में शुक्रवार को उस वक्त एक नया अध्यात्मिक अध्याय जुड़ गया, जब साल 2026 के बहुप्रतीक्षित पितृपक्ष मेला महासंगम का भव्य और विधिवत शुभारंभ हुआ। देश और दुनिया के कोने-कोने से अपने पितरों की आत्मा की शांति और उनके मोक्ष की कामना के लिए आने वाले लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब अब गया की पावन धरती पर उमड़ने लगा है। इस धार्मिक अनुष्ठान को सुगम और सुरक्षित बनाने के लिए प्रशासनिक मशीनरी पूरी तरह से मुस्तैद नजर आ रही है।
विष्णुपद मंदिर में विधि-विधान से टेका माथा
शुक्रवार को गया पहुंचे बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस महाआयोजन की शुरुआत सबसे पहले धार्मिक आस्था के केंद्र विष्णुपद मंदिर से की। मंदिर के गर्भगृह में पहुंचकर उन्होंने पूरी श्रद्धा के साथ भगवान विष्णु के पावन चरणचिह्नों का दर्शन किया और विशेष पूजा-अर्चना की। पितृपक्ष के इन पंद्रह दिनों में विष्णुपद मंदिर का महत्व कई गुना बढ़ जाता है, क्योंकि यहीं पर पिंडदान और तर्पण के मुख्य अनुष्ठान संपन्न होते हैं।
इस अवसर पर उनके साथ कई दिग्गज नेता और मंत्री भी मौजूद रहे, जिनमें स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार, प्रभारी मंत्री विजय कुमार सिन्हा, केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी और बेलागंज की विधायक मनोरमा देवी प्रमुख रूप से शामिल थे। इन सभी नेताओं ने मंदिर में पहुंचकर देश की सुख-शांति और मेले के सफल संचालन के लिए प्रार्थना की।
फल्गु नदी के देवघाट पर व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण
विष्णुपद मंदिर में पूजा-अर्चना के तुरंत बाद मुख्यमंत्री का काफिला फल्गु नदी के प्रसिद्ध देवघाट की ओर बढ़ा। देवघाट वह पवित्र स्थल है जहां देश के विभिन्न राज्यों से आने वाले लोग अपने पूर्वजों का पिंडदान करते हैं। घाट पर उमड़ने वाली भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए साफ-सफाई, आवागमन के रास्तों, सुरक्षा और श्रद्धालुओं के स्नान आदि की व्यवस्थाओं का जायजा लिया गया।
प्रशासनिक अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को घाट पर की गई तैयारियों की पूरी रिपोर्ट दी। फल्गु नदी के तट पर श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए विशेष घाटों का निर्माण और बैरिकेडिंग की गई है ताकि भीड़ को नियंत्रित रखा जा सके और हर कोई शांतिपूर्ण तरीके से अपने अनुष्ठान पूरे कर सके।
फीता काटकर किया 'पितृपक्ष मेला महासंगम-2026' का आधिकारिक शुभारंभ
देवघाट और मेला क्षेत्र का व्यापक निरीक्षण करने के बाद, अंततः उस घड़ी का आगमन हुआ जिसका सभी को इंतजार था। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने विधिवत फीता काटकर पितृपक्ष मेला महासंगम-2026 का शुभारंभ किया। इस औपचारिक घोषणा के साथ ही गया जी में मेलार्थियों की गतिविधियां और अधिक तेज हो गईं।
शंखनाद और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुए इस शुभारंभ से पूरे शहर का माहौल पूरी तरह से भक्तिमय हो गया है। अब अगले कुछ हफ्तों तक गया का कोना-कोना देश के अलग-अलग हिस्सों से आने वाले सनातनियों की आस्था का केंद्र बना रहेगा।
गांधी मैदान टेंट सिटी: ठहरने के लिए आधुनिक और पुख्ता इंतजाम
लाखों की संख्या में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए केवल पूजा-पाठ ही नहीं, बल्कि उनके ठहरने की व्यवस्था करना भी प्रशासन के लिए एक बड़ी चुनौती होती है। इस समस्या के समाधान के लिए शहर के ऐतिहासिक गांधी मैदान में एक विशाल टेंट सिटी का निर्माण किया गया है।
मेला महासंगम के शुभारंभ के बाद मुख्यमंत्री ने इस टेंट सिटी का भी दौरा किया और वहां की गई आवासीय व्यवस्थाओं का बारीकी से निरीक्षण किया। इस टेंट सिटी में यात्रियों के लिए रोशनी, पानी, सुरक्षा और स्वच्छता के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं ताकि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।
चप्पे-चप्पे पर सुरक्षा का पहरा और भारी पुलिस बल तैनात
इतने बड़े धार्मिक आयोजन में सुरक्षा व्यवस्था सबसे अहम पहलू होती है। मुख्यमंत्री के आगमन और पूरे मेले को सुरक्षित रखने के लिए पुलिस प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। विष्णुपद मंदिर से लेकर फल्गु नदी के सभी घाटों, गांधी मैदान टेंट सिटी और शहर के मुख्य मार्गों पर चप्पे-चप्पे पर पुलिस बल की तैनाती की गई है।
- विष्णुपद मंदिर परिसर में विशेष सुरक्षा गार्ड और सीसीटीवी से निगरानी।
- देवघाट और फल्गु नदी के तट पर गोताखोरों और एनडीआरएफ की तैनाती।
- गांधी मैदान टेंट सिटी के चारों तरफ पुलिस पिकेट और हेल्प डेस्क।
- यातायात को सुचारu रखने के लिए शहर के भीतर नो-एंट्री जोन और वाहन पार्किंग की विशेष व्यवस्था।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों द्वारा लगातार भीड़ प्रबंधन (Crowd Management) की मॉनिटरिंग की जा रही है ताकि किसी भी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
श्रद्धालुओं की सुविधा और प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी
गया जी का यह पितृपक्ष मेला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और परंपरा का एक बहुत बड़ा जीवंत दस्तावेज है। यहां हर साल देश के कोने-कोने से लोग अपने पुरखों को याद करने आते हैं। जिला प्रशासन के लिए यह समय किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं होता, क्योंकि लाखों लोगों की व्यवस्था संभालना बेहद संवेदनशील कार्य है।
पेयजल आपूर्ति से लेकर मोबाइल शौचालयों की स्थापना, प्रकाश व्यवस्था और चिकित्सा शिविरों तक—हर मोर्चे पर प्रशासन मुस्तैद है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से मेला क्षेत्र में कई जगहों पर मेडिकल कैंप बनाए गए हैं जहां डॉक्टर और दवाइयां 24 घंटे उपलब्ध रहेंगी।
पितृपक्ष मेला महासंगम-2026 के इस शानदार और सुव्यवस्थित शुभारंभ के साथ ही गया जी में अनंनित श्रद्धा का सैलाब उतर चुका है। मुख्यमंत्री के दौर और प्रशासनिक तैयारियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि इस बार का मेला श्रद्धालुओं के लिए बेहद सहज, सुरक्षित और यादगार रहने वाला है। अब आने वाले दिनों में यह मोक्षनगरी अपने पूर्वजों के प्रति अटूट प्रेम और श्रद्धा के रंगों में पूरी तरह रंगी नजर आएगी।