बिहार के मुंगेर जिले से एक बेहद डरावनी और चिंताजनक तस्वीर सामने आई है। राज्य में लगातार बदल रहे मौसम और झमाझम बारिश के बीच नदियां एक बार फिर अपने विकराल रूप में लौटने लगी हैं। टेटिया बंबर प्रखंड के बरसंडा गांव के पास महाने नदी का पानी ऐसा उफला कि वहां बना मुख्य संपर्क मार्ग यानी डायवर्सन तीसरी बार ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इस स्थिति ने स्थानीय प्रशासन के दावों और निर्माण कार्यों की पोल खोलकर रख दी है। हालात इतने बेकाबू हैं कि अब ग्रामीण अपनी जान हथेली पर रखकर उफनती नदी को पार करने को मजबूर हैं।
दो फीट ऊपर बह रहा पानी, दर्जनों गांवों का टूटा संपर्क
मिली जानकारी के अनुसार, महाने नदी के इस भयंकर उफान के बाद डायवर्सन के ऊपर करीब दो फीट तक पानी बह रहा है। पानी का बहाव इतना तेज है कि कोई भी वाहन या पैदल यात्री इसे पार करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। इस अहम मार्ग के टूटने से इलाके के दर्जनों गांवों का सीधा संपर्क प्रखंड मुख्यालय, स्थानीय थानों, अस्पतालों और बाजारों से पूरी तरह कट गया है। रोजमर्रा के जरूरी कामों के लिए बाहर निकलने वाले लोग अब अपने ही घरों में कैद होने को मजबूर हो गए हैं।
जान जोखिम में डालकर स्कूल जा रहे मासूम छात्र
मुश्किलें सिर्फ यहीं खत्म नहीं होतीं। इन दिनों कई शैक्षणिक संस्थानों में परीक्षाएं चल रही हैं। भविष्य की चिंता और परीक्षाओं के दबाव के चलते छोटे-छोटे छात्र-छात्राएं अपनी जान को दांव पर लगाकर इस जानलेवा पानी को पार करने को मजबूर हैं। जरा सी चूक किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है, लेकिन मजबूरी ऐसी है कि बच्चों के पास इसके अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा है। अभिभावक अपने बच्चों को स्कूल भेजते वक्त भगवान से सिर्फ उनकी सलामती की दुआ मांग रहे हैं।
अस्पताल जाने वाले मरीजों के लिए बना काल
इस संकट के बीच सबसे दयनीय हालत बीमार मरीजों और गर्भवती महिलाओं की है। यदि किसी की तबीयत अचानक बिगड़ जाए, तो उसे अस्पताल तक पहुंचाना किसी जंग जीतने से कम नहीं है। डायवर्सन के बह जाने के कारण एम्बुलेंस या अन्य वाहन उस पार नहीं जा पा रहे हैं। ग्रामीणों को चारपाई या गोद में उठाकर मरीजों को इस पार से उस पार ले जाना पड़ रहा है, जिसमें कीमती समय बर्बाद हो रहा है और जान जाने का खतरा हर वक्त बना रहता है।
दो हफ्तों में तीसरी बार ध्वस्त हुई व्यवस्था
स्थानीय ग्रामीणों का गुस्सा अब सातवें आसमान पर है। लोगों ने बताया कि पिछले महज दो हफ्तों के भीतर यह डायवर्सन तीसरी बार नदी की तेज धार में बह चुका है। हर बार जब रास्ता बहता है, तो प्रशासन और ठेकेदार ह्यूम पाइप के ऊपर मिट्टी और बालू भरकर खानापूर्ति कर देते हैं। जैसे ही पहाड़ी इलाकों में बारिश बढ़ती है और नदी का जलस्तर थोड़ा भी ऊपर उठता है, वैसे ही पानी का दबाव इस कमजोर व्यवस्था को बहा ले जाता है।
- बुधवार से जारी है बारिश: रुक-रुक कर हो रही बारिश और जंगलों-पहाड़ियों से आ रहे पानी ने नदी का जलस्तर अचानक बढ़ा दिया है।
- अस्थायी समाधानों से मोहभंग: ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार पैचवर्क करने से समस्या हल नहीं होगी, बल्कि कोई ठोस और पक्का इंतजाम होना चाहिए।
- प्रशासन की चुप्पी पर सवाल: बार-बार हादसों की आशंका के बावजूद मौके पर सुरक्षा के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं किए गए हैं।
ग्रामीणों की दो टूक: चाहिए स्थायी समाधान
घटना की जानकारी मिलने के बाद से ही पूरे इलाके में तनाव और नाराजगी का माहौल है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि वे अब हर हफ्ते इस जानलेवा झंझट से नहीं जूझना चाहते। उन्होंने जिला प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की है कि यहां तत्काल एक मजबूत और सुरक्षित वैकल्पिक पुल या डायवर्सन का निर्माण कराया जाए, ताकि लोग बिना किसी डर के आ-जा सकें।
फिलहाल, इस स्थिति ने ग्रामीण विकास के दावों की पोल खोल दी है। मानसून के इस दौर में यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए, तो कभी भी कोई बड़ा हादसा घटित हो सकता है। अब देखना यह है कि स्थानीय प्रशासन इस गंभीर मामले पर कितनी जल्दी सुध लेता है और जनता को इस नारकीय जीवन से कब मुक्ति मिलती है।