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प्रशांत किशोर का बड़ा धमाका: पटना में ढहा BJP का 30 साल पुराना किला, छात्र आंदोलन के बाद बदला समीकरण

प्रशांत किशोर का बड़ा धमाका: पटना में ढहा BJP का 30 साल पुराना किला, छात्र आंदोलन के बाद बदला समीकरण

क्या भारतीय राजनीति का रुख बदल रहा है? देश के सबसे मजबूत राजनीतिक दल के रूप में उभरी बीजेपी को उसकी ही सबसे सुरक्षित सीटों में से एक पर अप्रत्याशित हार का सामना करना पड़ा है। बिहार की राजधानी पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट, जो पिछले तीन दशकों से बीजेपी का अभेद्य किला मानी जाती थी, वहां प्रशांत किशोर की नई-नवेली पार्टी 'जन सुराज' ने बड़ी सेंध लगा दी है।

प्रशांत किशोर का बड़ा संदेश: 'यह मोदी सरकार के लिए वेक-अप कॉल है'

चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज के लिए यह जीत किसी संजीवनी से कम नहीं है। बांकीपुर सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजे आते ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। जीत के बाद कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए प्रशांत किशोर ने कहा, "यह जीत देश के युवाओं की आवाज है। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि वे युवाओं की शिक्षा और रोजगार पर ध्यान दें।"

यह उपचुनाव इसलिए भी चर्चा में था क्योंकि यह देशव्यापी कागज लीक विवाद और छात्र आंदोलनों के ठीक बाद हुआ। इन्हीं आंदोलनों के दबाव में हाल ही में देश के शिक्षा मंत्री को अपने पद से इस्तीफा तक देना पड़ा था।

छात्रों का 'कॉकरोच मूवमेंट' और युवाओं का गुस्सा

बांकीपुर का नतीजा महज एक सीट का फेरबदल नहीं माना जा रहा। दरअसल, हाल के दिनों में सोशल मीडिया से शुरू हुआ 'कॉकरोच मूवमेंट' देश के करोड़ों युवाओं की आवाज बन चुका है। इंस्टाग्राम पर इसके 2.6 करोड़ से ज्यादा फॉलोअर्स हो चुके हैं।

  • बेरोजगारी की मार: अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के मुताबिक, देश में 15-25 वर्ष के स्नातक युवाओं में बेरोजगारी दर करीब 40% तक पहुंच चुकी है।
  • मुद्दों की राजनीति: बांकीपुर के स्थानीय मतदाताओं का कहना है कि उन्होंने खोखले वादों के बजाय अपने बच्चों के बेहतर भविष्य और पारदर्शी परीक्षाओं के नाम पर वोट दिया है।
  • बीजेपी का मंथन: हार के बाद बीजेपी के शीर्ष सूत्रों का कहना है कि पार्टी इस हार का गहराई से आत्मचिंतन (Introspection) करेगी।

अन्य उपचुनावों का हाल और सियासी मायने

इस हफ्ते हुए तीन प्रमुख उपचुनावों में बीजेपी को दो जगहों पर निराशा हाथ लगी है:

  • बांकीपुर (बिहार): जन सुराज पार्टी की ऐतिहासिक जीत।
  • दतिया (मध्य प्रदेश): विपक्षी कांग्रेस ने अपनी सीट पर कब्जा बरकरार रखा।
  • मंजलपुर (गुजरात): बीजेपी ने अपनी यह पारंपरिक सीट आसानी से जीत ली।

क्या बीजेपी की 'अपराजेय' छवि को लगा झटका?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बांकीपुर का नतीजा प्रतीकात्मक रूप से बेहद अहम है। बिहार हमेशा से छात्र राजनीति का केंद्र रहा है। इस नतीजे ने यह साबित कर दिया है कि अगर युवा असंतुष्ट हैं, तो वे पारंपरिक वोट बैंक के गणित को भी बिगाड़ सकते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि इसे सीधे तौर पर राष्ट्रीय मूड नहीं कहा जा सकता, लेकिन इसने बीजेपी की 'हर चुनाव जीतने की अचूक छवि' पर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।

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