हर साल कुदरत का कहर इस कदर टूटता है कि वहां की पूरी अर्थव्यवस्था तबाह हो जाती है? पंजाब का सीमावर्ती (बॉर्डर) इलाका अजनाला इन दिनों कुछ ऐसी ही गंभीर विभीषिका का सामना कर रहा है। हर साल आने वाली भयानक बाढ़ ने यहां के लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। इसी गंभीर संकट का स्थायी समाधान खोजने के लिए अब आम आदमी पार्टी (AAP) के विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने मोर्चा संभाल लिया है।
हाल ही में विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया से एक उच्चस्तरीय मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल में अजनाला विधानसभा क्षेत्र के तमाम सरपंच, चेयरमैन और जिला परिषद सदस्य भी विशेष रूप से मौजूद रहे। बैठक का मुख्य एजेंडा अजनाला को बाढ़ के स्थाई खतरे से निजात दिलाना और इलाके के रुके हुए विकास को गति देना था।
रावी और उज नदी का कहर: अजनाला के दर्द की दास्तान
राज्यपाल से मुलाकात के बाद मीडिया से बात करते हुए विधायक धालीवाल ने अजनाला के लोगों के सालों पुराने दर्द को बयां किया। उन्होंने बताया कि किस तरह हर साल रावी और उज नदियों का उफनता पानी इस पूरे क्षेत्र को जलमग्न कर देता है।
समस्या की जड़ को समझाते हुए उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर से निकलने वाली उज नदी का पानी पठानकोट, सुजानपुर, दीनानगर, गुरदासपुर और डेरा बाबा नानक से गुजरते हुए अजनाला में भारी तबाही मचाता है और अंत में पाकिस्तान की तरफ निकल जाता है। इस प्राकृतिक आपदा के चलते:
- किसानों की लहलहाती फसलें रातों-रात बर्बाद हो जाती हैं।
- सड़कों का नेटवर्क पूरी तरह टूट जाता है, जिससे संपर्क कट जाता है।
- स्कूल और बुनियादी ढांचे धराशायी हो जाते हैं।
- किसानों की उपजाऊ कृषि योग्य भूमि बह जाती है।
- बाढ़ के इस स्थायी खतरे के कारण कोई भी नया निवेशक या उद्योगपति यहां इंडस्ट्री लगाने को तैयार नहीं होता।
उज नदी पर पेंडिंग डैम का मुद्दा और 10-12 साल का इंतजार
विधायक धालीवाल ने राज्यपाल का ध्यान केंद्र सरकार की एक बेहद महत्वपूर्ण और लंबे समय से अटकी हुई योजना की ओर खींचा। उन्होंने बताया कि उज नदी पर डैम बनाने की योजना पिछले 10-12 सालों से ठंडे बस्ते में पड़ी है। यदि यह प्रोजेक्ट समय पर पूरा हो जाता, तो आज यह स्थिति न होती।
राज्यपाल के समक्ष अपील करते हुए उन्होंने कहा कि वे इस गंभीर मुद्दे को देश के प्रधानमंत्री और केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के समक्ष जोर-शोर से उठाएं। इस डैम के निर्माण से न केवल बाढ़ पर लगाम लगेगी, बल्कि:
- जल विद्युत (Electricity) का उत्पादन होगा।
- सिंचाई के लिए नहरों का जाल बिछेगा।
- सीमावर्ती युवाओं के लिए रोजगार के नए द्वार खुलेंगे।
"अगर केंद्र सरकार ‘विकसित भारत’ का सपना साकार करना चाहती है, तो उसे महानगरों के साथ-साथ देश के संवेदनशील बॉर्डर एरिया के विकास पर भी विशेष ध्यान देना होगा। अगर सीमावर्ती इलाके यूं ही नजरअंदाज होते रहे, तो देश का समग्र विकास अधूरा ही रहेगा।" - कुलदीप सिंह धालीवाल, विधायक, अजनाला
1600 करोड़ रुपये के मुआवजे का सवाल
इस मुलाकात के दौरान केवल बाढ़ की रोकथाम ही नहीं, बल्कि आर्थिक नुकसान की भरपाई का मुद्दा भी जोरदार तरीके से उठाया गया। विधायक ने पिछली बार प्रधानमंत्री द्वारा घोषित किए गए 1600 करोड़ रुपये के मुआवजे के अब तक न मिलने पर भी सवाल खड़े किए। जनता का सवाल है कि आपदा के इतने दिन बीत जाने के बाद भी यह सहायता राशि धरातल पर क्यों नहीं उतरी?
राज्यपाल का सकारात्मक आश्वासन
राहत भरी बात यह रही कि राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने प्रतिनिधिमंडल की सभी बातों को बेहद संवेदनशीलता और ध्यान से सुना। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे जल्द ही इस पूरे मामले को लेकर केंद्रीय जल शक्ति मंत्री से विशेष मीटिंग का समय तय करेंगे और अजनाला की इस गंभीर समस्या का कोई ठोस और स्थायी समाधान निकलवाएंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: अजनाला में हर साल बाढ़ आने का मुख्य कारण क्या है?
उत्तर: अजनाला में मुख्य रूप से रावी और उज नदियों के अत्यधिक पानी के कारण बाढ़ आती है, जो जम्मू-कश्मीर से होते हुए पंजाब के कई जिलों से गुजरती है।
Q2: विधायक कुलदीप सिंह धालीवाल ने राज्यपाल से क्या मुख्य मांग की?
उत्तर: विधायक ने उज नदी पर पिछले 10-12 साल से पेंडिंग डैम के निर्माण को जल्द शुरू कराने, 1600 करोड़ रुपये का मुआवजा दिलाने और क्षेत्र के स्थायी विकास की मांग की है।
Q3: इस डैम के बनने से क्या फायदे होंगे?
उत्तर: इस डैम के बनने से बाढ़ नियंत्रण होगा, बिजली का उत्पादन बढ़ेगा, सिंचाई के लिए पानी मिलेगा और सीमावर्ती युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।