मध्य प्रदेश के वन्यजीव इतिहास में एक बार फिर स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। मंदसौर और नीमच जिलों की सीमा पर फैला ऐतिहासिक गांधी सागर अभयारण्य अब एक और मेहमान की किलकारियों और दहाड़ से गूंज उठा है। राज्य के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने एक भव्य और उत्साहवर्धक कार्यक्रम के दौरान विशेष रूप से तैयार किए गए बड़े बाड़े में मादा चीता 'सीसीबी-2' (CCB-2) को पूरी सुरक्षा और प्रोटोकॉल के साथ आजाद किया। इस मादा चीता को बेहद प्यार से नया नाम 'राधा' दिया गया है।
गांधी सागर में चीतों का कारवां बढ़ा: अब कुल संख्या हुई चार
इस नई मादा चीता के खुले बाड़े में कदम रखते ही गांधी सागर अभयारण्य में चीतों की कुल संख्या बढ़कर चार हो गई है। वन्यजीव विशेषज्ञों और पर्यावरण प्रेमियों के लिए यह पल बेहद रोमांचक और गर्व से भरा हुआ था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन और देश में चीता पुनर्स्थापना योजना के तहत मध्य प्रदेश को चीता स्टेट का दर्जा और मजबूती मिल रही है। कुनो नेशनल पार्क के बाद अब गांधी सागर अभयारण्य भी देश में चीतों के दूसरे सबसे बड़े और सुरक्षित आशियाने के रूप में तेजी से उभरकर सामने आ रहा है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इस मौके पर अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार वन्यजीव संरक्षण और पर्यावरण संतुलन के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। गांधी सागर में चीतों के आने से न केवल पर्यावरण प्रेमियों को एक नई सौगात मिली है, बल्कि इस पूरे अंचल में पर्यटन (Eco-tourism) को भी अभूतपूर्व पंख लगेंगे। स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के नए रास्ते खुलेंगे, जिससे बुंदेलखंड और विंध्य के बाद अब मालवा-निमाड़ क्षेत्र भी वैश्विक वन्यजीव मानचित्र पर चमक उठेगा।
वैज्ञानिक निगरानी और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने जानकारी दी है कि मादा चीता 'राधा' को पूरी तरह से स्वस्थ अवस्था में बाड़े में रिलीज किया गया है। उसके स्वास्थ्य पर नजर रखने के लिए विशेषज्ञों की एक विशेष टास्क फोर्स तैनात की गई है। इसके अलावा, अत्याधुनिक सैटेलाइट कॉलर आईडी (Satellite Collar ID) के जरिए उसकी हर एक गतिविधि पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखी जा रही है।
- विशेष नामकरण: मादा चीता का नाम आधिकारिक और प्यार से 'राधा' रखा गया है, जो इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है।
- सुरक्षा कवच: अभयारण्य के भीतर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं, जिसमें एंटी-पोचिंग कैंप और ड्रोन सर्विलांस शामिल हैं।
- शिकार बेस (Prey Base): चीतों के प्राकृतिक खानपान के लिए बाड़े के अंदर चीतल, सांभर और अन्य शाकाहारी वन्यजीवों की पर्याप्त संख्या सुनिश्चित की गई है।
स्थानीय नागरिकों में दिखा भारी उत्साह
मादा चीता 'राधा' को रिलीज किए जाने की खबर जैसे ही आसपास के ग्रामीण इलाकों और पूरे मध्य प्रदेश में फैली, लोगों में जश्न का माहौल बन गया। गांधी सागर के आसपास के गांवों के युवाओं और स्थानीय नागरिकों ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया। उनका मानना है कि इस परियोजना के आने से इस पिछड़े इलाके में विकास की नई बयार बहेगी और देश-विदेश के सैलानी बड़ी संख्या में यहां खींचे चले आएंगे।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि भारत में चीतों की आबादी का विस्तार करना生态 तंत्र (Ecosystem) के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत आवश्यक है। चीता एक शीर्ष शिकारी (Apex Predator) है, जिसकी मौजूदगी जंगल की पूरी फूड चेन को संतुलित रखती है। गांधी सागर का यह विशाल और खुला घास का मैदान चीतों के प्राकृतिक आवास के अनुकूल एकदम सही पाया गया है।
भविष्य की योजनाएं और उम्मीदें
आने वाले महीनों में गांधी सागर अभयारण्य में और भी चीतों को लाए जाने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। वन विभाग के अधिकारी अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव विशेषज्ञों के लगातार संपर्क में हैं। मध्य प्रदेश शासन का लक्ष्य इस क्षेत्र को एशिया का सबसे प्रमुख चीता सफारी हब बनाना है।
जिस तरह से 'राधा' ने गांधी सागर की धरती पर कदम रखा है, उसने न केवल मध्य प्रदेश बल्कि पूरे देश के वन्यजीव प्रेमियों में एक नई उम्मीद जगा दी है। यह सिर्फ एक जानवर का विस्थापन नहीं है, बल्कि विलुप्त हो चुकी एक प्रजाति को उसके घर वापस लाने का ऐतिहासिक संकल्प है, जो अब धरातल पर पूरी मजबूती के साथ सफल होता दिखाई दे रहा है।