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रांची में छात्रों की जिद बरकरार: 22वें दिन भी ऐतिहासिक आंदोलन जारी, CM को लेकर कही बड़ी बात

रांची में छात्रों की जिद बरकरार: 22वें दिन भी ऐतिहासिक आंदोलन जारी, CM को लेकर कही बड़ी बात

झारखंड की राजधानी रांची की सर्द हवाओं और सुस्त पड़ती राजनीति के बीच एक ऐसी तस्वीर उभर रही है, जो राज्य के सत्ता के गलियारों से लेकर प्रशासनिक महकमों तक में हलचल मचाए हुए है। राज्य में छात्र एकता की ताकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि तमाम प्रशासनिक कोशिशों और सर्दियों के मौसम के बावजूद राजधानी में छात्रों का अनिश्चितकालीन आंदोलन आज 22वें दिन में प्रवेश कर चुका है।

हंसते-खेलते युवाओं के चेहरे पर अब संघर्ष की लकीरें साफ देखी जा सकती हैं, लेकिन उनके हौसलों में जरा भी कमी नहीं आई है। आंदोलन की आग अब सिर्फ एक नारे तक सीमित नहीं रही, बल्कि यह झारखंड के युवाओं के भविष्य की एक ऐसी लड़ाई बन चुकी है, जिसपर सबकी निगाहें टिकी हैं। इसी बीच, आंदोलन के मुख्य चेहरों में से एक राजेश प्रसाद का एक ऐसा बयान सामने आया है, जिसने सूबे की राजनीतिक सरगर्मी को अचानक से कई गुना बढ़ा दिया है।

'हमारी मांगें मान लीजिए, अगला मुख्यमंत्री भी आप ही होंगे' - राजेश प्रसाद का बड़ा दांव

आंदोलन की अगुवाई कर रहे छात्र नेता राजेश प्रसाद ने सरकार को एक खुला और बेहद दिलचस्प संदेश दिया है। मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री को संबोधित करते हुए कहा कि, "अगर सरकार हमारी न्यायसंगत मांगें मान लेती है, तो राज्य के तमाम छात्र अगले विधानसभा चुनाव में भी मुख्यमंत्री के साथ चट्टान की तरह खड़े नजर आएंगे।"

इस बयान के सियासी मायने बेहद गहरे हैं। एक तरफ जहां छात्र अपनी हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ उन्होंने यह भी संकेत दे दिया है कि वे विरोध के लिए विरोध नहीं कर रहे, बल्कि समाधान चाहते हैं। राजेश प्रसाद ने आगे कहा, "हम युवा इस राज्य का भविष्य हैं। अगर सरकार युवाओं की सुनेगी, तो युवा भी सरकार के भविष्य को संवारने में पीछे नहीं हटेंगे। लेकिन अगर अनसुना किया गया, तो इसका खामियाजा आने वाले वक्त में सबको भुगतना होगा।"

क्यों सुलग रही है रांची की जमीन? क्या हैं मुख्य मांगें?

आखिर क्या वजह है कि कड़ाके की ठंड और अपनी पढ़ाई-लिखाई छोड़कर ये छात्र पिछले तीन हफ्तों से सड़कों पर डटे हैं? आइए जानते हैं इस आंदोलन के पीछे की असल वजहें:

  • पारदर्शी बहाली प्रक्रिया: छात्र राज्य में विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं (जैसे JPSC और JSSC) में हो रही कथित अनियमितताओं और धांधली को रोकने की मांग कर रहे हैं।
  • समय पर परीक्षा और रिजल्ट: विसंगतियों से मुक्त परीक्षा कैलेंडर जारी किया जाए ताकि छात्रों का बहुमूल्य समय बर्बाद न हो।
  • स्थानीय नीति और नियोजन नीति: झारखंड के मूलवासियों और स्थानीय युवाओं के लिए नौकरियों में स्पष्ट और सुरक्षित प्रावधान किए जाएं।
  • पेपर लीक मामलों की सीबीआई जांच: पूर्व में हुए पेपर लीक कांडों के दोषियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।

इन तमाम मुद्दों को लेकर छात्रों का गुस्सा अब उस मुकाम पर पहुंच गया है, जहां वे बिना किसी ठोस आश्वासन के पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

प्रशासन की मुश्किलें बढ़ीं, राजनीतिक दलों की प्रतिक्रिया

जैसे-जैसे आंदोलन के दिन बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे स्थानीय प्रशासन और सरकार पर नैतिक दबाव भी बढ़ता जा रहा है। विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे हैं, वहीं सत्ता पक्ष के नुमाइंदे भी फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं। जानकारों का मानना है कि चुनाव के ठीक पहले युवाओं की नाराजगी किसी भी मौजूदा सरकार के लिए भारी पड़ सकती है। यही वजह है कि छात्र नेताओं के इस ताजा सियासी दांव ने सरकार के भीतर मंथन तेज कर दिया है।

धरना स्थल पर मौजूद एक अन्य छात्र ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "हम पिछले 22 दिनों से यहां तंबू लगाकर बैठे हैं। हमारे घरवाले परेशान हैं, हमारी पढ़ाई छूट रही है, लेकिन हमारे पास इसके अलावा कोई और रास्ता नहीं बचा था। या तो हम अपनी आवाज आज उठा लें, या फिर पूरी उम्र बेरोजगारी का दर्द झेलते रहें।"

आगे क्या होगा? क्या सरकार झुकेगी?

सवाल यह है कि क्या झारखंड सरकार इन आंदोलित छात्रों की बात सुनेगी? क्या आने वाले दिनों में कोई उच्चस्तरीय कमिटी बनाकर इन मांगों पर विचार किया जाएगा? राजेश प्रसाद के उस बयान के बाद, जिसमें उन्होंने सरकार के समर्थन की बात कही है, गेंद अब पूरी तरह से मुख्यमंत्री और प्रशासन के पाले में है।

यदि सरकार समय रहते कोई सकारात्मक कदम नहीं उठाती है, तो यह आंदोलन और भी उग्र रूप ले सकता है, जिससे राज्य की कानून-व्यवस्था के साथ-साथ राजनीतिक समीकरणों पर भी गहरा असर पड़ना तय है। फिलहाल, रांची की सर्द सड़कों पर युवाओं का यह कारवां अपनी जीत की उम्मीद के साथ अडिग खड़ा है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q1: रांची में छात्रों का आंदोलन कितने दिनों से चल रहा है?

उत्तर: रांची में छात्रों का यह अनिश्चितकालीन आंदोलन आज 22वें दिन में प्रवेश कर चुका है।

Q2: छात्र नेता राजेश प्रसाद ने सरकार को क्या ऑफर दिया है?

उत्तर: राजेश प्रसाद ने कहा है कि यदि सरकार छात्रों की सभी न्यायसंगत मांगें पूरी कर देती है, तो छात्र आगामी चुनाव में मुख्यमंत्री का समर्थन करेंगे।

Q3: छात्रों के मुख्य विरोध का कारण क्या है?

उत्तर: छात्र मुख्य रूप से पारदर्शी नियोजन नीति, रुकी हुई परीक्षाओं के आयोजन, पेपर लीक मामलों पर कार्रवाई और रोजगार के अवसरों की मांग कर रहे हैं।

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काव्या त्रिपाठी

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Senior Editor

काव्या त्रिपाठी बिजनेस और टेक्नोलॉजी की जटिल दुनिया को सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती हैं। वे आर्थिक बदलाव, स्टार्टअप इकोसिस्...

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