क्रिकेट के गलियारों में कुछ पल ऐसे अमर हो जाते हैं, जिन्हें समय चाहकर भी धुंधला नहीं कर सकता। साल 2024 के टी20 वर्ल्ड कप फाइनल की वह शाम भारतीय क्रिकेट प्रेमियों के जेहन में आज भी तरोताजा है, जब बारबाडोस के मैदान पर तिरंगा लहरा रहा था और ड्रेसिंग रूम की सीढ़ियों पर दो दिग्गज आपस में लिपटकर फफक पड़े थे। जी हां, हम बात कर रहे हैं रोहित शर्मा और विराट कोहली की। इस ऐतिहासिक जीत के बाद दोनों का वह भावुक पल सोशल मीडिया पर आंधी की तरह वायरल हुआ था। अब जाकर भारतीय कप्तान रोहित शर्मा ने उस पल से जुड़े कई अनकहे राज खोले हैं, जिससे फैंस की आंखें एक बार फिर नम हो सकती हैं।
एक दशक लंबा इंतजार और वह अनकहा दर्द
भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) के दो सबसे बड़े स्तंभों ने हाल ही में एक टेलीविजन शो के दौरान उस दौर को याद किया जब वे एक अदद आईसीसी ट्रॉफी के लिए तरस रहे थे। रोहित शर्मा ने खुलकर बताया कि कैसे साल 2015 से लेकर 2024 तक का सफर आसान नहीं था। हर चार साल में आने वाला वह महाकुंभ और हर बार हाथ लगती निराशा ने इन खिलाड़ियों को अंदर से झकझोर दिया था।
रोहित ने उस दर्द को बयां करते हुए कहा, 'हम दोनों ही लगातार वर्ल्ड कप का पीछा कर रहे थे। कई बार ऐसा मौका आया जब हम खिताबी मुकाबले के बेहद करीब पहुंचे, लेकिन जीत हमसे छिटक गई। साल 2015, 2019 और फिर 2023 का वह जख्म... मैं 19 नवंबर के उस दिन को अपने दिमाग से पूरी तरह मिटा देना चाहता हूँ। वह एक ऐसा घाव था जो आसानी से नहीं भरता।'
पहले से तय था संन्यास का वह बड़ा फैसला
अक्सर लोगों के मन में यह सवाल उठता है कि क्या वह संन्यास का फैसला अचानक लिया गया था? इस पर विराम लगाते हुए 'हिटमैन' ने स्पष्ट किया कि मैदान पर उतरने से बहुत पहले ही दोनों दिग्गजों ने यह तय कर लिया था कि परिणाम चाहे जो भी हो, यह उनका आखिरी टी20 अंतरराष्ट्रीय सफर होगा।
रोहित ने साझा किया, 'मुझे अच्छी तरह याद था कि 2024 का टी20 वर्ल्ड कप मेरा आखिरी अंतरराष्ट्रीय टी20 टूर्नामेंट होने वाला है। विराट और मैंने आपस में लंबी चर्चा की थी और पहले ही यह तय कर लिया था कि इस टूर्नामेंट के तुरंत बाद हम टी20 फॉर्मेट को अलविदा कह देंगे। इसलिए मैच का नतीजा चाहे कुछ भी रहता, हमारा यह फैसला पहले से लॉक था। हार या जीत से हमारे इस फैसले पर कोई असर नहीं पड़ने वाला था।'
उस वायरल हग के पीछे के असली जज़्बात
जब फाइनल मुकाबला भारत की झोली में आ गया, तब भावनाओं का ज्वार उमड़ना लाजिमी था। रोहित और विराट के बीच हुआ वह आलिंगन सिर्फ दो खिलाड़ियों का मिलना नहीं था, बल्कि यह एक दशक के संघर्ष, आलोचनाओं, उम्मीदों और अंततः मिली मंजिल का जश्न था।
उस पल को याद करते हुए रोहित भावुक हो गए और बोले, 'जब हमने आखिरकार वह जीत हासिल कर ली, तो हमें समझ ही नहीं आ रहा था कि प्रतिक्रिया कैसे दें। हम दोनों ने मिलकर इसके लिए अपनी जान लगा दी थी। इतने सालों की मेहनत और लगातार असफलता के बाद जब सफलता मिली, तो शरीर और मन सुन्न हो गया था। हम अपनी भावनाओं पर बिल्कुल काबू नहीं रख पा रहे थे। उस वक्त जो कुछ भी हो रहा था, वह पूरी तरह से स्वाभाविक और दिल से निकला हुआ था।'
अब आगे क्या? क्या वनडे से भी साथ लेंगे विदाई?
भारतीय क्रिकेट के इन दो महान खिलाड़ियों ने टी20 के बाद टेस्ट क्रिकेट को भी अलविदा कह दिया है। इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज से ठीक पहले दोनों ने रेड बॉल क्रिकेट से दूरी बना ली। अब फैंस की नजरें उनके वनडे करियर पर टिकी हैं। वर्तमान में दोनों खिलाड़ी केवल वनडे फॉर्मेट में देश का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं और उनका एकमात्र बड़ा लक्ष्य साल 2027 का वनडे वर्ल्ड कप अपने नाम करना है।
क्रिकेट पंडितों और जानकारों का मानना है कि जिस तरह इन दोनों ने टी20 और टेस्ट क्रिकेट में एक साथ पारी समेटने का फैसला किया, लगभग वैसी ही पटकथा वनडे क्रिकेट के अंत में भी देखने को मिल सकती है। विराट कोहली पहले ही संकेत दे चुके हैं कि 2027 का यह सफर उनके अंतरराष्ट्रीय करियर का आखिरी अध्याय हो सकता है।
पीढ़ी का अंत और नई शुरुआत
रोहित शर्मा और विराट कोहली का यह खुलासा इस बात का प्रमाण है कि मैदान के बाहर भी इन खिलाड़ियों का तालमेल कितना गहरा है। एक दौर ऐसा था जब दोनों की आपसी अनबन की खबरें तूल पकड़ती थीं, लेकिन समय ने साबित कर दिया कि देश के लिए खेलते समय उनके दिल में सिर्फ एक ही जज्बा था—भारत को नंबर एक बनाना।
आज जब भारतीय क्रिकेट एक बदलाव के दौर से गुजर रहा है और युवा खिलाड़ी टीम की कमान संभाल रहे हैं, तब रोहित और विराट का इस तरह एक-दूसरे के साथ खड़े रहना और एक साथ संन्यास लेना इस खेल की सबसे खूबसूरत कहानियों में हमेशा दर्ज रहेगा। बारबाडोस की वे सीढ़ियां और वह कसकर लगाया गया गले का हार, हमेशा इतिहास के पन्नों में स्वर्ण अक्षरों में लिखा रहेगा।