रूस में संसदीय चुनाव शुरू, पुतिन के लिए युद्ध समर्थन का बड़ा इम्तिहान
Breaking
► नंदीग्राम उपचुनाव में बड़ा उलटफेर, सीएम ममता की उम्मीदवार ने पीछे खींचे कदम ► नेपाल में कुदरत का कहर: टनल में फंसे 6 लोगों की दर्दनाक मौत, रेस्क्यू ऑपरेशन फेल ► निठारी कांड का दरिंदा सुरेंद्र कोली बेनकाब: हरिद्वार में बदला नाम, खोली चाय की दुकान और फिर... ► फिलीपींस के स्कूल में खूनी संघर्ष: अंधाधुंध गोलीबारी में तीन की मौत, मचा हड़कंप ► मलेशिया के पूर्व पीएम नजीब रज़ाक को घर में काटने होगी सजा, शर्त जान उड़ जाएंगे होश ► रूस में संसदीय चुनाव शुरू, पुतिन के लिए युद्ध समर्थन का बड़ा इम्तिहान ► ड्रैगन की दोहरी चाल? हूती विद्रोहियों की लगाम खींचने के लिए चीन ने ईरान पर बनाया भारी दबाव ► अमेरिका का बड़ा रक्षा सौदा: सऊदी अरब को मिलेंगे F-35 फाइटर जेट ► दक्षिण अमेरिका में अमेरिकी सेना का बड़ा कदम, काउंटरनारकोटिक्स ऑपरेशन के लिए भेजे जा रहे ड्रोन ► सीएम मोहन यादव का जबलपुर दौरा: अमर शहीदों को दी श्रद्धांजलि, बलिदान दिवस पर हुआ भव्य आयोजन ► नंदीग्राम उपचुनाव में बड़ा उलटफेर, सीएम ममता की उम्मीदवार ने पीछे खींचे कदम ► नेपाल में कुदरत का कहर: टनल में फंसे 6 लोगों की दर्दनाक मौत, रेस्क्यू ऑपरेशन फेल ► निठारी कांड का दरिंदा सुरेंद्र कोली बेनकाब: हरिद्वार में बदला नाम, खोली चाय की दुकान और फिर... ► फिलीपींस के स्कूल में खूनी संघर्ष: अंधाधुंध गोलीबारी में तीन की मौत, मचा हड़कंप ► मलेशिया के पूर्व पीएम नजीब रज़ाक को घर में काटने होगी सजा, शर्त जान उड़ जाएंगे होश ► रूस में संसदीय चुनाव शुरू, पुतिन के लिए युद्ध समर्थन का बड़ा इम्तिहान ► ड्रैगन की दोहरी चाल? हूती विद्रोहियों की लगाम खींचने के लिए चीन ने ईरान पर बनाया भारी दबाव ► अमेरिका का बड़ा रक्षा सौदा: सऊदी अरब को मिलेंगे F-35 फाइटर जेट ► दक्षिण अमेरिका में अमेरिकी सेना का बड़ा कदम, काउंटरनारकोटिक्स ऑपरेशन के लिए भेजे जा रहे ड्रोन ► सीएम मोहन यादव का जबलपुर दौरा: अमर शहीदों को दी श्रद्धांजलि, बलिदान दिवस पर हुआ भव्य आयोजन

रूस में संसदीय चुनाव शुरू, पुतिन के लिए युद्ध समर्थन का बड़ा इम्तिहान

रूस में संसदीय चुनाव शुरू, पुतिन के लिए युद्ध समर्थन का बड़ा इम्तिहान

मॉस्को की राजनीतिक जमीन पर एक बार फिर सरगर्मी अपने चरम पर है। रूस में बहुप्रतीक्षित संसदीय चुनावों के लिए मतदान प्रक्रिया आधिकारिक तौर पर शुरू हो चुकी है। इस बार का यह चुनावी संग्राम सामान्य राजनीतिक गतिविधियों से कहीं आगे निकलकर एक बड़े भू-राजनीतिक मोड़ पर खड़ा है। देश के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इन चुनावों को सीधे तौर पर यूक्रेन में जारी सैन्य अभियान और सरकार की नीतियों के प्रति जनता के भरोसे का पैमाना करार दिया है।

क्रेमलिन के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बना यह चुनाव

दुनियाभर की निगाहें इस समय रूस की चुनावी गतिविधियों पर टिकी हुई हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यह चुनाव केवल संसद में सीटों के बंटवारे तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पुतिन प्रशासन की नीतियों पर मुहर लगाने जैसा है। क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति कार्यालय) ने इसे राष्ट्रीय एकता और सुरक्षा के नाम पर एकजुटता दिखाने के अवसर के रूप में पेश किया है। देश के विभिन्न हिस्सों में मतदान केंद्रों पर सुबह से ही मतदाताओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं, हालांकि सुरक्षा के कड़े इंतजाम भी हर कोने में नजर आ रहे हैं।

राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने मतदान करने के बाद अपने संदेश में स्पष्ट रूप से संकेत दिया कि देश इस समय एक ऐतिहासिक दौर से गुजर रहा है। उनके अनुसार, रूस के नागरिकों का यह कर्तव्य है कि वे राष्ट्र की संप्रभुता और स्थिरता के पक्ष में अपना मत दें। पश्चिमी देशों के साथ जारी तनाव और आर्थिक प्रतिबंधों के इस दौर में पुतिन सरकार के लिए यह चुनाव घरेलू मोर्चे पर अपनी पकड़ और मजबूत करने का सबसे बड़ा जरिया बन गया है।

युद्ध की छाया और जनमत का गणित

पिछले कुछ वर्षों से यूक्रेन में चल रहे संघर्ष ने रूसी समाज और अर्थव्यवस्था को अंदर तक प्रभावित किया है। ऐसे में यह चुनाव इस बात का स्पष्ट संकेत देगा कि आम रूसी नागरिक युद्ध के परिणामों और सरकारी नीतियों को किस नजरिए से देख रहे हैं।

  • आर्थिक चुनौतियां: पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच महंगाई और सप्लाई चेन की समस्याएं आम जनता के लिए चर्चा का मुख्य विषय बनी हुई हैं।
  • सुरक्षा और राष्ट्रवाद: सरकार समर्थित मीडिया और राजनीतिक दल लगातार 'मातृभूमि की रक्षा' के नैरेटिव को आगे बढ़ा रहे हैं, जिसे एक बड़े वर्ग का समर्थन भी मिल रहा है।
  • विपक्ष की स्थिति: राजनीतिक विश्लेषकों का यह भी मानना है कि मुख्यधारा के विपक्ष के सीमित दायरे के कारण इस चुनाव के नतीजों को लेकर पहले से ही एक निश्चित दिशा का अनुमान लगाया जा रहा है।

चुनावी प्रक्रिया और सुरक्षा के कड़े इंतजाम

देश के विशाल भूगोल को देखते हुए मतदान प्रक्रिया कई चरणों और दिनों में विभाजित हो सकती है, ताकि सुदूर इलाकों तक के लोग आसानी से अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें। ऑनलाइन वोटिंग के विकल्पों को भी इस बार बढ़ावा दिया गया है, हालांकि इसे लेकर पारदर्शिता पर हमेशा से बहस होती रही है। मॉस्को और सेंट पीटर्सबर्ग जैसे बड़े महानगरों से लेकर साइबेरिया के ठंडे इलाकों तक सुरक्षा एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

चुनाव आयोग के अधिकारियों का दावा है कि मतदान शांतिपूर्ण तरीके से चल रहा है और सभी अंतरराष्ट्रीय और स्थानीय नियमों का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है। इसके विपरीत, स्वतंत्र पर्यवेक्षकों और मानवाधिकार संगठनों ने चुनावी माहौल और स्वतंत्र मीडिया पर लगे प्रतिबंधों को लेकर चिंता व्यक्त की है। उनका कहना है कि निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा के अभाव में इन चुनावों के नतीजों का लोकतांत्रिक मूल्यांकन करना कठिन होगा।

वैश्विक कूटनीति पर क्या होगा असर?

इन चुनावों के परिणाम केवल घरेलू राजनीति तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि इनका सीधा असर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और रूस की विदेश नीति पर भी पड़ेगा। यदि पुतिन समर्थक दल भारी बहुमत से जीत दर्ज करते हैं, तो इसे यूक्रेन में अपनी सैन्य रणनीतिक प्राथमिकताओं को जारी रखने के लिए जनता की हरी झंडी के रूप में देखा जाएगा। इससे मास्को का रुख पश्चिमी देशों के प्रति और अधिक कठोर हो सकता है।

दूसरी ओर, अमेरिका और यूरोपीय संघ के देश इन चुनावों पर गहरी नजर बनाए हुए हैं। पश्चिमी राजधानियों में इस बात का आकलन किया जा रहा है कि क्या रूसी जनता के भीतर युद्ध की थकान के कोई शुरुआती संकेत उभर रहे हैं या नहीं। हालांकि, शुरुआती रुझान और जमीनी रिपोर्ट बताती हैं कि फिलहाल राष्ट्रवादी भावनाएं और सरकार का प्रभाव देश के भीतर काफी मजबूत स्थिति में है।


About the Author

ममता पाठक

ममता पाठक

Chief Editor (विदेश खबरें)

ममता पाठक न्यूज़रूम की संपादकीय दिशा तय करने वाली प्रमुख स्तंभ हैं। अंतरराष्ट्रीय खबरों की गहरी समझ और वर्षों के अनुभव के साथ, वे कंटेंट की गुणवत्त...

Read More

ज़रूर पढ़ें (You May Also Like)

अगली खबर पढ़ें:

आगे पढ़ें →