देश को झकझोर देने वाले बहुचर्चित निठारी कांड (Nithari Kand) के मुख्य आरोपी और खूंखार अपराधी सुरेंद्र कोली को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है। कानून की गिरफ्त से बचने और अपनी पहचान छिपाने के लिए कुख्यात कोली ने ऐसा पैंतरा अपनाया था, जिसकी किसी ने कल्पना भी नहीं की थी। अपनी तमाम कारगुजारियों और कानूनी शिकंजे से दूर वह उत्तराखंड के पावन तीर्थ नगरी हरिद्वार में एक आम इंसान की तरह जिंदगी गुजार रहा था। उसने वहां सदाराम के नाम से अपनी नई पहचान गढ़ी थी और महज तीन दिन पहले ही एक छोटी सी चाय की दुकान खोली थी। लेकिन, कहते हैं न कि पाप का घड़ा एक न एक दिन भर ही जाता है। कानून के लंबे हाथों ने आखिरकार उसे ढूंढ निकाला और दबोच लिया।
सदाराम बनकर हरिद्वार की गलियों में चल रही थी नई जिंदगी
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सुरेंद्र कोली पिछले कुछ समय से अपनी पहचान बदलकर हरिद्वार के एक शांत इलाके में रह रहा था। उसने स्थानीय लोगों के बीच अपनी नई पहचान 'सदाराम' स्थापित कर ली थी। किसी को भी इस बात का अंदाजा नहीं था कि जिस शख्स से वे रोजमर्रा की छोटी-मोटी बातें कर रहे हैं या जिससे चाय पी रहे हैं, वह देश के सबसे डरावने और घिनौने अपराधों में से एक का मुख्य अभियुक्त है।
सुरेंद्र कोली ने अपनी पहचान को पूरी तरह से छिपाने के लिए एक सुनियोजित रणनीति बनाई थी। इसी कड़ी में, गिरफ्तारी से ठीक तीन दिन पहले उसने इलाके में एक चाय की दुकान शुरू की थी। उसका मकसद इस दुकान की आड़ में अपनी जड़ें मजबूत करना और गुमनामी की जिंदगी जीना था, ताकि कोई भी उस पर शक न कर सके। लेकिन उसकी यह चाल ज्यादा लंबी नहीं चल पाई और सुरक्षा एजेंसियों की सतर्कता के आगे उसके सारे मंसूबों पर पानी फेर गया।
खुफिया इनपुट और पुलिस की मुस्तैदी से हुआ पर्दाफाश
उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की खुफिया एजेंसियों के बीच तालमेल और एक सटीक इनपुट के आधार पर इस बड़े ऑपरेशन को अंजाम दिया गया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, काफी समय से सुरेंद्र कोली की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी। जब एजेंसियों को पुख्ता सुराग मिला कि निठारी कांड का आरोपी अपनी पहचान बदलकर हरिद्वार में छिपा हुआ है, तो स्थानीय पुलिस के सहयोग से एक विशेष टीम का गठन किया गया।
टीम ने जब उस इलाके में छानबीन शुरू की जहां 'सदाराम' ने हाल ही में चाय की दुकान खोली थी, तो कड़ियां आपस में जुड़ती चली गईं। जब पुलिस ने सख्ती से पूछताछ की और उसके दस्तावेजों और हुलिए की गहनता से जांच की, तो यह साफ हो गया कि यह शख्स कोई और नहीं बल्कि निठारी कांड का वही खूंखार अपराधी सुरेंद्र कोली है, जिसकी तलाश लंबे समय से कानून कर रहा था।
निठारी कांड: वह काला अध्याय जिसने देश को हिला दिया था
यह मामला उस भयावह दौर की याद दिलाता है जब नोएडा के सेक्टर-31 स्थित एक कोठी (D-5) से जुड़ी भयानक सच्चाइयां बाहर आई थीं। उस समय इस घटना ने पूरे देश को सुन्न कर दिया था। मासूम बच्चों और महिलाओं के साथ जो अमानवीय कृत्य किए गए थे, उसने इंसानियत की हर हद को पार कर दिया था। इस मामले में सुरेंद्र कोली और उसकी मालिक मनिंदर सिंह पंढेर की संलिप्तता सामने आई थी, जिसके बाद से देश की अदालतों में लंबी कानूनी लड़ाई चली।
सुरेंद्र कोली पर हत्या, अपहरण और अन्य गंभीर धाराओं के तहत कई मुकदमे दर्ज हैं। निचली अदालत से लेकर ऊपरी अदालतों तक इस मामले में लगातार सुनवाई होती रही है। ऐसे संवेदनशील और गंभीर मामलों में आरोपी का इस तरह से अपनी पहचान बदलकर खुलेआम घूमना और चाय की दुकान चलाना सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासनिक मोर्चे पर भी कई बड़े सवाल खड़े करता है।
स्थानीय लोगों में है दहशत और हैरानी का माहौल
जब हरिद्वार के स्थानीय निवासियों को यह पता चला कि उनके पड़ोस में या उनकी गली में चाय बेचने वाला शख्स कोई आम नागरिक नहीं, बल्कि निठारी कांड का आरोपी सुरेंद्र कोली है, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। लोगों का कहना है कि वे रोजाना उस शख्स से मिलते थे और उसने कभी ऐसा व्यवहार नहीं किया जिससे किसी को भी उस पर शक हो सके। वह बहुत ही शांत स्वभाव से रहता था और अपनी दुकान पर काम करता था।
एक स्थानीय दुकानदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, "हमें तो यकीन ही नहीं हो रहा था कि जिसे हम सदाराम भाई कह रहे हैं, वह इतना बड़ा अपराधी है। वह पिछले कुछ ही दिनों से यहां आया था और अपनी दुकान सेट कर रहा था। पुलिस अचानक आई और उसे अपने साथ ले गई। तब जाकर हमें असली सच्चाई का पता चला।"
आगे की कानूनी कार्रवाई और प्रशासनिक कदम
सुरेंद्र कोली की इस नाटकीय गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस और जांच एजेंसियां आगे की कड़ी जोड़ने में जुटी हैं। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि वह हरिद्वार कैसे पहुंचा, उसे फर्जी पहचान पत्र (ID) बनवाने में किसने मदद की, और इस दौरान उसके संपर्क में कौन-कौन लोग आए थे। उत्तराखंड पुलिस और उत्तर प्रदेश पुलिस मिलकर इस पूरे नेटवर्क को खंगाल रही हैं।
यह घटना एक बार फिर यह साबित करती है कि कानून के हाथ चाहे कितने भी लंबे हों, अपराधी चाहे जितनी भी चालाकी से छिपने की कोशिश कर ले, सच्चाई एक दिन सामने आ ही जाती है। निठारी कांड के इस मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब इस मामले में नए सिरे से सुगबुगाहट तेज हो गई है और पीड़ित परिवारों को एक बार फिर से न्याय की उम्मीदों पर पूरी नजरें टिकी हुई हैं।