भारतीय अर्थव्यवस्था को भीतर से खोखला करने की साजिशें लगातार सामने आ रही हैं। उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले से एक ऐसा सनसनीखेज मामला प्रकाश में आया है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों और स्थानीय पुलिस के भी होश उड़ा दिए हैं। अब तक आपने बाजार में नकली नोटों के चलन के बारे में सुना होगा, लेकिन इस बार मामला सिक्कों से जुड़ा है। पुलिस ने एक ऐसे शातिर नेटवर्क का पर्दाफाश किया है जो धड़ल्ले से बाजार में नकली सिक्के खपा रहा था।
सहारनपुर पुलिस और एसओजी की संयुक्त कार्रवाई
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सहारनपुर की नगर कोतवाली पुलिस और एसओजी (SOG) की संयुक्त टीम ने एक सटीक सूचना के आधार पर इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। पुलिस ने जाल बिछाकर आवास विकास कॉलोनी इलाके से दो मुख्य आरोपियों को धर दबोचा। पकड़े गए आरोपियों की पहचान कुलदीप और विपिन के रूप में हुई है। शुरुआती पूछताछ में इन दोनों के पास से जो बरामदगी हुई, उसने पुलिस अधिकारियों को भी हैरान कर दिया।
1.20 लाख रुपये के नकली सिक्के बरामद
तलाशी के दौरान पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में बीस-बीस रुपये के नकली सिक्के बरामद किए हैं। इन सिक्कों की कुल बाजार कीमत करीब 1.20 लाख रुपये आंकी गई है। ये सिक्के इतनी सफाई से बनाए गए थे कि आम आदमी के लिए असली और नकली में फर्क करना बेहद मुश्किल था। शातिर गिरोह इन्हें बहुत ही शातिर तरीके से आम बाजारों, छोटी दुकानों और रेहड़ी-पटरी वालों के बीच खपाने की फिराक में था, जहां आमतौर पर लोग सिक्कों की ज्यादा बारीकी से जांच नहीं करते हैं।
कैसे काम करता था यह काला कारोबार?
पुलिस की शुरुआती जांच-पड़ताल में यह बात सामने आई है कि यह कोई छुटपुट मामला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ा गिरोह सक्रिय है। कुलदीप और विपिन तो महज इस नेटवर्क का एक मोहरा हैं। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इन नकली सिक्कों को किसी अन्य स्थान पर बड़ी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट या सिंडिकेट के जरिए तैयार किया जाता था और फिर कमीशन बेसिस पर इन्हें सहारनपुर तथा आसपास के इलाकों में सप्लाई किया जाता था।
सूत्रों के हवाले से यह भी पता चला है कि यह गिरोह कमीशन पर काम करने वाले कुछ अन्य लोगों के संपर्क में भी था। ये लोग ग्रामीण इलाकों और साप्ताहिक बाजारों को अपना मुख्य निशाना बनाते थे, क्योंकि वहां डिजिटल ट्रांजैक्शन की तुलना में सिक्कों और कैश का लेन-देन ज्यादा होता है और सतर्कता कम होती है।
पुलिस के लिए अगली बड़ी चुनौतियां
गिरफ्तार किए गए दोनों आरोपियों से पूछताछ के आधार पर पुलिस अब इस नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। पुलिस के सामने अब कई बड़े सवाल हैं:
- ये नकली सिक्के आखिर ढल कहां रहे थे? इनकी फैक्ट्री या गोदाम कहां स्थित है?
- इस सिंडिकेट का मास्टरमाइंड या सरगना कौन है?
- सहारनपुर के अलावा उत्तर प्रदेश या अन्य पड़ोसी राज्यों के किन-किन जिलों में इन सिक्कों की सप्लाई की जा चुकी है?
- क्या इस अवैध कारोबार में किसी बाहरी राज्य के बड़े तस्कर या अपराधी भी शामिल हैं?
आम जनता के लिए बड़ी चेतावनी
इस सनसनीखेज खुलासे के बाद से स्थानीय प्रशासन और बैंकिंग सेक्टर में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि त्योहारी सीजन या भीड़भाड़ वाले बाजारों में ऐसे तत्वों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं। ऐसे में आम नागरिकों और दुकानदारों को भी सावधान रहने की जरूरत है। बाजार में लेन-देन करते समय विशेषकर भारी मात्रा में मिलने वाले सिक्कों की जांच जरूर करें। यदि कोई सिक्का असामान्य लगे या उसकी बनावट, वजन या चमक में कोई अंतर दिखे, तो तुरंत इसकी सूचना स्थानीय पुलिस को दें।
फिलहाल, नगर कोतवाली पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है और उन्हें अदालत में पेश करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। पुलिस का दावा है कि इस नेटवर्क से जुड़े अन्य चेहरों को भी बहुत जल्द बेनकाब कर सलाखों के पीछे भेजा जाएगा और इस अवैध कारोबार के पूरे साम्राज्य को नेस्तनाबूद कर दिया जाएगा।