वाराणसी के आध्यात्मिक क्षितिज पर इन दिनों वेदों की ऋचाएं और मंत्रों की गूंज से एक अलौकिक वातावरण बना हुआ है। पंचकोशी मार्ग स्थित आदि शंकराचार्य महासंस्थानम में चल रहे भव्य सहस्र चंडी महायज्ञ के तहत शनिवार, 19 सितंबर 2026 को एक बेहद खास और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध अनुष्ठान संपन्न हुआ। इस विशेष अवसर पर जगत जननी मां ललिता त्रिपुर सुंदरी का विशेष पूजन और विधि-विधान से अनुष्ठान किया गया, जिसने पूरे परिसर को भक्तिरस से सराबोर कर दिया।
वैदिक मंत्रोच्चार से गूंजा महासंस्थानम परिसर
शनिवार का दिन महासंस्थानम के लिए विशेष महत्व का रहा। जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज के पावन सानिध्य में आयोजित इस अनुष्ठान में देश भर से आए प्रकांड वैदिक विद्वानों और आचार्यों ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत प्रातकाल से ही पारंपरिक वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और देवताओं के आह्वान के साथ हुई।
अनुष्ठान के दौरान मां ललिता त्रिपुर सुंदरी की आराधना की गई। इस दौरान साधकों और उपस्थित श्रद्धालुओं ने देवी से शक्ति, ज्ञान, और विवेक की प्राप्ति की प्रार्थना की। यज्ञशाला में हो रहे मंत्रजाप और हवन की सुगंध से पूरा इलाका महक उठा। अग्नि कुंड में उठती पवित्र लपटों के बीच जब वैदिक मंत्रों का उच्चारण हुआ, तो वहां मौजूद हर एक व्यक्ति की आंखें श्रद्धा से बंद थीं और जुबान पर देवी के मंत्र थे।
धर्म रक्षा और लोककल्याण का माध्यम है शक्ति की आराधना
इस भव्य धार्मिक आयोजन के बीच, जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज ने अपने आशीर्वचन में सनातन संस्कृति और शक्ति साधना के गहरे आध्यात्मिक और सामाजिक अर्थ को समझाया। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा में शक्ति की आराधना का दायरा केवल व्यक्तिगत आध्यात्मिक उन्नति तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संपूर्ण लोककल्याण, धर्म रक्षा और समाज में सकारात्मक ऊर्जा के संचार का एक सशक्त माध्यम है।
"वर्तमान समय में समाज और राष्ट्र के समक्ष कई प्रकार की आंतरिक और बाहरी चुनौतियां हैं। ऐसे दौर में इस तरह के धार्मिक और आध्यात्मिक अनुष्ठान समाज में सद्भाव, नैतिक संस्कार और राष्ट्र के प्रति कर्तव्य की भावना को मजबूत करने का कार्य करते हैं। मां ललिता त्रिपुर सुंदरी की उपासना साधक को केवल भौतिक सुख नहीं, बल्कि आंतरिक बल और विवेक प्रदान करती है।" - जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती
राष्ट्र की एकता, अखंडता और सुरक्षा के लिए समर्पित हुईं आहुतियां
इस सहस्र चंडी महायज्ञ का एक सबसे बड़ा और प्रमुख उद्देश्य राष्ट्रीय एकता और अखंडता को सुदृढ़ करना रहा है। शनिवार को हुए विशेष अनुष्ठान के दौरान यज्ञकुंड में राष्ट्रविरोधी और विघटनकारी शक्तियों के पूर्ण उन्मूलन के लिए विशेष आहुतियां समर्पित की गईं। उपस्थित संतों, विद्वानों और श्रद्धालुओं ने एक स्वर में देश की आंतरिक सुरक्षा, अमन-चैन और सर्वांगीण विकास की कामना की।
यज्ञ में शामिल हुए भक्तों का मानना था कि जब इस तरह के बड़े अनुष्ठान सामूहिक रूप से राष्ट्र हित को ध्यान में रखकर किए जाते हैं, तो उनका प्रभाव पूरे देश की ऊर्जा पर सकारात्मक रूप से पड़ता है।
पूर्णाहुति की ओर बढ़ रहा है महायज्ञ, तैयारियां अंतिम चरण में
आदि शंकराचार्य महासंस्थानम में पिछले कई दिनों से चल रहे इस विशाल सहस्र चंडी महायज्ञ के अंतर्गत प्रतिदिन विभिन्न देवी-देवताओं के निमित्त विशेष पूजन, अर्चन और हवन का क्रम जारी है। अब जबकि यज्ञ अपने अंतिम पड़ाव की ओर बढ़ रहा है, परिसर में पूर्णाहुति को लेकर तैयारियां युद्ध स्तर पर चल रही हैं। आने वाले दिनों में होने वाले इस महाअनुष्ठान के समापन समारोह में देश के विभिन्न हिस्सों से बड़े संतों और धार्मिक आचार्यों के शामिल होने की संभावना है।
दिग्गजों और संतों की रही गरिमामयी उपस्थिति
इस पावन अवसर पर वाराणसी सहित देश के विभिन्न कोनों से आए प्रबुद्ध संत, विद्वान, साधु-संन्यासी और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया और राष्ट्र व समाज के कल्याण के लिए प्रार्थना की।
इस धार्मिक अनुष्ठान में प्रशासनिक और शैक्षणिक जगत से जुड़े कई प्रतिष्ठित चेहरे भी शामिल हुए, जिनमें प्रमुख रूप से श्रम आयुक्त डॉ. महेश कुमार पांडेय, डॉ. विनय कुमार मिश्रा, सच्चिदानंद तिवारी और शिवानंद पाठक ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और महायज्ञ की पूर्णता में अपना योगदान दिया।
सकारात्मक ऊर्जा का संचार
काशी की धरती पर हो रहे इस अनुष्ठान ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि धर्म और अध्यात्म के धागे किस प्रकार समाज को एक सूत्र में पिरोकर रखते हैं। सहस्र चंडी महायज्ञ के इन अंतिम दिनों में वाराणसी का यह क्षेत्र पूरी तरह से भक्तिमय हो चुका है और हर आने जाने वाले श्रद्धालु के मन में लोककल्याण की भावना प्रबल हो रही है।