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वंदे मातरम् विवाद पर संबित पात्रा का कांग्रेस पर बड़ा हमला, कहा- 1937 में बोया गया था देश के विभाजन का बीज

वंदे मातरम् विवाद पर संबित पात्रा का कांग्रेस पर बड़ा हमला, कहा- 1937 में बोया गया था देश के विभाजन का बीज

भारतीय राजनीति में राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम्' को लेकर एक बार फिर से सियासत गरमा गई है। इस बार भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय प्रवक्ता और लोकसभा सांसद संबित पात्रा ने कांग्रेस पार्टी पर ऐतिहासिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए तीखा हमला बोला है। संबित पात्रा का दावा है कि आज देश में जो वैचारिक और राजनीतिक दूरियां नजर आती हैं, उनका बीज आज से लगभग नौ दशक पहले यानी 1937 में ही बो दिया गया था।

संबित पात्रा के तीखे तेवर: क्या है पूरा मामला?

दिल्ली में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बीजेपी सांसद संबित पात्रा ने कांग्रेस के इतिहास के उन पन्नों को पलटा, जिन्हें लेकर अक्सर राजनीतिक गलियारों में बहस छिड़ती रहती है। पात्रा ने सीधे तौर पर कांग्रेस पार्टी और देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की नीतियों पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत जैसे संवेदनशील और राष्ट्रीय एकता के प्रतीक विषय पर भी कांग्रेस की पूर्ववर्ती नीतियां तुष्टिकरण से प्रेरित थीं।

संबित पात्रा ने मीडिया के सामने साल 1937 के उस ऐतिहासिक घटनाक्रम का जिक्र किया जब कांग्रेस पार्टी ने कलकत्ता सत्र में वंदे मातरम् के केवल शुरुआती दो पदों को ही गाने के लिए अधिकृत किया था। बीजेपी का आरोप है कि मुस्लिम लीग के विरोध के आगे झुकते हुए कांग्रेस ने राष्ट्रगीत के एक बड़े हिस्से को काट दिया, जो कि देश के सांस्कृतिक विभाजन की शुरुआत थी।

नेहरू-जिन्ना पत्राचार और CWC की बैठक का जिक्र

अपनी बात को और मजबूती देते हुए संबित पात्रा ने पंडित जवाहरलाल नेहरू और मोहम्मद अली जिन्ना के बीच हुए पत्राचार का भी हवाला दिया। उन्होंने कहा कि उस दौर में कांग्रेस नेतृत्व ने जिस प्रकार तुष्टिकरण की नीति अपनाई, उसी का परिणाम आगे चलकर देश के दुर्भाग्यपूर्ण विभाजन के रूप में सामने आया।

  • 1937 का प्रस्ताव: कांग्रेस ने मुस्लिम तुष्टिकरण के दबाव में आकर वंदे मातरम् के कुछ हिस्सों को हटाने का निर्णय लिया था।
  • नेहरू-जिन्ना पत्र: इस पत्राचार में राष्ट्रवादी प्रतीकों को लेकर कांग्रेस के रुख पर सवाल उठाए गए थे।
  • CWC की बैठक: 19 अगस्त की कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक में लिए गए निर्णयों का भी बीजेपी ने कड़ा विरोध किया है।

संबित पात्रा ने कहा कि इतिहास के इन काले पन्नों को देश की युवा पीढ़ी के सामने लाना बेहद जरूरी है, ताकि यह समझा जा सके कि किन राजनीतिक समझौतों के कारण देश को सांस्कृतिक और भौगोलिक दोनों स्तरों पर भारी कीमत चुकानी पड़ी।

कांग्रेस की ओर से क्या है प्रतिक्रिया?

बीजेपी के इन तीखे हमलों के बाद राजनीतिक सरगर्मी काफी बढ़ गई है। हालांकि कांग्रेस पार्टी और उसके नेताओं की ओर से अभी तक इस पर कोई आधिकारिक और विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन माना जा रहा है कि विपक्षी दल जल्द ही बीजेपी के इन बयानों पर पलटवार करेगा। कांग्रेस का पुराना रुख यह रहा है कि राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों का देश में पूरा सम्मान किया जाता है और इस तरह के मुद्दों को उठाकर बीजेपी केवल राजनीतिक ध्रुवीकरण करना चाहती है।

सांस्कृतिक राष्ट्रवाद बनाम राजनीतिक इतिहास

भारत में सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का मुद्दा हमेशा से चुनाव और राजनीति के केंद्र में रहा है। वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दौरान स्वतंत्रता सेनानियों का 'महामंत्र' था। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित इस गीत ने देश के कोने-कोने में अंग्रेजों के खिलाफ क्रांति की अलख जगाई थी। ऐसे में, इस गीत के इतिहास और इसके साथ जुड़े राजनीतिक निर्णयों पर बहस होना देश की वैचारिक दिशा को एक बार फिर से परिभाषित कर रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले दिनों में यह विवाद और तूल पकड़ सकता है। विशेष रूप से आगामी चुनावों और स्थानीय राजनीतिक आयोजनों में बीजेपी इस ऐतिहासिक प्रसंग का उपयोग कर कांग्रेस को घेरने की पूरी रणनीति बना चुकी है।


1: वंदे मातरम् विवाद की शुरुआत कब और कैसे हुई?

उत्तर: यह विवाद मुख्य रूप से 1937 में शुरू हुआ जब कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के विरोध के बाद राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के केवल शुरुआती दो पदों को गाने का निर्णय लिया था। हाल ही में बीजेपी नेताओं ने इसी ऐतिहासिक फैसले को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा है।

2: संबित पात्रा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में किन मुख्य दस्तावेजों का हवाला दिया?

उत्तर: संबित पात्रा ने 1937 के कांग्रेस प्रस्ताव, पंडित जवाहरलाल नेहरू और मोहम्मद अली जिन्ना के बीच हुए पत्राचार और 19 अगस्त की कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठकों के दस्तावेजों का हवाला दिया है।

3: वंदे मातरम् के रचयिता कौन हैं?

उत्तर: वंदे मातरम् की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने अपने प्रसिद्ध उपन्यास 'आनंदमठ' में की थी, जिसे भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अपार लोकप्रियता मिली थी।

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ममता पाठक

ममता पाठक

Chief Editor

ममता पाठक न्यूज़रूम की संपादकीय दिशा तय करने वाली प्रमुख स्तंभ हैं। अंतरराष्ट्रीय खबरों की गहरी समझ और वर्षों के अनुभव के साथ, वे कंटेंट की गुणवत्त...

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