अतिथि देवो भवः की हमारी संस्कृति कई बार ऐसी परीक्षाओं में डाल देती है, जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती। छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले से एक ऐसी ही झकझोर देने वाली और बेहद दुखद खबर सामने आई है, जिसने हर किसी को स्तब्ध कर दिया है। ग्रामीण आंचल में मेहमाननवाजी की मिसाल पेश करने वाली एक महिला सरपंच को अपनी दरियादिली की कीमत अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। घर आए मेहमानों को आराम देने के लिए उन्होंने अपना पलंग छोड़ दिया और खुद जमीन पर बिस्तर लगाकर सो गईं, जहां एक जहरीले करैत सांप ने उन्हें अपना शिकार बना लिया।
अतिथि सत्कार में उठा लिया गया वह कदम, जो बन गया अंतिम
घटना सरगुजा जिले के बतौली ग्राम पंचायत की है। यहाँ की लोकप्रिय महिला सरपंच 48 वर्षीय जगरमती पैकरा अपने सहज स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व के लिए जानी जाती थीं। सितंबर 2026 की इस घटना ने पूरे इलाके को शोक में डुबो दिया है। हाल ही में उनके घर कुछ मेहमान आए हुए थे। पारंपरिक भारतीय संस्कारों के तहत घर के मुखिया का कर्तव्य होता है कि वह अपने मेहमानों को सबसे आरामदायक सुविधा दे। जगरमती पैकरा ने भी यही किया।
रात के समय जब सोने की बारी आई, तो घर में पलंग की कमी के चलते जगरमती ने अपना व्यक्तिगत पलंग मेहमानों को सोने के लिए सौंप दिया। इसके बाद उन्होंने अपने पति विशुन पैकरा के साथ कमरे के फर्श पर ही बिस्तर लगाया और चैन की नींद सोने चली गईं। उन्हें इस बात का बिल्कुल भी अभास नहीं था कि यह रात उनके जीवन की आखिरी रात साबित होने वाली है।
रात के सन्नाटे में हुआ जानलेवा हमला
देर रात तक सब कुछ सामान्य था। लेकिन वक्त का पहिया कब और किस करवट बैठ जाए, यह कोई नहीं जानता। रात करीब ढाई बजे जगरमती अचानक बेचैन होकर उठीं। उनके शरीर में अजीब सी हलचल हो रही थी। कुछ ही पलों में उन्हें उल्टियां होने लगीं और पेट में तेज मरोड़ उठने लगी। शुरुआत में परिजनों को लगा कि यह कोई सामान्य फूड पॉइजनिंग या पेट दर्द की समस्या है, क्योंकि उन्होंने शाम को साथ में भोजन किया था।
परिजनों ने स्थिति को सामान्य समझकर उनके पेट की मालिश करनी शुरू कर दी। इसी दौरान जब शरीर पर नजर पड़ी, तो पेट के पास किसी कीड़े या जानवर के काटने जैसे छोटे-छोटे निशान दिखाई दिए। यहीं से परिवार के भीतर एक अनहोनी की आशंका ने जन्म लिया।
कमरे की तलाशी में सामने आया असली हत्यारा
शक गहरा होने पर परिजनों ने उस कमरे की बारीकी से तलाशी ली जहाँ महिला सरपंच सोई हुई थीं। टॉर्च की रोशनी में जब कोने और बिस्तरों के आसपास देखा गया, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। वहां एक जहरीला 'करैत' सांप मौजूद था। करैत सांप अपनी खामोशी और बेहद खतरनाक जहर के लिए जाना जाता है। इसके काटने पर अक्सर तेज दर्द नहीं होता, जिसके कारण इंसान सोते-सोते गहरी नींद में ही मौत के आगोश में चला जाता है।
परिजनों ने बिना देर किए सावधानी बरतते हुए उस सांप को एक प्लास्टिक के टब से ढक दिया ताकि वह किसी और को नुकसान न पहुँचा सके। इसके बाद वे तुरंत जगरमती को लेकर स्थानीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बतौली के लिए रवाना हुए।
अस्पताल पहुँचने तक काफी देर हो चुकी थी
बतौली स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टरों ने तुरंत मुस्तैदी दिखाते हुए महिला सरपंच को 'एंटी स्नेक वेनम' (Anti Snake Venom) का इंजेक्शन दिया। लेकिन सर्पदंश का पता चलने और अस्पताल पहुँचने के बीच के अंतराल में जहर पूरे शरीर में तेजी से फैल चुका था। उनकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए उन्हें तुरंत अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल रेफर कर दिया।
परिजन आनन-फानन में उन्हें लेकर अंबिकापुर पहुँचे, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। मेडिकल कॉलेज के चिकित्सकों ने जब जगरमती का परीक्षण किया, तो उन्होंने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल की औपचारिकताएं और पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया, जिसके बाद बतौली गांव में मातम पसर गया।
हंसता-खेलता परिवार बिखरा, बच्चों पर टूटा दुखों का पहाड़
मृतक जगरमती पैकरा अपने पीछे एक भरा-पूरा परिवार छोड़ गई हैं। वह तीन बच्चों की मां थीं। उनके दोनों बेटों की शादी हो चुकी है और वे अपने जीवन में स्थापित हैं, जबकि उनकी बेटी अपनी मां का सपना पूरा करने के लिए नर्सिंग की पढ़ाई कर रही है। एक जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और ममतामयी मां के अचानक इस तरह चले जाने से पूरा परिवार गहरे सदमे में है। पंचायत के लोग अपनी लोकप्रिय सरपंच को याद कर फफक-फफक कर रो रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग की सख्त चेतावनी: झाड़-फूंक के चक्कर में न पड़ें
इस हृदयविदारक घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग एक बार फिर सक्रिय हो गया है। सरगुजा जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) डॉ. पीएस मार्को ने इस मामले में गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए आम जनता के लिए एक बेहद जरूरी एडवाइजरी जारी की है।
डॉ. मार्को ने कहा कि बारिश और उमस के मौसम में सांपों का अपने बिलों से बाहर निकलना आम बात है। खासकर 'करैत' प्रजाति के सांप अंधेरे और गर्माहट की तलाश में इंसानी बस्तियों या बिस्तरों के पास आ जाते हैं। सोते वक्त काटने पर इनका पता नहीं चल पाता, जो जानलेवा साबित होता है।
सीएमएचओ की मुख्य अपीलें इस प्रकार हैं:
- झाड़-फूंक से दूर रहें: सर्पदंश की स्थिति में किसी भी तरह के अंधविश्वास, तांत्रिक या झाड़-फूंक के चक्कर में बिल्कुल न पड़ें। यह समय की बर्बादी है जो मरीज की जान ले सकती है।
- तुरंत अस्पताल पहुँचें: मरीज को बिना एक पल गंवाए सबसे नजदीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुँचाएं, जहाँ एंटी स्नेक वेनम उपलब्ध हो।
- स्टॉक की उपलब्धता: सरगुजा जिले के सभी सरकारी अस्पतालों और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त मात्रा में एंटी स्नेक वेनम का स्टॉक उपलब्ध है, इसलिए घबराने के बजाय समय पर इलाज शुरू करवाएं।
- सतर्कता बरतें: जमीन पर सोते समय हमेशा मच्छरदानी का प्रयोग करें और फर्श पर सोने से पहले पूरी तरह से उजाला करके आसपास की जांच जरूर कर लें।
यह घटना सिर्फ एक परिवार का नुकसान नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए एक बड़ी सीख है कि प्रकृति के इन जीवों से मुकाबला करते समय हमारी थोड़ी सी भी लापरवाही कितना बड़ा विध्वंस ला सकती है। जरूरत है कि हम सतर्क रहें और किसी भी सर्पदंश की स्थिति में तुरंत आधुनिक चिकित्सा का सहारा लें।