पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी महकमा क्षेत्र में कानून-व्यवस्था को झकझोर देने वाली एक बड़ी घटना सामने आई है। बागडोगरा थाना क्षेत्र में गाय चोरी के संदेह में हुई हिंसक झड़प और मॉब लिंचिंग (भीड़ की हिंसा) की घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। पुलिस की शुरुआती जांच में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि इस वारदात के पीछे कोई स्थानीय नहीं, बल्कि एक अंतरराज्यीय गिरोह सक्रिय था, जिसके तार बिहार, पश्चिम बंगाल और हरियाणा से जुड़े हुए थे। इस दर्दनाक वाकये में भीड़ के गुस्से का शिकार हुए दो संदिग्धों की जान चली गई, जबकि पुलिस ने कड़े एक्शन लेते हुए सात अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
कैसे खुला अंतरराज्यीय गिरोह का राज?
बीते शुक्रवार की रात को जो कुछ हुआ, उसने स्थानीय लोगों और पुलिस दोनों को हैरान कर दिया। पुलिस सूत्रों के अनुसार, इस गिरोह के कुल 9 सदस्य दो अलग-अलग टीमों में बंटकर सुनियोजित तरीके से गाय चोरी की नीयत से निकले थे। इनमें से एक टीम ने ताराबाड़ी इलाके में एक घर को निशाना बनाया और वहां से मवेशी को जबरन एक पिकअप वाहन में लाद लिया। जैसे ही घर के मालिक और आसपास के लोगों की नींद खुली, उन्होंने शोर मचाना शुरू कर दिया। ग्रामीणों के भारी विरोध और शोर को देखकर चोरों के होश उड़ गए और वे मवेशी को रास्ते में ही छोड़कर भागने की फिराक में जुट गए।
लेकिन, स्थानीय लोगों ने तत्परता दिखाते हुए कुछ संदिग्धों को मौके पर ही दबोच लिया और उनका गुस्सा फूट पड़ा। भीड़ के हमले के बीच गिरोह का कथित लिंक मैन (सुराग देने वाला और मददगार) शाहिद अख्तर, जो कि चोपड़ा थाना क्षेत्र का रहने वाला था, अपनी चार पहिया गाड़ी से वहां पहुंच गया। जैसे ही भीड़ को उसकी संलिप्तता का पता चला, आक्रोशित लोगों ने उसे भी नहीं छोड़ा। इस हिंसक झड़प में गंभीर रूप से चोट लगने के कारण शाहिद अख्तर की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं, तीन अन्य गंभीर रूप से घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां इलाज के दौरान हरियाणा के रहने वाले साद मोहम्मद ने भी दम तोड़ दिया।
सेना की मुस्तैदी से पकड़े गए आरोपी
इस पूरी घटना का एक और सनसनीखेज पहलू तब सामने आया जब जान बचाकर भाग रहे चार आरोपी सीधा सेना छावनी (आर्मी कैंट) के परिसर में जा घुसे और वहां छिपने की कोशिश की। हालांकि, भारतीय सेना के सतर्क जवानों ने तुरंत स्थिति को भांप लिया और उन संदिग्धों को अपनी हिरासत में ले लिया। शनिवार देर रात सेना के अधिकारियों ने औपचारिकताएं पूरी करते हुए उन चारों आरोपियों को बागडोगरा थाना पुलिस के हवाले कर दिया। साथ ही, सेना की तरफ से इस मामले में एक लिखित शिकायत भी दर्ज कराई गई है, जिसके आधार पर पुलिस ने अपनी कानूनी कार्रवाई को और तेज कर दिया है।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान और राज्यों के कनेक्शन
पुलिस द्वारा की गई ताबड़तोड़ छापेमारी और गिरफ्तारियों के बाद इस अंतरराज्यीय नेटवर्क के जाल का दायरा साफ हो गया है। पकड़े गए और मृत आरोपियों के जो नाम सामने आए हैं, वे देश के अलग-अलग हिस्सों से ताल्लुक रखते हैं:
- शाहिद अख्तर: चोपड़ा थाना क्षेत्र (मृतक)
- साद मोहम्मद: हरियाणा (मृतक)
- रकीब और नूर मोहम्मद: उत्तर दिनाजपुर, पश्चिम बंगाल
- मोहम्मद अनवरुल: किशनगंज, बिहार
- मोहम्मद आजाद और आमिर: पलवल, हरियाणा
- आरिफ खान: फरीदाबाद, हरियाणा
- अकरम खान: नूंह, हरियाणा
पुलिस की कानूनी कार्रवाई और धाराओं का शिकंजा
बागडोगरा थाना पुलिस ने इस दोहरी और गंभीर घटना में कड़े कदम उठाए हैं। सेना की शिकायत और प्राथमिक साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं, जैसे धारा 329(3), 303(2), 62 और 61(2) के तहत मामला दर्ज कर सातों आरोपियों को गिरफ्तार किया है। रविवार को कड़ी सुरक्षा के बीच इन सभी आरोपियों को सिलीगुड़ी महकमा न्यायालय में पेश किया गया, जहां पुलिस ने इनसे गहन पूछताछ के लिए पांच दिनों की पुलिस रिमांड की मांग की है। अदालत अब इस मामले में आगे की सुनवाई कर रही है.
मॉब लिंचिंग का काउंटर केस भी दर्ज
एक तरफ जहां पुलिस गाय चोरी और आपराधिक षड्यंत्र के एंगल से जांच कर रही है, वहीं दूसरी तरफ कानून अपने दायरे में निष्पक्षता से काम कर रहा है। मृतक शाहिद अख्तर की पत्नी की औपचारिक शिकायत पर पुलिस ने मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा हत्या) का एक अलग मामला भी दर्ज कर लिया है। कानून के जानकारों का मानना है कि चोरी के अपराध के बावजूद कानून अपने हाथ में लेने वालों पर भी शिकंजा कसा जाएगा।
प्रशासन अब इस मामले में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहता है। पुलिस घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों (CCTV Footage) को खंगालने में जुटी है ताकि वीडियो फुटेज के जरिए उन सभी स्थानीय लोगों की पहचान की जा सके जिन्होंने कानून को अपने हाथ में लिया और मारपीट की घटना को अंजाम दिया। इसके अलावा, मामले की तकनीकी और वैज्ञानिक जांच के लिए फोरेंसिक टीम को भी सक्रिय कर दिया गया है। सोमवार को फोरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम घटनास्थल का मुआयना कर वहां से फिंगरप्रिंट और अन्य भौतिक साक्ष्य जुटाएगी ताकि कोर्ट में मजबूत चार्जशीट पेश की जा सके।
बढ़ता अपराध और सुरक्षा चिंताएं
सिलीगुड़ी और उसके आसपास के ग्रामीण इलाकों में पिछले कुछ समय से मवेशी चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ रही थीं, जिससे किसानों और पशुपालकों में भारी रोष व्याप्त था। इस घटना ने एक बार फिर से इस बात को उजागर कर दिया है कि कैसे संगठित गिरोह अलग-अलग राज्यों से आकर सीमावर्ती इलाकों को अपना निशाना बनाते हैं। बहरहाल, पुलिस अब इस बात की भी गहराई से पड़ताल कर रही है कि इस गिरोह के तार और कहां-कहां फैले हैं और इनके द्वारा चुराई गई गायों को कहां खपाया जाता था। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और चौंकाने वाले खुलासे होने की उम्मीद है।