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तिरंगे के लिए जान कुर्बान: गंगा में डूबे 22 साल के सोहेब की रोंगटे खड़े करने वाली दास्तान

तिरंगे के लिए जान कुर्बान: गंगा में डूबे 22 साल के सोहेब की रोंगटे खड़े करने वाली दास्तान

देश के प्रति सच्ची देशभक्ति और जज्बा क्या होता है, इसकी एक ऐसी कीमत चुकानी पड़ी जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं। उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले से एक दिल दहला देने वाली और झकझोर देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ राष्ट्रीय ध्वज 'तिरंगे' की शान बचाने के लिए एक 22 साल के युवा ने अपनी जान की बाजी लगा दी। गंगा के उफनते और तेज बहाव के बीच तिरंगे को डूबने से बचाने की इस कोशिश में युवक की जान चली गई। इस हादसे के बाद से पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है और हर कोई इस जांबाज की शहादत को याद कर रहा है।

स्वतंत्रता दिवस पर बच्चों ने की थी अनूठी पहल

घटना बलुआ थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बड़गावा गांव की है। बीते 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर गांव के कुछ छोटे बच्चों ने असीम उत्साह दिखाते हुए गंगा नदी के किनारे रेत पर तिरंगा झंडा फहराया था। बच्चों की यह देशभक्ति देखकर आसपास के लोग भी खुश हुए थे। बच्चों ने बड़े ही चाव से रेत के बीच तिरंगे को स्थापित किया था और उसे सलामी दी थी। उस समय किसी ने यह नहीं सोचा था कि यही प्यारा सा तिरंगा आगे चलकर एक बड़े हादसे की वजह बन जाएगा।

लेकिन कुदरत के खेल और गंगा के बदलते जलस्तर ने सब कुछ बदलकर रख दिया। स्वतंत्रता दिवस के ठीक दो दिन बाद, यानी 17 अगस्त को गंगा नदी का जलस्तर अचानक तेजी से बढ़ने लगा। देखते ही देखते वह स्थान पूरी तरह जलमग्न हो गया जहां बच्चों ने तिरंगा फहराया था।

तिरंगे को पानी से घिरता देख बेचैन हो उठा सोहेब

पानी बढ़ने के कारण वह राष्ट्रीय ध्वज चारों तरफ से बाढ़ जैसे हालात और तेज पानी के बीच घिर गया। गांव के ही रहने वाले 22 वर्षीय सोहेब अहमद उर्फ सुब्बू की नजर जब उस पानी में घिरे तिरंगे पर पड़ी, तो उसका दिल बेचैन हो उठा। सोहेब से यह बर्दाश्त नहीं हुआ कि देश की शान, हमारा तिरंगा इस तरह पानी में डूबे या बह जाए। उसने बिना एक पल गंवाए अपनी जान की परवाह किए बिना गंगा में छलांग लगा दी, ताकि उस तिरंगे को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके।

सोहेब के पिता जुबेर ने भारी मन से मीडिया को पूरी घटना की जानकारी देते हुए बताया कि उनका बेटा देश और तिरंगे के प्रति बेहद समर्पित था। जब उसने तिरंगे को पानी में खतरे में देखा, तो वह खुद को रोक नहीं पाया और उसे बचाने के लिए उफनती धारा में उतर गया।

गहराई का अंदाजा नहीं लगा सका सोहेब

गंगा नदी में लगातार बढ़ते जलस्तर के कारण पानी का बहाव बेहद खतरनाक और तेज हो चुका था। सोहेब जब तिरंगे तक पहुंचा, तब तक वहां पानी की गहराई बहुत ज्यादा बढ़ चुकी थी। सोहेब ने झंडे को तो संभाल लिया, लेकिन वह खुद पानी के तेज बहाव और अत्यधिक गहराई के चक्रव्यूह में फंस गया। वह सतह पर वापस आने के लिए संघर्ष करने लगा, लेकिन गहराई और तेज धाराओं के आगे उसकी एक नहीं चली और वह धीरे-धीरे डूबने लगा।

सोहेब के साथ उसके कुछ दोस्त भी नदी के किनारे मौजूद थे। जैसे ही उन्होंने सोहेब को डूबते हुए देखा, उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। दोस्तों ने शोर मचाया और अपनी तरफ से पूरी कोशिश की कि किसी तरह सोहेब को बचाया जा सके। उन्होंने पानी में उतरने का भी प्रयास किया, लेकिन गंगा का बहाव इतना तेज था कि वे असफल रहे।

ग्रामीणों ने की कड़ी मशक्कत, लेकिन नहीं बचा सके जान

शोरगुल सुनकर आसपास के ग्रामीण तुरंत दौड़कर गंगा घाट पर पहुंचे। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए स्थानीय लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालकर सोहेब को बाहर निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। काफी कड़ी मशक्कत और संघर्ष के बाद ग्रामीणों ने सोहेब को पानी से बाहर निकाला।

हालाँकि, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सोहेब अहोश हो चुका था और उसके शरीर में कोई हरकत नहीं हो रही थी। ग्रामीण तुरंत उसे लेकर सैदपुर स्थित अस्पताल भागे, जहां डॉक्टरों ने उसकी जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों के मुताबिक, पानी में ज्यादा देर तक रहने और फेफड़ों में पानी भर जाने के कारण उसकी सांसें थम चुकी थीं।

परिवार में छाया मातम, दो भाइयों में छोटा था सोहेब

अस्पताल से जब सोहेब का शव उसके पैतृक गांव बड़गावा पहुंचा, तो पूरे गांव में कोहराम मच गया। मां-बाप और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। मृतक सोहेब दो भाइयों में छोटा था। घर के छोटे बेटे की इस तरह अचानक हुई मौत ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है। परिजनों ने गमगीन माहौल में सुपुर्द-ए-खाक करते हुए उसके शव को कब्रिस्तान में दफना दिया।

इस घटना की खबर पूरे क्षेत्र में आग की तरह फैल गई। हर कोई सोहेब के इस जज्बे को सलाम कर रहा है कि उसने अपनी जान की बाजी लगाकर तिरंगे की आन-बान-शान को बनाए रखने की कोशिश की। हालांकि, इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर यह चेतावनी भी दे दी है कि मानसून के दिनों में उफनती नदियों के पास जाने से कितना बड़ा खतरा हो सकता है।


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निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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