अफ्रीकी देश सूडान से एक बेहद दहला देने वाली और दुखद खबर सामने आ रही है। पूर्वोत्तर क्षेत्र में सोने की एक खदान अचानक धंस जाने से भीषण हादसा हो गया, जिसमें कम से कम 11 मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई है। इस भयावह दुर्घटना में करीब 30 लोग गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं, जबकि कई अन्य मजदूरों के अभी भी मलबे में दबे होने की आशंका जताई जा रही है। सूडान में महज एक हफ्ते के भीतर खदान धंसने की यह दूसरी ऐसी बड़ी घटना है, जिसने देश की खनन सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एक हफ्ते में दूसरी बार माइनिंग जोन में मातम
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह हादसा सूडान के उन इलाकों में हुआ जहां पारंपरिक और अनियोजित तरीके से सोने का खनन बड़े पैमाने पर किया जाता है। स्थानीय प्रशासन और राहत एजेंसियों से मिली शुरुआती जानकारियों के मुताबिक, खदान की शाफ्ट अचानक से बैठ गई, जिसके चलते अंदर काम कर रहे मजदूर संभल नहीं पाए और टनों मलबे के नीचे दब गए। पिछले सात दिनों के भीतर सूडान की धरती पर खदान धंसने की यह दूसरी बड़ी त्रासदी है। बार-बार हो रहे इन हादसों के बाद इलाके में कोहराम मचा हुआ है और मृतकों के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय सुरक्षा बल, प्रशासनिक अधिकारी और आपातकालीन राहत दल तुरंत मौके पर पहुंचे। मलबे में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए युद्ध स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। हालांकि, घटनास्थल पर संसाधनों की कमी और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण राहत कार्यों में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
घायलों की स्थिति गंभीर, मलबे में अपनों को तलाश रहे परिवार
इस हादसे में जो 30 मजदूर घायल हुए हैं, उन्हें नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के अनुसार, कई घायलों की हालत बेहद नाजुक बनी हुई है, जिसके कारण मरने वालों का आंकड़ा बढ़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है। खदान के बाहर अपने लापता परिजनों की तलाश में जुटे लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा है। हर कोई अपने प्रियजन की सलामती की दुआ मांग रहा है।
- हादसे का स्थान: पूर्वोत्तर सूडान
- कुल मौतें: 11 मजदूर
- घायल मजदूरों की संख्या: 30
- स्थिति: रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है
असुरक्षित खनन और तकनीकी खामियां बन रही हैं काल
सूडान दुनिया के प्रमुख स्वर्ण उत्पादक देशों में शुमार है, लेकिन यहां का अधिकांश खनन क्षेत्र अनियोजित और सुरक्षा मानकों से कोसों दूर है। देश के सुदूर इलाकों में लोग अपनी आजीविका चलाने के लिए जान जोखिम में डालकर पुरानी और खतरनाक तकनीकों का इस्तेमाल कर खदानों में उतरते हैं। इन खदानों में न तो मजबूत सपोर्ट स्ट्रक्चर होता है और न ही आपातकालीन सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम।
विशेषज्ञों का मानना है कि मॉनसून या भूगर्भीय हलचलों के चलते मिट्टी और चट्टानें कमजोर हो जाती हैं, जिसके कारण ऐसे हादसे आए दिन सामने आते हैं। स्थानीय प्रशासन और सरकार पर लगातार यह दबाव बनाया जा रहा है कि वे अवैध और असुरक्षित खनन गतिविधियों पर रोक लगाएं, ताकि गरीब मजदूरों की जान इस तरह बेमौत न जाए।
प्रशासन की अपील और आगे की कार्रवाई
घटनास्थल पर मौजूद वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि उनकी पहली प्राथमिकता मलबे में दबे प्रत्येक जीवित व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना है। इसके लिए भारी मशीनों और खोजी कुत्तों की मदद ली जा रही है। प्रशासन ने यह भी आश्वासन दिया है कि हादसे के कारणों की गहन जांच की जाएगी और यह पता लगाया जाएगा कि खदान के संचालन में किन नियमों की अनदेखी की गई थी।
बहरहाल, सूडान की इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि पेट की आग बुझाने के लिए इंसान किस हद तक जोखिम उठाने को मजबूर है। आने वाले घंटों में रेस्क्यू ऑपरेशन से मिलने वाली अपडेट्स पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं, क्योंकि हर गुजरते पल के साथ मलबे में दबे लोगों के बचने की उम्मीद कम होती जा रही है।