वाराणसी की पावन धरती पर स्थित ऐतिहासिक सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय इन दिनों अपने कायाकल्प को लेकर चर्चा के केंद्र में है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव और वरिष्ठ सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्र ने रविवार, 21 सितंबर 2026 को विश्वविद्यालय परिसर का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने यहाँ चल रहे विभिन्न विकास कार्यों, शैक्षणिक उन्नयन और तकनीकी बदलावों का बारीकी से जायजा लिया। उनके साथ विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारी और कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे.
ऐतिहासिक परिसर में आधुनिक विकास की बयार
निरीक्षण की शुरुआत मुख्य परिसर से हुई जहाँ पूर्व मुख्य सचिव ने विश्वविद्यालय के कई महत्वपूर्ण भवनों और परिसरों का दौरा किया। उन्होंने लालभवन, पाणिनी भवन, शताब्दी भवन अतिथि गृह, श्रमण विद्या संकाय और नवनिर्मित श्री श्री आनंदमयी महिला छात्रावास का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और उनकी प्रगति की समीक्षा की।
संबंधित अधिकारियों और इंजीनियरों से बातचीत करते हुए उन्होंने दो टूक निर्देश दिए कि निर्माण कार्यों में गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं होना चाहिए। साथ ही, उन्होंने तय समय सीमा के भीतर सभी प्रोजेक्ट्स को पूरा करने और आवश्यकता पड़ने पर काम की गति बढ़ाने पर विशेष जोर दिया। सीएसआर (कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व) फंड के जरिए हो रहे इन विकास कार्यों को उन्होंने विश्वविद्यालय के भविष्य के लिए एक बेहतरीन पहल बताया।
पांडुलिपियों का वैज्ञानिक संरक्षण और डिजिटलीकरण
भारतीय ज्ञान परंपरा और प्राचीन ग्रंथों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण इस संस्थान में रखी गई दुर्लभ पांडुलिपियों का संरक्षण इस दौरे का सबसे अहम आकर्षण रहा। पूर्व सीएस ने संग्रहालय और पांडुलिपिगार का दौरा कर वहां चल रहे वैज्ञानिक ट्रीटमेंट और डिजिटलीकरण के कार्यों का गहराई से अवलोकन किया।
उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि ये प्राचीन ग्रंथ और पांडुलिपियां केवल कागज के टुकड़े नहीं, बल्कि हमारी महान भारतीय मनीषा की अमूल्य ज्ञान-संपदा हैं। उन्होंने ‘उत्कृष्ट ज्ञान भारतम्’ के माध्यम से किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि इनका वैज्ञानिक संरक्षण और डिजिटल होना देश-विदेश के शोधार्थियों, विद्यार्थियों और अध्येताओं के लिए ज्ञान के नए रास्ते खोलेगा। संग्रहालय में ऐतिहासिक और ज्ञानपरक सामग्री के प्रभावी प्रस्तुतीकरण को लेकर भी उन्होंने कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
ऑनलाइन माध्यम से वैश्विक हो रही है संस्कृत शिक्षा
बदलते दौर के साथ कदम ताल मिलाते हुए सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय द्वारा शुरू किए गए ऑनलाइन संस्कृत प्रशिक्षण केंद्र का भी पूर्व मुख्य सचिव ने निरीक्षण किया। यहाँ संचालित हो रही डिप्लोमा कक्षाओं और तकनीकी व्यवस्थाओं का उन्होंने भौतिक जायजा लिया।
उन्होंने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि आधुनिक तकनीक और इंटरनेट के जरिए प्राचीन भाषा को अब सात समंदर पार तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने शिक्षकों और प्रबंधकों से चर्चा करते हुए इस डिजिटल शिक्षा व्यवस्था को और अधिक प्रभावी, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए अपना मार्गदर्शन भी दिया ताकि वैश्विक स्तर पर अधिक से अधिक लोग संस्कृत भाषा से जुड़ सकें.
कुलपति के विजन और प्रयासों को सराहा
इस पूरे दौरे के दौरान विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बिहारी लाल शर्मा ने पुष्पगुच्छ भेंट कर मुख्य अतिथि का स्वागत किया। कुलपति ने इस अवसर पर कहा कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के विजन और मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय के विकास का जो ब्लूप्रिंट तैयार किया गया था, वह आज धरातल पर मूर्त रूप ले रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि संस्थान की प्राचीन आध्यात्मिक और ऐतिहासिक विरासत को जीवित रखते हुए उसे आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ना आज के समय की सबसे बड़ी मांग है।
निरीक्षण के दौरान कुलानुशासक समेत प्रो. जितेन्द्र कुमार अधिकारी, प्रो. दिनेश कुमार गर्ग, डॉ. विशाखा शुक्ला, डॉ. विजेन्द्र आर्य और डॉ. विमल कुमार त्रिपाठी जैसे कई प्रमुख शिक्षक और अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने विश्वविद्यालय के शैक्षणिक और ढांचागत विकास से जुड़ी रूपरेखा पर चर्चा की।
छात्र-छात्राओं के लिए बेहतर होती सुविधाएं
जानकारों का मानना है कि इस तरह के उच्च-स्तरीय निरीक्षणों और प्रशासनिक सक्रियता से शैक्षणिक संस्थानों में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। छात्रावासों के निर्माण और छात्राओं के लिए आधुनिक सुविधाएं जुटाए जाने से दूर-दराज से आने वाले विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए अनुकूल माहौल मिल सकेगा। सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय का यह कायाकल्प आने वाले समय में देश के अन्य पारंपरिक शिक्षण संस्थानों के लिए भी एक मिसाल साबित हो सकता है।