समय के चक्र में हर दिन एक नई कहानी बुनता है। इतिहास के पन्नों को पलटें तो 22 सितंबर की तारीख भारतीय उपमहाद्वीप के सैन्य और राजनीतिक इतिहास में एक विशेष स्थान रखती है। साल 1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध और उसके बाद उपजे कूटनीतिक हालात इस तारीख के आसपास गहराई से जुड़े हैं। यह वही दौर था जब दोनों पड़ोसी देशों के बीच तनाव अपने चरम पर था और दुनिया की बड़ी ताकतें शांति बहाल करने के लिए सक्रिय हो चुकी थीं। इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर विज्ञान, कला, राजनीति और संस्कृति के क्षेत्र में भी इस तारीख ने कई अनूठे बदलावों को दर्ज किया है। आइए जानते हैं 22 सितंबर के इतिहास के उन तमाम पहलुओं को, जिन्होंने दुनिया की दिशा तय की।
1965 का भारत-पाकिस्तान युद्ध और युद्धविराम की पृष्ठभूमि
भारत और पाकिस्तान के बीच 1965 की सैन्य भिड़ंत को दोनों देशों के इतिहास का एक अत्यंत तनावपूर्ण और निर्णायक अध्याय माना जाता है। इस संघर्ष को अक्सर ‘दूसरा कश्मीर युद्ध’ की संज्ञा दी जाती है, क्योंकि इससे ठीक पहले 1947 में देश की आजादी के तुरंत बाद भी दोनों देश कश्मीर के मुद्दे पर आमने-सामने आ चुके थे। यह लड़ाई करीब पांच सप्ताह तक चली और इस दौरान दोनों तरफ से भारी सैन्य बल का इस्तेमाल किया गया।
युद्ध के दौरान भारतीय सेना ने अद्भुत पराक्रम दिखाते हुए पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की राजधानी लाहौर के बाहरी इलाकों तक अपनी पहुंच बना ली थी। इसके साथ ही, सामरिक और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण हाजी पीर दर्रे पर भी भारतीय जवानों ने कब्जा जमा लिया था। हालांकि, इस जंग में दोनों देशों के हजारों सैनिकों और नागरिकों ने अपनी जान गंवाई। लंबे समय तक युद्ध खिंचने के कारण भारत और पाकिस्तान दोनों की अर्थव्यवस्था और सैन्य साजो-सामान पर भारी दबाव पड़ने लगा था। यही वजह थी कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने इस संघर्ष को रोकने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए थे।

ताशकंद समझौते की ओर बढ़ता कदम
संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थायी और अस्थायी सदस्यों सहित दुनिया की तमाम बड़ी शक्तियां यह चाहती थीं कि दक्षिण एशिया में शांति कायम हो और यह खून-खराबा जल्द से जल्द थमे। इस बीच, तत्कालीन सोवियत संघ ने मध्यस्थता की पेशकश की और दोनों देशों को बातचीत की मेज पर लाने की पहल की। युद्धविराम के लगभग चार महीने बाद कूटनीतिक प्रयासों को बड़ी सफलता मिली।
जनवरी 1966 में सोवियत संघ के गणराज्य उज़्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद में भारत के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और पाकिस्तान के राष्ट्रपति अयूब खान ने ऐतिहासिक शांति समझौते पर हस्ताक्षर किए। सोवियत प्रधानमंत्री अलेक्सेई कोसिगिन की उपस्थिति में हुए इस समझौते को दुनिया भर में ‘ताशकंद समझौता’ के नाम से जाना गया, हालांकि इसके दूरगामी राजनीतिक परिणामों पर आज भी इतिहासकार चर्चा करते हैं।
इतिहास के आईने में 22 सितंबर की अन्य प्रमुख घटनाएं
सिर्फ युद्ध और कूटनीति ही नहीं, बल्कि दुनिया के अलग-अलग कोनों में 22 सितंबर के दिन कई ऐसे महत्वपूर्ण बदलाव हुए, जिन्होंने मानव सभ्यता को प्रभावित किया:
- 1539: सिख पंथ के संस्थापक और पहले गुरु, गुरु नानक देव जी का करतारपुर में महाप्रयाण (निधन) हुआ। वर्तमान में पाकिस्तान स्थित यह पवित्र स्थान डेरा बाबा नानक के रूप में दुनियाभर के सिखों की आस्था का केंद्र है।
- 1599: लंदन के फाउंडर हॉल में 21 व्यापारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें भारत के साथ व्यापारिक संबंध स्थापित करने के लिए एक नई कंपनी के गठन पर गहन चर्चा हुई।
- 1792: फ्रांस गणराज्य की स्थापना की आधिकारिक घोषणा की गई, जिसने यूरोपीय राजनीति में राजशाही के खिलाफ एक बड़ा वैचारिक बदलाव ला दिया।
- 1903: अमेरिकी नागरिक इटालो मार्चिओनी को आइसक्रीम कोन के निर्माण और डिजाइन के लिए आधिकारिक पेटेंट प्रदान किया गया, जिसने आधुनिक डेसर्ट इंडस्ट्री को एक नई दिशा दी।
- 1914: प्रथम विश्व युद्ध के दौरान मद्रास (अब चेन्नई) बंदरगाह पर जर्मन युद्धपोत 'इम्देन' ने जबरदस्त बमबारी की, जिससे औपनिवेशिक भारत में युद्ध का सीधा असर महसूस किया गया।
- 1949: सोवियत संघ ने अपने पहले परमाणु हथियार का सफलतापूर्वक परीक्षण कर दुनिया को चौंका दिया, जिसके साथ ही शीत युद्ध के दौरान परमाणु हथियारों की होड़ और तेज हो गई।
- 1961: अमेरिकी राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी ने ‘शांति कोर’ (Peace Corps) की स्थापना से जुड़े विधायी अधिनियम पर हस्ताक्षर किए।
- 1980: ईरान और इrak के बीच लंबे समय से चला आ रहा सीमा विवाद एक पूर्ण और भीषण युद्ध में तब्दील हो गया, जो कई वर्षों तक चला।
- 2007: ईरान ने अपनी मारक क्षमता का प्रदर्शन करते हुए 1800 किलोमीटर तक वार करने में सक्षम ‘घदिर’ मिसाइल का सफल प्रदर्शन किया। इसी दिन नासा के अंतरिक्ष यान ने मंगल ग्रह की सतह पर गुफाओं जैसी सात रहस्यमयी आकृतियों का पता लगाया।
इस दिन जन्मे महान व्यक्तित्व
22 सितंबर की तारीख ने भारतीय समाज, आध्यात्मिकता और कला जगत को कई ऐसे दिग्गज दिए हैं जिन्होंने अपने क्षेत्रों में अमिट छाप छोड़ी है:
- शारदा देवी (1853): आध्यात्मिक संत रामकृष्ण परमहंस की जीवनसंगिनी और शिष्या, जिन्हें मां शारदा के रूप में अध्यात्म जगत में अत्यधिक सम्मान और श्रद्धा की दृष्टि से देखा जाता है।
- वी. एस. श्रीनिवास शास्त्री (1869): भारत के महान समाज सुधारक, शिक्षाविद् और उत्कृष्ट वक्ता, जिन्होंने देश की राजनीतिक और सामाजिक चेतना को जगाने में अहम भूमिका निभाई।
- पवन कुमार चामलिंग (1950): भारतीय राजनीति के जाने-माने चेहरे और सिक्किम राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री तथा ‘सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट’ राजनीतिक दल के संस्थापक।
- रोहित सरदाना (1979): भारत के लोकप्रिय और बेबाक समाचार प्रस्तोता (News Anchor) एवं पत्रकार, जिनकी पत्रकारिता ने एक लंबी लकीर खींची।
प्रमुख हस्तियों का निधन
यह तारीख अपने साथ कुछ अपूरणीय क्षतियों की यादें भी समेटे हुए है:
- गुरु नानक देव (1539): सिख धर्म के प्रथम गुरु, जिन्होंने समाज को मानवता, एकता और करुणा का संदेश दिया, इसी दिन ज्योति ज्योत समाए।
- दुर्गा खोटे (1991): हिंदी और मराठी सिनेमा जगत की प्रतिष्ठित एवं दिग्गज अभिनेत्री, जिन्होंने भारतीय फिल्मों में मां के किरदारों को एक नई गरिमा और ऊंचाई प्रदान की।
- मंसूर अली खान पटौदी (2011): भारतीय क्रिकेट इतिहास के सबसे करिश्माई कप्तानों में से एक और मशहूर बल्लेबाज 'टाइगर' पटौदी का इसी वर्ष निधन हुआ।
- आशालता वाबगांवकर (2020): मराठी और हिंदी सिनेमा की जानी-मानी अभिनेत्री, जिन्होंने अपनी सशक्त और सहज अभिनय शैली से दर्शकों के दिलों में गहरी जगह बनाई।
महत्वपूर्ण दिवस
तारीखों के इस सिलसिले में 22 सितंबर को ‘राष्ट्रीय गुलाब दिवस’ (National Rose Day) के रूप में भी मनाया जाता है, जो कैंसर पीड़ितों के कल्याण, उनके जीवन में प्रेम और उम्मीद का संचार करने के उद्देश्य से समर्पित है। इतिहास का यह दिन हमें अतीत की भूलों से सीखने और भविष्य के निर्माण के लिए कूटनीति, शांति और मानवीय मूल्यों को सर्वोपरि रखने की सीख देता है।