राजनीतिक दलों के आयोजनों में भीड़भाड़ और शक्ति प्रदर्शन आम बात है, लेकिन कई बार ये भीड़ आयोजकों और नेताओं के लिए ही भारी पड़ जाती है। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से एक ऐसा ही अनोखा और हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां पार्टी के एक बड़े नेता और प्रभारी के स्वागत के दौरान ही स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं की जेब कट गई। यह घटना राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनी हुई है और सुरक्षा व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े कर रही है।
भीड़भाड़ का फायदा उठाकर शातिर चोरों ने मारी पैनी नजर
घटना उस समय की है जब पार्टी के नवनिुयुक्त छत्तीसगढ़ प्रभारी का स्वागत करने के लिए हवाई अड्डे से लेकर पार्टी कार्यालय तक भारी भीड़ जुटी हुई थी। कार्यकर्ता ढोल-नगाड़ों के साथ अपने नेता का स्वागत करने पहुंचे थे। इस दौरान चारों तरफ अफरा-तफरी और भारी धक्का-मुक्की का माहौल था। इसी भीड़ का फायदा उठाते हुए शातिर जेबकतरों के गिरोह ने सक्रियता दिखाई और कई दिग्गज नेताओं व कार्यकर्ताओं के कीमती मोबाइल फोन और नकदी पर हाथ साफ कर दिया।
जब स्वागत का शोरगुल थमा और नेताजी अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए, तब जाकर पीड़ितों को अपनी जेबें खाली होने का अहसास हुआ। एक के बाद एक कई नेताओं ने अपनी जेब कटने की शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद वहां हड़कंप मच गया। जिस पार्टी के कार्यक्रम में सुरक्षा और अनुशासन का दावा किया जा रहा था, वहीं इस तरह की वारदात होना अपने आप में एक बड़ा प्रशासनिक और सांगठनिक फेलियर माना जा रहा है।
नेताजी के स्वागत में लगे थे नारे, जेब से उड़ गए हजार
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, स्वागत समारोह के दौरान नारेबाज़ी इतनी तेज थी कि किसी को भी भनक तक नहीं लगी कि उनकी जेब में क्या हो रहा है। पेशेवर पाकेटमारों ने भीड़ की आड़ में इस पूरी वारदात को सुनियोजित तरीके से अंजाम दिया। पीड़ित नेताओं में से कुछ ऐसे भी थे जो इस पूरे आयोजन की व्यवस्था संभाल रहे थे। उनका कहना है कि वे अपने नेता के स्वागत में इतने मग्न थे कि उन्हें अपने पास रखे सामान का ध्यान ही नहीं रहा।
प्रमुख बिंदु:
- घटनास्थल: रायपुर, छत्तीसगढ़ (स्वागत कार्यक्रम स्थल)।
- शिकार कौन: पार्टी के स्थानीय नेता और सक्रिय कार्यकर्ता।
- चोरी हुआ सामान: महंगे स्मार्टफोन्स और हजारों रुपए नकद।
- वजह: अत्यधिक भीड़, कुप्रबंधन और भारी धक्का-मुक्की।
सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल
इस घटना के बाद अब पार्टी के भीतर ही आंतरिक सुरक्षा और आयोजनों की रूपरेखा पर सवाल उठने लगे हैं। जानकारों का कहना है कि जब बड़े नेताओं के दौरों पर इस तरह की अव्यवस्था फैलती है, तो आम जनता की सुरक्षा का अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। पुलिस प्रशासन भी इस मामले की जांच में जुट गया है और आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि उन शातिर चोरों की पहचान की जा सके जो इस राजनीतिक जश्न का फायदा उठाने में कामयाब रहे।
फिलहाल, इस घटना ने राजनीतिक आयोजनों में सुरक्षा इंतजामों की पोल खोलकर रख दी है। नेताजी का स्वागत तो धूमधाम से हो गया, लेकिन जिन कार्यकर्ताओं की जेबें खाली हुई हैं, उनके लिए यह दिन एक कड़वा अनुभव बनकर रह गया है। पुलिस अब चोरों की तलाश में जुटी है, देखना यह होगा कि इस मामले में क्या कुछ नया खुलासा होता है।