विकसित भारत के संकल्प में दीनदयाल उपाध्याय के विचार मार्गदर्शक: स्वतंत्र देव सिंह
भारतीय राजनीति के क्षितिज पर जब भी वैचारिक दृढ़ता, सादगी और राष्ट्रसेवा की बात आती है, तो पंडित दीनदयाल उपाध्याय का नाम सबसे पहले लिया जाता है। उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में शुक्रवार को उनकी जयंती के अवसर पर एक विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में राज्य सरकार के जल शक्ति मंत्री और गोरखपुर जिले के प्रभारी मंत्री स्वतंत्र देव सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उन्होंने पार्टी के क्षेत्रीय कार्यालय रानीडीहा में पहुंचकर पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की और उन्हें नमन किया।
इस अवसर पर अपने संबोधन में स्वतंत्र देव सिंह ने कहा कि आज भारतीय जनता पार्टी दुनिया का सबसे बड़ा राजनीतिक संगठन बन चुकी है और देश के अधिकांश राज्यों में पार्टी की सरकारें पूरी मुस्तैदी से काम कर रही हैं। इस अभूतपूर्व सफलता और विस्तार के पीछे कोई और नहीं, बल्कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का वह वैचारिक चिंतन है, जो इस पार्टी की नींव में मजबूती से धंसा हुआ है। उन्होंने कहा कि दीनदयाल जी ने हमेशा समर्पित कार्यकर्ताओं के निर्माण पर जोर दिया, जिनकी बदौलत आज संगठन इस मुकाम पर पहुंचा है।
अंत्योदय और राष्ट्रसेवा की भावना से गढ़ा गया संगठन
स्वतंत्र देव सिंह ने आगे कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने कभी भी पद या प्रतिष्ठा की लालसा नहीं रखी, बल्कि उन्होंने समाज के सबसे अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति (अंत्योदय) के उत्थान को ही अपने जीवन का एकमात्र उद्देश्य बनाया। उन्होंने ऐसे कार्यकर्ताओं की फौज तैयार करने पर बल दिया जो निस्वार्थ भाव से राष्ट्रसेवा में जुटे रहें। मंत्री ने उपस्थित कार्यकर्ताओं को प्रेरित करते हुए कहा कि हमें उनके विचारों को अपने जीवन में उतारना होगा ताकि आने वाली पीढ़ियां भी राष्ट्रसेवा की इस महान परंपरा को आगे बढ़ा सकें और एक सशक्त व विकसित भारत के निर्माण में अपना योगदान दे सकें।
राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा अक्सर होती है कि कैसे एक वैचारिक संगठन इतने विशाल स्वरूप में बदला। इस सवाल का जवाब देते हुए नेताओं ने माना कि वैचारिक स्पष्टता ही किसी संगठन को दीर्घायु और प्रासंगिक बनाती है। दीनदयाल जी का 'एकात्म मानववाद' और 'अंत्योदय' का दर्शन आज के दौर में भी उतना ही प्रासंगिक है जितना दशकों पहले था।
क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय ने क्या कहा?
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे क्षेत्रीय अध्यक्ष विनोद राय ने अपने संबोधन में कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने भारतीय राजनीति को एक नई दिशा दी। उन्होंने राष्ट्रवाद, अंत्योदय और एकात्म मानववाद जैसे सिद्धांतों के जरिए देश को सोचने का एक नया तरीका दिया। उनका पूरा जीवन सादगी, अगाध समर्पण और संगठन के प्रति अटूट निष्ठा की मिसाल रहा है।
- राष्ट्रवाद: देश सर्वोपरि की भावना को जन-जन तक पहुंचाना।
- अंत्योदय: समाज के अंतिम व्यक्ति के विकास की परिकल्पना।
- एकात्म मानववाद: समाज और व्यक्ति के बीच के सामंजस्य का अनूठा दर्शन।
विनोद राय ने जोर देकर कहा कि केवल उनकी जयंती मना लेना या माला पहना देना ही काफी नहीं है, बल्कि उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाना और उनके आदर्शों को अपने आचरण में ढालना ही उनके प्रति हमारी सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
कार्यक्रम में दिग्गजों की रही मौजूदगी
गोरखपुर के रानीडीहा स्थित क्षेत्रीय कार्यालय में आयोजित इस भव्य श्रद्धांजलि सभा में भारतीय जनता पार्टी के कई वरिष्ठ नेता और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। कार्यक्रम में मुख्य रूप से भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष कामेश्वर सिंह, जिला अध्यक्ष जनार्दन तिवारी, जिला प्रभारी अजय सिंह गौतम, महानगर प्रभारी महेश शुक्ला, क्षेत्रीय महामंत्री डॉ. बच्चा पांडेय नवीन, सत्येंद्र सिन्हा, राहुल श्रीवास्तव, सहजनवा के विधायक प्रदीप शुक्ला, क्षेत्रीय उपाध्यक्ष राजेश गुप्ता, रणजीत राय बड़े, हरिकेश गुप्ता, क्षेत्रीय मीडिया सह प्रभारी राहुल तिवारी, पंकज जयसवाल और पवन चतुर्वेदी समेत बड़ी संख्या में पार्टी पदाधिकारी और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
सभी उपस्थित लोगों ने एक सुर में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के चित्रों पर पुष्प अर्पित किए और उनके बताए हुए मार्ग पर चलने तथा संगठन के हितों को सर्वोपरि रखने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का माहौल पूरी तरह से वैचारिक ऊर्जा से ओत-प्रोत दिखाई दिया, जहां हर कार्यकर्ता के चेहरे पर राष्ट्र निर्माण का संकल्प साफ झलकता था।
वर्तमान परिप्रेक्ष्य में क्यों जरूरी है दीनदयाल का चिंतन?
आज के समय में जब राजनीति तेजी से बदल रही है और भौतिकतावाद हावी होता जा रहा है, ऐसे में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के मूल्य और भी ज्यादा प्रासंगिक हो जाते हैं। उनका 'एकात्म मानववाद' केवल एक राजनीतिक सिद्धांत नहीं, बल्कि मनुष्य, प्रकृति और समाज के बीच संतुलन साधने का एक संपूर्ण जीवन दर्शन है। भाजपा के रणनीतिकार मानते हैं कि पार्टी की वैचारिक धुरी को मजबूत रखने के लिए ऐसे आयोजनों का होना और नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ना बेहद आवश्यक है।
इस प्रकार, गोरखपुर में संपन्न हुआ यह कार्यक्रम न सिर्फ एक औपचारिकता था, बल्कि आने वाले दिनों में राजनीतिक दिशा और दशा तय करने वाले वैचारिक मंथन का एक अहम हिस्सा साबित हुआ।