त्योहारों का सीजन हो या फिर शाम की हल्की-फुल्की भूख, नमकीन और चिवड़ा हर भारतीय घर की पहली पसंद होते हैं। लोग स्वाद के चक्कर में अक्सर बाहर से खुली या पैकेटबंद चीजें खरीद लेते हैं, लेकिन यह स्वाद कई बार जिंदगी पर भारी पड़ सकता है। महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले से एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने खाद्य सुरक्षा पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वरोरा शहर के एक मशहूर चिवड़े की दुकान से खरीदे गए स्नैक्स में मृत छिपकली मिलने से सनसनी फैल गई। इस दूषित खाद्य पदार्थ को खाने के बाद सात लोगों की अचानक तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें आनन-फानन में अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

कच्चे चिवड़े के पैकेट में मिला यह खतरनाक सरप्राइज
घटना चंद्रपुर जिले के वरोरा शहर की है, जहां बस स्टैंड के समीप 'मनोज चिवड़ा सेंटर' नाम से दुकान संचालित होती है। सोमवार को कुछ स्थानीय ग्राहकों ने इस दुकान से कच्चा चिवड़ा खरीदा था। ग्राहक इसे अपने घर ले गए और स्वाद लेकर खाना शुरू किया, लेकिन कुछ ही देर में उनके शरीर में अजीब सी बेचैनी शुरू हो गई। देखते ही देखते एक के बाद एक सात लोगों को उल्टी, चक्कर और गंभीर रूप से पेट दर्द की शिकायत होने लगी।
जब परिजनों ने उस चिवड़े की पैकेट की बारीकी से जांच की, तो उनके होश उड़ गए। चिवड़े के अंदर एक मृत छिपकली पड़ी हुई थी। इस भयानक खुलासे के बाद पूरे इलाके में हड़कंप मच गया। जिस दुकान से यह चिवड़ा खरीदा गया था, वहां ग्राहकों की भीड़ जमा होने लगी और लोग खाद्य पदार्थों की शुद्धता को लेकर गुस्से में नजर आए।
अस्पताल में मची अफरा-तफरी, फूड पॉइजनिंग की पुष्टि
तबीयत बिगड़ने वाले सभी सातों मरीजों को तत्काल वरोरा के उपजिला अस्पताल (ग्रामीण अस्पताल) ले जाया गया। अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों की टीम ने तुरंत इलाज शुरू किया। गनीमत यह रही कि समय पर अस्पताल पहुंच जाने के कारण सभी की जान बच गई।
अस्पताल के अधीक्षक डॉ. प्रफुल्ल खुजे ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट रूप से फूड पॉइजनिंग का मामला प्रतीत होता है। उन्होंने कहा, 'अस्पताल में लाए गए सभी सातों मरीजों की हालत गंभीर थी, जिन्हें तुरंत मेडिकल सपोर्ट दिया गया। समय पर उपचार मिलने के कारण अब सभी की स्थिति पूरी तरह स्थिर है और खतरे से बाहर होने के बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।'
खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) की त्वरित कार्रवाई
जैसे ही इस सनसनीखेज घटना की जानकारी अन्न एवं औषधि प्रशासन (FDA) विभाग तक पहुंची, अधिकारियों में खलबली मच गई। विभाग ने बिना किसी देरी के तुरंत एक्शन लेते हुए मौके पर अपनी टीम भेजी।
जिला खाद्य अधीक्षक प्रवीण उमक ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए बताया कि विभाग ने तुरंत प्रभाव से 'मनोज चिवड़ा सेंटर' का खाद्य लाइसेंस (Food License) निलंबित कर दिया है। इसके साथ ही दुकान को सील कर दिया गया है ताकि आगे और कोई ग्राहक इस तरह के जहरीले खाद्य पदार्थों का शिकार न हो। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन से विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद दुकान संचालक के खिलाफ और भी कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
स्थानीय नागरिकों में आक्रोश और सुरक्षा को लेकर मांग
इस घटना के सामने आने के बाद वरोरा शहर के नागरिकों में भारी रोष व्याप्त है। लोगों का कहना है कि शहर में धड़ल्ले से बिना लाइसेंस और बिना किसी हाइजीन के खाद्य पदार्थ बेचे जा रहे हैं। कई होटल, ढाबे और स्नैक्स सेंटर ग्राहकों के स्वास्थ्य के साथ खुलेआम खिलवाड़ कर रहे हैं।
स्थानीय रहवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि केवल इस एक दुकान पर कार्रवाई करके औपचारिकता पूरी न की जाए, बल्कि पूरे शहर में जितने भी खाद्य विक्रेता हैं, उनकी दुकानों की नियमित जांच (Regular Inspection) की जाए। लोगों का कहना है कि खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को समय-समय पर बाजारों का औचक निरीक्षण करना चाहिए ताकि भविष्य में इस तरह की जानलेवा घटनाओं को रोका जा सके।
सावधानी ही बचाव: क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
इस प्रकार की घटनाएं हमें यह सोचने पर मजबूर करती हैं कि हम जो बाजार से खरीदकर खा रहे हैं, वह कितना सुरक्षित है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि खुले में रखे गए खाद्य पदार्थों या बिना ब्रांड की पैकेटबंद चीजों में मक्खी, मच्छर, कॉकरोच और छिपकली जैसे जहरीले जीव आसानी से पनप सकते हैं। छिपकली के शरीर में खतरनाक विषैले तत्व होते हैं, जो यदि खाने में मिल जाएं तो इंसान की जान भी जा सकती है। इसलिए जरूरी है कि हमेशा प्रतिष्ठित और एफडीए द्वारा प्रमाणित ब्रांड्स की ही चीजें खरीदें और खाने-पीने की हर चीज की अच्छी तरह जांच करने के बाद ही उसका सेवन करें।