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अमेरिका ने कनाडा पर ठोका 50% टैरिफ: टूट गई बड़ी ट्रेड डील, जस्टिन ट्रूडो ने खाई यह कसम

अमेरिका ने कनाडा पर ठोका 50% टैरिफ: टूट गई बड़ी ट्रेड डील, जस्टिन ट्रूडो ने खाई यह कसम

अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और व्यापारिक जगत से इस वक्त की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। अमेरिका और कनाडा के बीच लंबे समय से चली आ रही तनातनी अब एक पूर्ण आर्थिक संघर्ष में बदलती हुई नजर आ रही है। अमेरिकी प्रशासन ने एक कड़ा कदम उठाते हुए कनाडा पर सीधे तौर पर 50 प्रतिशत का भारी-भरकम टैरिफ थोप दिया है। इस अप्रत्याशित फैसले के बाद दोनों देशों के बीच होने वाली एक बेहद महत्वपूर्ण ट्रेड डील आधिकारिक तौर पर रद्द (Cancel) कर दी गई है।

इस व्यापारिक झटके के बाद वैश्विक बाजारों में हलचल तेज हो गई है। अमेरिकी सरकार के इस सख्त रुख ने पड़ोसी देश कनाडा को हिलाकर रख दिया है। वहीं, इस पूरे घटनाक्रम के बाद कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो का कड़ा रुख सामने आया है, जिन्होंने देश के हितों की रक्षा के लिए अब आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।

अचानक क्यों बिगड़े अमेरिका और कनाडा के रिश्ते?

किसी भी दो देशों के बीच ट्रेड वॉर यूं ही अचानक शुरू नहीं होता। इसके पीछे महीनों की कूटनीतिक असफलताएं और घरेलू राजनीतिक दबाव काम करते हैं। अमेरिका और कनाडा के बीच पिछले कुछ हफ्तों से कई व्यापारिक मुद्दों पर सहमति नहीं बन पा रही थी। अमेरिकी नेतृत्व लगातार यह दबाव बना रहा था कि कनाडा अपने व्यापारिक नियमों में बदलाव करे, जो अमेरिकी अर्थव्यवस्था के अनुकूल हों।

हालांकि, कनाडाई पक्ष ने अपनी संप्रभुता और स्थानीय उद्योगों का हवाला देते हुए अमेरिकी शर्तों को मानने से इनकार कर दिया। वार्ताओं के कई दौर फेल होने के बाद, अंततः अमेरिका ने वह कदम उठाया जिसकी आशंका कूटनीतिक गलियारों में जताई जा रही थी—टैरिफ का ब्रह्मास्त्र। अमेरिका द्वारा 50% टैरिफ लगाने का मतलब साफ है कि कनाडाई सामान अब अमेरिकी बाजार में भारी-भरकम टैक्स के दायरे में आएंगे, जिससे वहां के कारोबारियों की कमर टूट सकती है।

जस्टिन ट्रूडो का तीखा पलटवार और बड़ी कसम

अपने देश पर 50 फीसदी टैरिफ और ट्रेड डील रद्द होने की खबर सामने आने के बाद कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो बेहद आक्रामक मुद्रा में नजर आए। उन्होंने आपातकालीन बैठक बुलाई और स्पष्ट शब्दों में कहा कि कनाडा किसी भी दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।

"हम अपने देश के श्रमिकों, किसानों और उद्योगों के हितों के साथ कोई समझौता नहीं करेंगे। अमेरिकी प्रशासन का यह फैसला दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन कनाडा अपनी शर्तों पर जिएगा और हर चुनौती का मुंहतोड़ जवाब देगा।"

सूत्रों के मुताबिक, जस्टिन ट्रूडो ने देशवासियों को संबोधित करते हुए एक कसम खाई है कि कनाडा इस आर्थिक दबाव के आगे घुटने नहीं टेकेगा। सरकार अब वैकल्पिक बाजारों की तलाश कर रही है और अमेरिकी सामानों पर भी जवाबी टैरिफ (Retaliatory Tariffs) लगाने की पूरी तैयारी कर ली है।

आम जनता और ग्लोबल इकॉनमी पर इसका क्या असर होगा?

अमेरिका और कनाडा दुनिया के सबसे बड़े पड़ोसी व्यापारिक साझीदारों में से एक हैं। दोनों देशों के बीच अरबों डॉलर का कारोबार हर साल होता है। ऐसे में जब दोनों देशों के बीच ट्रेड वॉर छिड़ चुका है, तो इसका असर आम जनजीवन और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ना लाजिमी है:

  • महंगाई का बढ़ना: टैरिफ बढ़ने से दोनों देशों में आयातित वस्तुएं महंगी हो जाएंगी, जिससे सीधे तौर पर आम उपभोक्ता की जेब पर असर पड़ेगा।
  • ऑटो और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर पर मार: अमेरिका-कनाडा बॉर्डर के आर-पार ऑटो पार्ट्स और कच्चे माल की आवाजाही रुकने से कई बड़ी कंपनियों को अपने प्लांट बंद करने पड़ सकते हैं।
  • मुद्रा बाजार में उतार-चढ़ाव: इस ट्रेड टेंशन की वजह से कनाडाई डॉलर (CAD) पर भारी दबाव देखने को मिल सकता है।

क्या आगे सुधरेंगे हालात?

फिलहाल दोनों देशों के तेवर देखकर ऐसा नहीं लगता कि निकट भविष्य में कोई नरमी आने वाली है। अमेरिकी राष्ट्रपति का रुख अपनी घरेलू नीतियों को प्राथमिकता देने का रहा है, वहीं जस्टिन ट्रूडो के लिए यह राजनीतिक अस्तित्व की भी लड़ाई बन चुकी है। ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कोई तीसरा देश या अंतरराष्ट्रीय संगठन इस मामले में मध्यस्थता कर पाता है या नहीं।


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काव्या त्रिपाठी

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Senior Editor

काव्या त्रिपाठी बिजनेस और टेक्नोलॉजी की जटिल दुनिया को सरल और स्पष्ट रूप में प्रस्तुत करने के लिए जानी जाती हैं। वे आर्थिक बदलाव, स्टार्टअप इकोसिस्...

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