पंजाब की राजधानी चंडीगढ़ में उस समय राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई, जब एलिमेंट्री टीचर ट्रेनिंग (ETT) पास बेरोजगार और सेवारत शिक्षकों ने अपने परिवारों के साथ सड़कों पर उतरकर बड़ा मोर्चा खोल दिया। अपनी लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे इन शिक्षकों ने पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के सरकारी आवास का घेराव करने की कोशिश की। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस प्रशासन को भारी मशक्कत करनी पड़ी और अंततः प्रदर्शन कर रहे करीब 180 शिक्षकों को हिरासत में ले लिया गया।
सर्द मौसम में गरमाया सियासी पारा, परिवार समेत सड़कों पर उतरे शिक्षक
यह पूरा घटनाक्रम मंगलवार को चंडीगढ़ के पॉश इलाकों में देखने को मिला। ईटीटी टीचर्स यूनियन के बैनर तले राज्यभर से आए शिक्षक अपनी मांगों के समर्थन में एकजुट हुए थे। खास बात यह रही कि इस विरोध प्रदर्शन में केवल शिक्षक ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के छोटे बच्चे और महिलाएं भी शामिल थीं। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे पिछले लंबे समय से सरकार के नुमाइंदों से गुहार लगा रहे हैं, लेकिन उनकी सुध लेने वाला कोई नहीं है।
वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के आवास की ओर बढ़ते प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने पहले से ही बैरिकेडिंग कर रखी थी। जब शिक्षकों ने इन बैरिकेड्स को पार करने का प्रयास किया, तो पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी झड़प भी देखने को मिली। सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए पुलिस ने तुरंत एक्शन लिया और यूनियन के प्रमुख सदस्यों समेत लगभग 180 लोगों को हिरासत में लेकर नजदीकी पुलिस स्टेशन ले गई।
आखिर क्या हैं ETT शिक्षकों की मुख्य मांगें?
पंजाब में ईटीटी शिक्षकों का यह गुस्सा अचानक नहीं फूटा है। शिक्षकों और बेरोजगार युवाओं का आरोप है कि सरकार ने चुनाव से पहले शिक्षा व्यवस्था को दुरुस्त करने और रोजगार देने के जो बड़े-बड़े वादे किए थे, वे जमीन पर उतरते नहीं दिख रहे हैं। यूनियन की प्रमुख मांगों में निम्नलिखित बिंदु शामिल हैं:
- पक्के रोजगार की गारंटी: राज्य के स्कूलों में खाली पड़े ईटीटी शिक्षकों के पदों पर तुरंत और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया पूरी की जाए।
- वेतन विसंगतियां दूर करना: सेवारत शिक्षकों की वेतन संबंधी समस्याओं का समाधान किया जाए और सेवा शर्तों को बेहतर बनाया जाए।
- कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना: लंबे समय से अनुबंध (कॉट्रैक्ट) या आउटसोर्सिंग पर काम कर रहे शिक्षकों को नियमित किया जाए।
- नीतिगत बदलाव: शिक्षा विभाग में भर्ती नियमों को सरल बनाया जाए ताकि अधिक से अधिक योग्य युवाओं को लाभ मिल सके।
प्रशासन और सरकार का रुख
घटना के बाद मौके पर भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि वीवीआईपी क्षेत्र में इस तरह का उग्र प्रदर्शन और घेराव कानून व्यवस्था के खिलाफ है। बिना अनुमति के नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, हिरासत में लिए गए शिक्षकों के तेवर अभी भी सख्त बने हुए हैं और उनका कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस सरकारी मुहर नहीं लगती, उनका संघर्ष यूं ही जारी रहेगा।
राजनीतिक गलियारों में भी इस घटना को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। विपक्षी दलों ने सरकार पर निशाना साधना शुरू कर दिया है और आरोप लगाया है कि लोकतांत्रिक देश में अपनी बात रखने के लिए शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे शिक्षकों और उनके परिवारों के साथ इस तरह का सुलूक बेहद निंदनीय है।
