अमेरिका जाने का सपना देख रहे लोगों के लिए एक बेहद अहम और चौंकाने वाली अंतरराष्ट्रीय खबर सामने आई है। संयुक्त राज्य अमेरिका के विदेश विभाग (US Department of State) ने एक सख्त वीज़ा बॉन्ड प्रोग्राम की शुरुआत की है, जिसके तहत दुनिया भर के 50 देशों के नागरिकों को अब टूरिस्ट और बिजनेस वीज़ा (B1/B2 Visa) हासिल करने के लिए भारी-भरकम वित्तीय गारंटी देनी होगी। यह गारंटी 10,000 डॉलर से लेकर 20,000 डॉलर यानी करीब लाखों रुपये तक हो सकती है। हालांकि, इस बीच भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है, जिससे करोड़ों भारतीयों ने राहत की सांस ली है।
क्या है अमेरिका का नया वीज़ा बॉन्ड प्रोग्राम?
अमेरिकी विदेश विभाग द्वारा लागू किए गए इस नए नियम के अनुसार, वीज़ा बॉन्ड प्रोग्राम के तहत आने वाले 50 देशों के नागरिकों को वीज़ा जारी होने से पहले वित्तीय गारंटी के रूप में नकद या बॉन्ड जमा करना होगा। आव्रजन और राष्ट्रीयता अधिनियम (INA) की धारा 221(g)(3) के तहत इस कार्यक्रम को स्थापित किया गया है। इसके जरिए अमेरिकी कांसुलर ऑफिसर (Consular Officer) के पास यह अधिकार होगा कि वह वीज़ा जारी करने से पहले आवेदक से वीज़ा बॉन्ड जमा करने की मांग कर सकता है।
यह नियम मुख्य रूप से उन देशों पर शिकंजा कसने के लिए लाया गया है जिनके नागरिक अमेरिका पहुंचने के बाद तय समय सीमा से ज्यादा समय तक वहां रुक जाते हैं (Visa Overstay)। होमलैंड सिक्योरिटी डिपार्टमेंट (Department of Homeland Security) की एंट्री-एग्जिट ओवरstay रिपोर्ट के आधार पर इन 50 देशों की सूची तैयार की गई है।
कितना चुकाना होगा बॉन्ड और कैसे होगी राशि तय?
विदेश विभाग के फाइनल रूल के मुताबिक, जिन देशों के नाम इस लिस्ट में शामिल हैं, उनके बी1/बी2 वीज़ा के योग्य नागरिकों को तीन अलग-अलग स्लैब में बॉन्ड राशि चुकानी होगी:
- 10,000 डॉलर
- 15,000 डॉलर
- 20,000 डॉलर
सटीक राशि का निर्धारण वीज़ा इंटरव्यू के दौरान ही आवेदक के मामले की समीक्षा के बाद किया जाएगा। बॉन्ड की यह प्रक्रिया पूरी करने के लिए आवेदकों को डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी (DHS) का फॉर्म I-352 भी जमा करना होगा। इसके अलावा, योग्य नागरिक अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के आधिकारिक ऑनलाइन पेमेंट प्लेटफॉर्म 'Pay.gov' के माध्यम से ही इस निर्धारित राशि का भुगतान कर सकेंगे।
भारत के लिए क्या है स्थिति? (बड़ी राहत)
भारतीय यात्रियों और पर्यटकों के लिए इस नई नीति में एक बहुत बड़ी राहत छिपी हुई है। अमेरिकी प्रशासन द्वारा जारी की गई इस 50 देशों की सूची में भारत का नाम शामिल नहीं है। यानी भारतीय पासपोर्ट धारकों को इस वीज़ा-बॉन्ड की बाध्यता से पूरी तरह मुक्त रखा गया है। भारत के अलावा इस सूची में कौन-कौन से देश हैं, इस पर नजर डालें तो इसमें दक्षिण एशिया के कई पड़ोसी देश भी शामिल हैं।
अमेरिकी विदेश विभाग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, नेपाल और बांग्लादेश के नागरिकों को इस वीज़ा बॉन्ड के नियमों का सामना पहले से ही करना पड़ रहा है, जबकि भूटान को भी इस फेहरिस्त में शामिल कर लिया गया है। भारत के बाहर रहने वाले और इन 50 देशों की नागरिकता रखने वाले लोगों को अब अमेरिका की यात्रा करने से पहले इन कठोर वित्तीय शर्तों से गुजरना होगा।
सावधानी और धोखाधड़ी से बचने की सलाह
अमेरिकी प्रशासन ने दुनिया भर के वीज़ा आवेदकों के लिए एक चेतावनी भी जारी की है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि आवेदक किसी भी ऐसे वीज़ा बॉन्ड को जमा न करें जो कांसुलर ऑफिसर द्वारा दिए गए निर्देशों में सूचीबद्ध आधिकारिक वेबसाइट के अलावा किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर हो। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यदि कोई व्यक्ति आधिकारिक प्रणाली के बाहर किसी अन्य माध्यम से पैसे का भुगतान करता है, तो उसके लिए अमेरिकी सरकार किसी भी प्रकार से जिम्मेदार नहीं होगी।
क्यों उठाया गया यह कदम?
अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकारों का मानना है कि अमेरिका में लगातार बढ़ रहे अवैध प्रवास और वीज़ा की अवधि समाप्त होने के बाद भी देश न छोड़ने वाले विदेशी नागरिकों की संख्या को नियंत्रित करने के लिए यह कड़ा कदम उठाया गया है। आव्रजन नीतियों को और अधिक कड़ा बनाने के अमेरिकी एजेंडे के तहत यह नीति लागू की गई है। हालांकि, भारत जैसे रणनीतिक और मजबूत साझेदार देशों को इस नियम के दायरे से बाहर रखना यह दर्शाता है कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय संबंध इस मामले में सकारात्मक भूमिका निभा रहे हैं।
यदि आप या आपका कोई जानने वाला अमेरिका की यात्रा की योजना बना रहा है, तो वीज़ा नियमों में हुए इस बड़े बदलाव को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है। भारतीय नागरिकों को फिलहाल इस वित्तीय गारंटी से छूट मिली हुई है, लेकिन अन्य देशों के नागरिकों के लिए अमेरिका की यात्रा अब और अधिक महंगी और कठिन हो गई है।