झारखंड की राजधानी रांची की सड़कों पर एक बड़ा और गंभीर संकट चुपचाप पैर पसार रहा है। शहर की धड़कन कही जाने वाली व्यस्त सड़कों पर रोजाना करीब 4000 मालवाहक वाहन सरपट दौड़ते हैं, जिनमें से एक बड़ा हिस्सा क्षमता से अधिक वजन लादकर चलता है। इन ओवरलोड वाहनों पर लगाम लगाने के लिए कागजों पर सख्त नियम और भारी-भरकम जुर्माने का प्रावधान है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट है। निगरानी तंत्र की सुस्ती और लचर व्यवस्था के कारण राजधानी की सड़कों पर रोजाना नियमों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, जिससे आम नागरिकों की जान पर हर वक्त खतरा मंडराता रहता है।
हाल ही में सामने आए आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं कि प्रशासनिक अमला ओवरलोडिंग के खिलाफ कितना गंभीर है। स्थिति यह है कि शहर की सड़कों पर हर दिन गुजरने वाले हजारों मालवाहकों के मुकाबले महीने में महज तीन से चार बार ही विशेष जांच अभियान चलाए जाते हैं। ऐसे में यह सवाल लाजिमी है कि आखिर इतने बड़े बेड़े में से चुनिंदा वाहनों की खानापूर्ति वाली जांच से इस समस्या पर कैसे काबू पाया जा सकता है? नियमित चेकिंग के अभाव में चालकों और वाहन मालिकों के मन से कानून का डर लगभग खत्म हो चुका है।
सड़क सुरक्षा के साथ बुनियादी ढांचे के लिए भी बड़ा खतरा
क्षमता से अधिक माल ढोने वाले ये भारी वाहन केवल सड़क हादसों को ही न्योता नहीं दे रहे हैं, बल्कि शहर के सार्वजनिक बुनियादी ढांचे यानी सड़कों और पुल-पुलिया की उम्र भी तेजी से घटा रहे हैं। जब कोई वाहन अपनी निर्धारित क्षमता से कई गुना अधिक वजन लेकर गुजरता है, तो डामर और कंक्रीट से बनी सड़कें उस अतिरिक्त दबाव को सहन नहीं कर पाती हैं। नतीजतन, कुछ ही महीनों में नई सड़कें भी गड्ढों में तब्दील हो जाती हैं और बड़े-बड़े पुलों की संरचना कमजोर पड़ने लगती है।
इसके अलावा, अनियंत्रित वजन के कारण भारी ट्रकों और ट्रेलरों का ब्रेकिंग सिस्टम और संतुलन अक्सर बिगड़ जाता है। ढलान वाले रास्तों या तीखे मोड़ों पर इन वाहनों का नियंत्रण खोना आम बात हो गई है, जिससे आए दिन भीषण दुर्घटनाएं होती हैं। कई परिवारों ने इन लापरवाहियों की वजह से अपने अपनों को खोया है, फिर भी जिम्मेदार महकमे की नींद पूरी तरह से नहीं खुली है।
नौ महीने में 82 लाख का जुर्माना, फिर भी क्यों नहीं सुधर रहे हालात?
भले ही नियमित जांच का दायरा सीमित हो, लेकिन जब भी परिवहन विभाग या ट्रैफिक पुलिस ने शिकंजा कसा है, बड़े पैमाने पर जुर्माना वसूला गया है। आंकड़ों पर गौर करें तो जनवरी से सितंबर 2026 तक के महज नौ महीनों के भीतर ही ओवरलोडिंग के मामलों में लगभग 82 लाख रुपये का भारी-भरकम जुर्माना वसूला जा चुका है।
नियमों के मुताबिक, ओवरलोडिंग पकड़े जाने पर सीधे तौर पर 20 हजार रुपये का जुर्माना और इसके अलावा निर्धारित क्षमता से ऊपर प्रति टन भार के हिसाब से दो हजार रुपये अतिरिक्त पेनल्टी का प्रावधान है। कानून स्पष्ट कहता है कि जब तक वाहन से अतिरिक्त भार को हटाया नहीं जाता, तब तक उसे आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर इन नियमों का कड़ाई से पालन न होना प्रशासनिक इच्छाशक्ति पर सवालिया निशान लगाता है।
प्रवेश मार्गों पर चेकिंग की कमी और फर्जी कांटा पर्चियों का खेल
रांची की सीमा पर स्थित प्रवेश मार्गों पर यदि मुस्तैदी से चेकिंग प्वाइंट बना दिए जाएं, तो शहर के भीतर आने से पहले ही ओवरलोड वाहनों को रोका जा सकता है। लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि प्रवेश द्वारों पर नियमित और प्रभावी मॉनिटरिंग नहीं होने के कारण ये वाहन आसानी से शहर के मुख्य इलाकों तक पहुंच जाते हैं।
इस पूरे खेल में 'कांटा पर्ची' (वजन की रसीद) का फर्जीवाड़ा भी एक बड़ा कारण है। कई बार वाहन चालकों के पास ऐसी पर्चियां मिलती हैं जिनमें लोड किए गए वास्तविक माल का वजन बहुत कम दिखाया जाता है, जबकि ट्रक पर क्षमता से कहीं ज्यादा सामान लदा होता है। कुछ मामलों में माल लोड करने वाली कंपनियां खुद इस तरह की गड़बड़ियों में संलिप्त पाई जाती हैं। ऐसे में केवल कागजी दस्तावेजों और पर्चियों पर आंख मूंदकर भरोसा करने के बजाय भौतिक रूप से वजन की सटीक जांच करना बेहद आवश्यक हो गया है।
अधिकारियों का पक्ष और समाधान की दिशा
इस पूरे मामले पर जब जिला परिवहन पदाधिकारी अखिलेश कुमार से बात की गई, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि अवैध ओवरलोडिंग पर विभाग की नजर लगातार बनी रहती है। जहां भी चेकिंग के दौरान वाहन ओवरलोड पाए जाते हैं, वहां नियमानुसार जुर्माना वसूलने के साथ कानूनी कार्रवाई भी की जाती है। हालांकि, जानकारों का मानना है कि केवल इक्का-दुक्का कार्रवाई से काम नहीं चलेगा।
सुधार के लिए क्या कदम उठाने की है जरूरत?
- एंट्री प्वॉइंट्स पर ऑटोमैटिक वे-ब्रिज: शहर में प्रवेश करने वाले सभी मुख्य मार्गों पर आधुनिक वजन कांटे (Weighbridges) लगाए जाने चाहिए।
- नियमित पेट्रोलिंग: महीने में तीन-चार बार विशेष अभियान चलाने के बजाय हर दिन औचक निरीक्षण की व्यवस्था हो।
- कंपनियों पर शिकंजा: कम वजन की फर्जी पर्ची जारी करने वाली लोडर्स कंपनियों और गोदाम संचालकों के खिलाफ भी आपराधिक मुकदमे दर्ज किए जाएं।
- जीरो टॉलरेंस नीति: अतिरिक्त माल को मौके पर ही उतरवाने के बाद ही वाहन को आगे जाने की अनुमति दी जाए।
रांची की सड़कों को दुर्घटना मुक्त बनाने और शहर के विकास कार्यों को सुरक्षित रखने के लिए यह जरूरी है कि प्रशासन कागजी दावों से बाहर निकलकर धरातल पर ठोस और निरंतर कार्रवाई करे। जनता की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता आने वाले समय में एक बड़ी त्रासदी का कारण बन सकता है, जिसे रोकने की जिम्मेदारी पूरी तरह से संबंधित विभागों के कंधों पर है।