Breaking
► असिन और राहुल शर्मा की 7 साल की बेटी अरिन 12 भाषाएं बोलती हैं ► अलीगढ़ में 19 लाख के नशीले कैप्सूल के साथ तस्कर गिरफ्तार ► बिग बॉस 20: रोहित शेट्टी के वीकेंड का वार के बाद मचा बवाल, लव गिल के समर्थन में उतरे फैंस ► आगरा में यमुना पर बनेंगे पांच पांटून पुल, दीपावली तक मिलेगी आवागम में राहत ► त्योहारों से पहले FDA का कड़ा रुख: छत्रपति संभाजीनगर में 20.72 लाख का खाद्य स्टॉक जब्त ► राजिम के लोमश ऋषि आश्रम का इतिहास, जहां इंद्र को मिला था ज्ञान ► संभाजीनगर के VIP रोड पर मनपा की कार्रवाई का असर, खुद हटने लगे अतिक्रमण ► बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग्स लिमिटेड की अनूठी पहल: अयोध्या में श्रीरामलला के दर्शन करेंगे रामगढ़ के वृद्धाश्रम के बुजुर्ग ► अहान पांडे और शर्वरी की फिल्म 'बेपरवाह' का ऐलान, इस दिन होगी रिलीज ► फरीदाबाद में ग्रैप-1 के नियमों की अनदेखी, 25 निर्माण साइटों को थमाए गए नोटिस ► असिन और राहुल शर्मा की 7 साल की बेटी अरिन 12 भाषाएं बोलती हैं ► अलीगढ़ में 19 लाख के नशीले कैप्सूल के साथ तस्कर गिरफ्तार ► बिग बॉस 20: रोहित शेट्टी के वीकेंड का वार के बाद मचा बवाल, लव गिल के समर्थन में उतरे फैंस ► आगरा में यमुना पर बनेंगे पांच पांटून पुल, दीपावली तक मिलेगी आवागम में राहत ► त्योहारों से पहले FDA का कड़ा रुख: छत्रपति संभाजीनगर में 20.72 लाख का खाद्य स्टॉक जब्त ► राजिम के लोमश ऋषि आश्रम का इतिहास, जहां इंद्र को मिला था ज्ञान ► संभाजीनगर के VIP रोड पर मनपा की कार्रवाई का असर, खुद हटने लगे अतिक्रमण ► बिहार फाउंड्री एंड कास्टिंग्स लिमिटेड की अनूठी पहल: अयोध्या में श्रीरामलला के दर्शन करेंगे रामगढ़ के वृद्धाश्रम के बुजुर्ग ► अहान पांडे और शर्वरी की फिल्म 'बेपरवाह' का ऐलान, इस दिन होगी रिलीज ► फरीदाबाद में ग्रैप-1 के नियमों की अनदेखी, 25 निर्माण साइटों को थमाए गए नोटिस

गोरखपुर की ऐतिहासिक आमी नदी प्रदूषण से जूझ रही, कभी आचमन योग्य पानी आज गटर जैसा बदहाल

गोरखपुर की ऐतिहासिक आमी नदी प्रदूषण से जूझ रही, कभी आचमन योग्य पानी आज गटर जैसा बदहाल

गोरखपुर की ऐतिहासिक आमी नदी गंभीर प्रदूषण संकट से जूझ रही है। कभी दक्षिणांचल की जीवनरेखा और आचमन के योग्य मानी जाने वाली इस नदी का पानी आज गंदे नाले में तब्दील हो चुका है, जिसके किनारे खड़े होना भी मुश्किल है।

गोरखपुर के दक्षिणांचल से गुजरने वाली आमी नदी अपनी बदहाली के दौर से गुजर रही है। एक समय था जब इस नदी का पानी स्थानीय लोगों के स्नान, ध्यान, पीने और भोजन बनाने तक के रोजमर्रा के कार्यों में इस्तेमाल होता था। लेकिन समय के साथ प्रशासनिक लापरवाही और औद्योगिक विकास की अनदेखी के चलते इस प्राकृतिक जलस्रोत का स्वरूप पूरी तरह बिगड़ गया है। नदी को बचाने के लिए बीते वर्षों में कई बार आवाजें उठीं और स्थानीय स्तर पर आंदोलन भी हुए, परंतु धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।

कटका गांव के बुजुर्ग की जुबानी नदी का बदलता स्वरूप

नदी की वास्तविक स्थिति को इसके तट पर बसे गांवों के अनुभव से बेहतर नहीं समझा जा सकता। कटका गांव के 75 वर्षीय निवासी रामप्रवेश के जीवनकाल ने आमी नदी के इस भयंकर बदलाव को बहुत करीब से देखा है। उनके अनुसार, जिस पानी को ग्रामीण कभी अपनी बुनियादी जरूरतों के लिए इस्तेमाल करते थे, आज उसी नदी से उठने वाली सड़ांध और दुर्गंध आसपास के कई गांवों के लोगों का जीना मुहाल कर रही है। रामप्रवेश की यह स्मृतियां केवल एक व्यक्ति का निजी अनुभव नहीं, बल्कि उस पर्यावरणीय पतन का प्रमाण हैं जिसे प्रशासनिक उदासीनता ने जन्म दिया है।

गीडा की फैक्ट्रियों और CETP की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल

आमी नदी की इस दुर्दशा के पीछे गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) क्षेत्र की फैक्ट्रियों से निकलने वाले अपशिष्ट की बड़ी भूमिका मानी जाती है। औद्योगिक विकास किसी भी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए आवश्यक है, लेकिन इसकी कीमत पर्यावरण और जल स्रोतों के विनाश के रूप में नहीं चुकाई जा सकती है। यह सवाल लंबे समय से बना हुआ है कि औद्योगिक इकाइयों का दूषित पानी बिना समुचित शोधन के सीधे नदी में कैसे मिल रहा है।

फैक्ट्रियों के कचरे को ट्रीट करने के लिए स्थापित कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP) की कार्यप्रणाली और क्षमता पर भी लगातार सवाल उठ रहे हैं। केवल प्लांट के कागजी संचालन से नदी को स्वच्छ नहीं किया जा सकता, बल्कि इसके लिए यह अनिवार्य है कि शोधन संयंत्र पूरी क्षमता से काम करे और उससे निकलने वाला पानी तय पर्यावरणीय मानकों पर खरा उतरे। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और गीडा प्रशासन को इस संबंध में अपनी नियमित निरीक्षण रिपोर्ट और पानी की गुणवत्ता की अद्यतन स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए।

आंदोलनों के बाद भी क्यों कायम है संकट?

आमी नदी को प्रदूषण मुक्त कराने के लिए समय-समय पर क्षेत्रीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों द्वारा आंदोलन किए गए हैं, लेकिन ठोस प्रशासनिक इच्छाशक्ति के अभाव में हर बार आश्वासन ही हाथ लगे हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के स्तर पर भी नदी संरक्षण से जुड़े मामलों और दिशा-निर्देशों पर सुनवाई होती रही है, बावजूद इसके जमीनी स्तर पर सुधार दिखाई नहीं देता। यदि प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर समय रहते प्रभावी नियंत्रण स्थापित नहीं किया गया, तो जलीय जीव और संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र पूरी तरह नष्ट हो जाएगा। अब आवश्यकता यह है कि कागजी योजनाओं और घोषणाओं से आगे बढ़कर आमी नदी के पानी की गुणवत्ता में वास्तविक सुधार सुनिश्चित किया जाए।

About the Author

नसीम अहमद

नसीम अहमद

Writer

नसीम अहमद जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं। उन...

Read More

ज़रूर पढ़ें (You May Also Like)

अगली खबर पढ़ें:

आगे पढ़ें →