प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की जांच में खुली पोल, खुले में रखी निर्माण सामग्री और पानी के छिड़काव के नहीं मिले कोई पुख्ता इंतजाम
राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में बढ़ते प्रदूषण के मद्देनजर लागू किए गए ग्रेप-1 (GRAP-1) के नियमों की फरीदाबाद में गंभीर रूप से अनदेखी की जा रही है। शहर में नगर निगम और विभिन्न निर्माण एजेंसियों की लापरवाही के चलते निर्माणाधीन साइटों पर धूल नियंत्रण के इंतजाम नाकाफी पाए गए हैं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पिछले तीन दिनों के भीतर 50 से अधिक निर्माण स्थलों का औचक निरीक्षण किया, जिसमें भारी अनियमितताएं मिलने पर 25 साइटों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की औचक कार्रवाई
दशहरे के बाद से क्षेत्र में वायु प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है, जिसे नियंत्रित करने के लिए ग्रेप-1 के प्रतिबंध फौरन लागू कर दिए गए थे। इसके तहत सभी निर्माण कार्यों वाली जगहों पर उड़ती धूल को रोकने के लिए कड़े उपाय करना अनिवार्य किया गया है। हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने इस संबंध में नगर निगम को औपचारिक पत्र भेजकर सतर्क भी किया था। बोर्ड के निर्देशों के बावजूद मैदानी स्तर पर नियमों का पालन नहीं हो रहा है।
बल्लभगढ़ के क्षेत्रीय अधिकारी हरीश कुमार ने इस संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि बोर्ड की विशेष टीमों द्वारा पिछले तीन दिनों में 50 से अधिक निर्माण साइटों का सघन दौरा किया गया। इस दौरान अधिकांश जगहों पर निर्माण सामग्री को खुले में बिना किसी आवरण या तिरपाल के रखा गया था। इसके अलावा साइटों पर धूल को बैठने के लिए पानी के छिड़काव के भी कोई प्रबंध नहीं मिले। नियमों की इस अनदेखी पर सख्त रुख अपनाते हुए कुल 25 निर्माणाधीन साइटों को नोटिस थमाए गए हैं।
सोमवार को पीएम 10 का स्तर पहुंचा 117
बढ़ते प्रदूषण का असर अब शहर की हवा की गुणवत्ता पर भी साफ दिखने लगा है। सोमवार को फरीदाबाद शहर में पीएम 10 (PM 10) का स्तर 117 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया, जो हवा की खराब स्थिति को दर्शाता है। हालांकि, नगर निगम प्रशासन की ओर से वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए चार एंटी-स्मॉग गन के जरिए शहर के प्रमुख मार्गों पर पानी का छिड़काव शुरू कर दिया गया है, लेकिन निर्माण स्थलों पर बरती जा रही लापरवाही इस प्रयास पर पानी फेरती नजर आ रही है।
कूड़ा जलाने पर एक महीने में एक भी चालान नहीं
प्रदूषण को बढ़ावा देने वाला एक अन्य बड़ा कारण शहर में खुले में कूड़ा जलाना है। पिछले एक महीने के दौरान शहर के विभिन्न हिस्सों से सड़क किनारे कचरे के ढेरों में आग लगने की कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं। कचरे का वैज्ञानिक निस्तारण करने के बजाय उसमें आग लगाए जाने से शहर की आबोहवा लगातार जहरीली हो रही है, जिससे सांस लेने में दिक्कत और आंखों में जलन जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।
हद तो तब है कि इस गंभीर लापरवाही के बावजूद नगर निगम की ओर से पिछले एक महीने में कूड़े में आग लगाने वालों के खिलाफ एक भी चालान नहीं काटा गया है। इस संबंध में जब निगम अधिकारियों से बात की गई तो उनका तर्क था कि त्योहारी सीजन से पहले सड़कों के किनारे पड़े कचरे को पूरी तरह साफ करने के लिए सभी कर्मचारियों को कूड़ा उठान के काम में लगाया गया है। त्योहारी सीजन के समापन के बाद नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ चालान काटने की प्रक्रिया जोर-शोर से शुरू की जाएगी।