वाराणसी की पावन धरा पर एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक समागम का गवाह बनने का अवसर तब मिला, जब गुजरात के वडनगर से शुरू हुई 'सेवा यात्रा' अपनी अंतिम मंजिल यानी बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी तक जा पहुंची। इस भव्य समापन समारोह में उत्तर प्रदेश की बदलती तस्वीर और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन के 25 गौरवशाली वर्षों की गूंज साफ सुनाई दी। मंच पर जब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बोलना शुरू किया, तो श्रोताओं की निगाहें पूरी तरह से उनकी तरफ खिंच गईं। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में पिछले एक दशक में राज्य के भीतर आए अभूतपूर्व बदलावों का जिक्र करते हुए पुरानी और डरावनी व्यवस्थाओं की याद दिलाई, और साथ ही यह भी बताया कि कैसे आज का नया उत्तर प्रदेश विकास की नई इबारत लिख रहा है।
अराजकता के साये से बाहर निकला उत्तर प्रदेश: मुख्यमंत्री योगी
दशकों पहले उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था की स्थिति कैसी थी, यह किसी से छिपी नहीं है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अतीत के उन काले पन्नों को पलटते हुए बिना लाग-लपेट के कहा कि एक समय ऐसा था जब यूपी में अराजकता का तांडव आम बात हो गई थी। सूर्यास्त के बाद महिलाओं और बेटियों का घर से बाहर निकलना सुरक्षित नहीं माना जाता था, और व्यापारी हमेशा खौफ के साए में जीने को मजबूर थे।
मुख्यमंत्री ने कड़े शब्दों में याद दिलाया कि दस साल पहले स्थिति यह थी कि माफिया जहां अपनी उंगली रख देता था, वह जमीन उसकी हो जाती थी। राजनीतिक संरक्षण पाने वाले अपराधी कानून को अपने हाथ में रखते थे और त्योहारों से ठीक पहले उपद्रव या दंगे भड़काना एक सोची-समझी साजिश बन चुका था। लेकिन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत मार्गदर्शन और डबल इंजन सरकार की सख्त इच्छाशक्ति ने इन तमाम ताकतों को नेस्तनाबूद कर दिया। आज परिणाम सबके सामने है—माफिया या तो कानून के शिकंजे में हैं या फिर पूरी तरह मिट्टी में मिल चुके हैं।
वडनगर से काशी तक का सफर: ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की जीवंत मिसाल
यह यात्रा केवल साधारण बाइकर्स का सफर नहीं था, बल्कि यह सांस्कृतिक एकता और सौहार्द का एक अनूठा संगम था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जन्मभूमि वडनगर से शुरू होकर उनकी कर्मभूमि वाराणसी तक पहुंचने वाली इस बाइक सेवा यात्रा ने देश के अलग-अलग राज्यों से गुजरते हुए ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की भावना को और अधिक प्रगाढ़ किया है।
इस यात्रा के दौरान बाइकर्स ने देश के दस अलग-अलग राज्यों की सीमाओं को पार किया। मौसम की हर चुनौती—चाहे वह चिलचिलाती धूप हो या मूसलाधार बारिश—का डटकर मुकाबला करते हुए ये युवा काशी पहुंचे। इस दौरान एक बेहद खास और सांस्कृतिक परंपरा भी देखने को मिली। बाइकर्स अपने साथ गुजरात की नदियों का पवित्र जल लेकर आए थे, जिसे भगवान विश्वनाथ को समर्पित किया गया, जबकि वापसी में काशी विश्वनाथ धाम से मां गंगा का जल लेकर हाटकेश्वर महादेव के लिए प्रस्थान किया गया। यह आध्यात्मिक और सांस्कृतिक सेतु दोनों राज्यों के रिश्तों को और अधिक मजबूत कर रहा है.
2001 का गुजरात भूकंप और एक करिश्माई नेतृत्व का उदय
समारोह के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उस ऐतिहासिक दिन को भी याद किया जब देश की राजनीति और शासन प्रणाली में एक करिश्माई नेतृत्व का पदार्पण हुआ था। ठीक 25 साल पहले, यानी 7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी ने गुजरात की कमान संभाली थी। उस वक्त पूरा गुजरात एक भीषण प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा था। भुज में आए विनाशकारी भूकंप ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था और हर कोई गुजरात के भविष्य को लेकर चिंतित था।
मुख्यमंत्री योगी ने अपने संस्मरण साझा करते हुए बताया कि उस दौर में उन्होंने खुद गुजरात जाकर देखा था कि कैसे महीनों तक वहां भूकंप के झटके महसूस किए जा रहे थे। ऐसी विकट परिस्थितियों में भी नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी और अडिग नेतृत्व ने हार नहीं मानी। उन्होंने तबाही के मलबे से गुजरात को केवल बाहर ही नहीं निकाला, बल्कि उसे देश के सबसे विकसित 'मॉडल स्टेट' के रूप में स्थापित कर दिखाया।
प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष: राष्ट्रसेवा को समर्पित स्वर्णिम काल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन और शासन के सफलतम 25 वर्ष पूरे होने पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश की सवा करोड़ जनता की ओर से उन्हें हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि आज पूरा देश पीएम मोदी के इस 25 साल के अहर्निश (रात-दिन) और निष्कलंक कार्यकाल को एक उत्सव की तरह मना रहा है।
मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि एक आम स्वयंसेवक से लेकर देश के सर्वोच्च पद तक की यह यात्रा इस बात का प्रमाण है कि यदि राष्ट्रसेवा का संकल्प पक्का हो, तो हर असंभव लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि पीएम मोदी के ‘विकसित भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को साकार करने की जिम्मेदारी केवल केंद्र सरकार की नहीं है, बल्कि देश के हर एक गांव, कस्बे और जनपद को इसमें अपनी सक्रिय भागीदारी निभानी होगी।
समारोह में दिग्गजों की रही मौजूदगी
वडनगर से काशी तक की इस ऐतिहासिक बाइक सेवा यात्रा के समापन समारोह में देश और प्रदेश के कई दिग्गज नेता मौजूद रहे। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता या गरिमामयी उपस्थिति में असम के मुख्यमंत्री हिमंत विस्वा सरमा, वडोदरा के सांसद और भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के राष्ट्रीय अध्यक्ष हेमांग जोशी, केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री व भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी, उत्तर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक ने शिरकत की।
इसके अलावा उत्तर प्रदेश सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री जैसे अनिल राजभर, रविंद्र जायसवाल, दयाशंकर मिश्र ‘दयालु’, हंसराज विश्वकर्मा के साथ स्थानीय विधायक और जनप्रतिनिधि भी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। इस दौरान सभी ने युवाओं की ऊर्जा की सराहना की और विश्वास जताया कि आने वाले 2047 तक भारत को एक विकसित राष्ट्र बनाने के लक्ष्य में युवा पीढ़ी सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरेगी।
विरासत और विकास का अनूठा संगम
अपने संबोधन के अंत में सीएम योगी ने कहा कि आज का उत्तर प्रदेश केवल अपराध मुक्त ही नहीं हुआ, बल्कि अपनी खोई हुई सांस्कृतिक विरासत को भी वापस पा चुका है। उन्होंने कहा कि आज अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण, काशी विश्वनाथ धाम का दिव्य स्वरूप, मां विंध्यवासिनी कॉरिडोर का निर्माण और प्रयागराज का भव्य कुंभ इस बात की गवाही दे रहे हैं कि डबल इंजन सरकार सनातन संस्कृति और आधुनिक विकास दोनों को साथ लेकर चल रही है। आज यूपी की पहचान दंगों और अराजकता से नहीं, बल्कि उत्सवों, आस्था और विकास की तेज रफ्तार से होती है।