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डिजिटल जालसाजी से निपटने का नया पाठ, ठाणे में छात्रों को मिले साइबर सुरक्षा के गुर

डिजिटल जालसाजी से निपटने का नया पाठ, ठाणे में छात्रों को मिले साइबर सुरक्षा के गुर

आज के दौर में जब हर काम एक क्लिक पर मुमकिन हो चुका है, तब जेब काटने के तरीके भी पूरी तरह बदल चुके हैं। जेबकतारे अब सड़कों पर नहीं, बल्कि डिजिटल दुनिया की स्क्रीन के पीछे बैठकर घात लगाए बैठे रहते हैं। इस बढ़ते डिजिटल खतरे से नई पीढ़ी को बचाने के लिए महाराष्ट्र प्रशासन ने एक बेहद अहम और सराहनीय कदम उठाया है। ठाणे जिले के उल्हासनगर म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (UMC) ने युवाओं और छात्रों को साइबर ठगों के जाल से सुरक्षित रखने के लिए एक विशेष जागरूकता अभियान की शुरुआत की है।

सेवा संकल्प अभियान: डिजिटल सुरक्षा का एक नया कवच

महाराष्ट्र सरकार के महत्वाकांक्षी 'सेवा संकल्प अभियान' के तहत उल्हासनगर मनपा के सूचना प्रौद्योगिकी (IT) विभाग ने हाल ही में एक व्यापक साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण सत्र का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आज की युवा पीढ़ी को इंटरनेट की दुनिया में सुरक्षित रखना और उन्हें उन तमाम बारीक खतरों से आगाह करना था, जिनका सामना वे रोजाना सोशल मीडिया या ऑनलाइन गेमिंग के दौरान करते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि आज के छात्र और युवा डिजिटल सेवाओं का सबसे ज्यादा इस्तेमाल करते हैं, इसलिए वे सबसे पहले साइबर अपराधियों के निशाने पर आते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए इस ट्रेनिंग प्रोग्राम की रूपरेखा तैयार की गई थी, ताकि कम उम्र से ही बच्चों में डिजिटल हाइजीन और सतर्कता की आदत डाली जा सके।

दिग्गज अधिकारियों के मार्गदर्शन में हुई पहल

इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम की सफलता के पीछे प्रशासनिक इच्छाशक्ति साफ नजर आती है। यह ट्रेनिंग सत्र उल्हासनगर मनपा आयुक्त मनीषा अव्हाले, अतिरिक्त कमिश्नर डॉ. धीरज चव्हाण और डिप्टी कमिश्नर डॉ. दीपाली चौगले के कुशल मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। प्रशासन के इन शीर्ष अधिकारियों ने व्यक्तिगत रूप से इस बात पर जोर दिया कि केवल इन्फ्रास्ट्रक्चर का विकास ही काफी नहीं है, बल्कि डिजिटल युग में नागरिकों की मानसिक और तकनीकी सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।

प्रशिक्षण सत्र में इन प्रमुख हस्तियों ने संभाली कमान

इस जागरूकता अभियान को जमीन पर उतारने में मनपा के विभिन्न विभागों के प्रमुखों ने अहम भूमिका निभाई। कार्यक्रम के दौरान निम्नलिखित प्रमुख अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे:

  • श्रीमती श्रद्धा बाविस्कर: सिस्टम एनालिस्ट, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग
  • प्राजक्ता कुलकर्णी: जनसंपर्क विभाग प्रमुख
  • राजेश गंगान: अध्ययन अधीक्षक (Superintendent of Studies)

इन सभी ने अपने-अपने क्षेत्र के अनुभवों को साझा करते हुए छात्रों को डिजिटल दुनिया के खतरों और उनसे निपटने के व्यावहारिक तरीकों से अवगत कराया।

छात्रों को मिले सुरक्षा के अचूक मंत्र

प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने कई ऐसे व्यावहारिक बिंदु साझा किए जो हर आम और खास नागरिक के लिए जानना बेहद जरूरी हैं। आइए जानते हैं वे कौन सी मुख्य बातें थीं जिन पर सबसे ज्यादा जोर दिया गया:

1. ओटीपी (OTP) और पासवर्ड की गोपनीयता

विशेषज्ञों ने कड़े शब्दों में समझाया कि वन-टाइम पासवर्ड (OTP) आपकी डिजिटल तिजोरी की चाबी है। इसे किसी के साथ भी फोन पर या मैसेज के जरिए शेयर न करें। इसके अलावा, ऑनलाइन अकाउंट्स के लिए हमेशा एक मजबूत और जटिल पासवर्ड का इस्तेमाल करें, जिसमें अक्षर, अंक और विशेष चिन्हों का मिश्रण हो।

2. संदिग्ध लिंक्स और फर्जी संदेशों से दूरी

आजकल लोगों को लुभावने ऑफर्स, लॉटरी जीतने या फ्री गिफ्ट के नाम पर फर्जी लिंक्स भेजे जाते हैं। जैसे ही कोई यूजर उस लिंक पर क्लिक करता है, उसका बैंक खाता खाली हो जाता है। ट्रेनिंग में छात्रों को सिखाया गया कि किसी भी अज्ञात या संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से पहले सौ बार सोचें।

3. सुरक्षित ऑनलाइन ट्रांजैक्शन

यूपीआई (UPI) और नेट बैंकिंग के इस दौर में पैसे भेजना जितना आसान हुआ है, उतनी ही सावधानी बरतने की भी जरूरत है। पेमेंट करते समय हमेशा वेरिफाइड प्लेटफॉर्म्स का ही इस्तेमाल करें और पब्लिक वाई-फाई का उपयोग करके कभी भी वित्तीय लेनदेन न करें।

छात्रों की सक्रिय भागीदारी और उत्साह

यह प्रशिक्षण सत्र केवल एकतरफा भाषण बनकर नहीं रह गया, बल्कि इसमें छात्रों ने खुलकर हिस्सा लिया। सत्र के दौरान छात्र-छात्राओं ने साइबर सुरक्षा से जुड़े कई तीखे और व्यावहारिक सवाल पूछे। किसी ने पूछा कि अगर गलती से किसी फर्जी लिंक पर क्लिक हो जाए तो तुरंत क्या कदम उठाना चाहिए, तो किसी ने सोशल मीडिया अकाउंट्स के क्लोनिंग से जुड़े सवाल किए।

उपस्थित मेंटर्स ने बहुत ही सरल भाषा में छात्रों के सभी शंकाओं का समाधान किया। विशेषज्ञों द्वारा दिए गए जवाबों से छात्रों का आत्मविश्वास काफी बढ़ा और उन्होंने वादा किया कि वे अपने परिवार और दोस्तों को भी इन साइबर सुरक्षा के नियमों के बारे में जागरूक करेंगे।

समय की मांग है डिजिटल साक्षरता

आज के दौर में केवल पढ़ना-लिखना ही काफी नहीं है, बल्कि 'डिजिटल लिटरेसी' यानी डिजिटल साक्षरता होना भी उतना ही आवश्यक है। साइबर अपराधी रोजाना नए-नए हथकंडे अपनाकर लोगों को ठगने की कोशिश करते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में वॉयस क्लोनिंग और डीपफेक वीडियो के जरिए भी ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं।

ऐसी स्थिति में उल्हासनगर मनपा और ठाणे प्रशासन द्वारा उठाया गया यह कदम वाकई मील का पत्थर साबित हो सकता है। प्रशासन की ओर से आम नागरिकों से भी यह अपील की गई है कि वे किसी भी प्रकार के ऑनलाइन फ्रॉड का शिकार होने पर घबराएं नहीं, बल्कि तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर या नजदीकी पुलिस स्टेशन से संपर्क करें। सतर्कता ही साइबर सुरक्षा का सबसे मजबूत ढाल है।

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रोशनी गुप्ता

रोशनी गुप्ता

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रोशनी गुप्ता जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं।...

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