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वंदे भारत एक्सप्रेस में बड़ा हादसा: गर्म पानी का गिलास फटने से 1 साल का मासूम झुलसा

वंदे भारत एक्सप्रेस में बड़ा हादसा: गर्म पानी का गिलास फटने से 1 साल का मासूम झुलसा

भारतीय रेलवे की हाई-स्पीड और आधुनिक सुविधाओं से लैस वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें अपनी रफ्तार और बेहतर यात्री सेवाओं के लिए जानी जाती हैं। देश भर में इन ट्रेनों को लेकर यात्रियों में एक अलग ही उत्साह देखने को मिलता है। हालांकि, इसी बीच बिहार से गुजरने वाली एक वंदे भारत ट्रेन से जुड़ी ऐसी घटना सामने आई है जिसने रेलवे की खानपान और ऑन-बोर्ड सर्विस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सफर के दौरान ज़रा सी लापरवाही किसी के लिए कितनी भारी पड़ सकती है, इसका अंदाजा इस ताजा घटना से लगाया जा सकता है, जहां एक मासूम बच्चा गंभीर रूप से झुलस गया।

देवघर से वाराणसी जा रही ट्रेन में हुआ हादसा

प्राप्त जानकारी के मुताबिक, यह पूरी घटना देवघर से वाराणसी के बीच चलने वाली देवघर-वाराणसी वंदे भारत एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 22499) के अंदर घटी। ट्रेन में उस समय यात्रियों की सामान्य आवाजाही और यात्रा का माहौल था, तभी एक ऐसी दुर्घटना घटी जिसने पलभर में खुशियों को चिंता और डर में बदल दिया। ट्रेन में सफर कर रहे एक एक साल के मासूम बच्चे पर अचानक उबलता हुआ गर्म पानी गिर गया, जिससे उसका पैर बुरी तरह से झुलस गया। इस अप्रत्याशित घटना के बाद ट्रेन के अंदर अफरातफरी का माहौल बन गया और परिवार वालों की चीख-पुकार से अन्य यात्री भी सहम गए।

पीड़ित परिवार मध्य प्रदेश के देवास का रहने वाला बताया जा रहा है, जिनकी पहचान विनायक राव जाधव के रूप में हुई है। यह परिवार अपनी यात्रा के दौरान देवघर से गया की तरफ जा रहा था। सफर के दौरान बच्चे को दूध या पानी पिलाने की जरूरत को देखते हुए परिजनों ने ट्रेन के स्टाफ से गर्म पानी की मांग की थी। देवघर से ट्रेन के रवाना होने के कुछ ही स्टेशनों के बाद, ऑन-बोर्ड सर्विस अटेंडेंट ने परिवार को एक डिस्पोजेबल पेपर गिलास में गर्म पानी लाकर दिया।

कैसे हुआ हादसा? डिस्पोजेबल गिलास ने दिया धोखा

प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों के बयानों के अनुसार, जैसे ही सर्विस अटेंडेंट ने गर्म पानी से भरा हुआ डिस्पोजेबल गिलास परिवार को सौंपा, वह अचानक बीच से फट गया या कमजोर होने के कारण बिखर गया। गिलास के अचानक फटने से उसमें भरा खौलता हुआ गर्म पानी सीधे उस एक साल के बच्चे के पैरों पर जा गिरा, जो उस समय अपनी मां या पिता की गोद में बैठा हुआ था। पानी इतना गर्म था कि मासूम की नाजुक त्वचा तुरंत लाल पड़ गई और वह दर्द से जोर-जोर से रोने लगा।

इस अचानक हुई घटना से परिवार के होश उड़ गए। ट्रेन के बंद डिब्बे में प्राथमिक मदद तुरंत न मिल पाने के कारण परिजनों की घबराहट और अधिक बढ़ गई। बच्चे की चीखें सुनकर आसपास के अन्य यात्री भी तुरंत मदद के लिए आगे आए और स्थिति को संभालने का प्रयास किया।

स्टाफ और मैनेजर पर लगे लापरवाही के गंभीर आरोप

घटना के तुरंत बाद पीड़ित परिवार ने अपनी नाराजगी जताते हुए संबंधित सर्विस अटेंडेंट से उसका आधिकारिक पहचान पत्र (आई-कार्ड) दिखाने की मांग की। परिजनों का आरोप है कि अटेंडेंट ने नियमों का उल्लंघन करते हुए अपना आई-कार्ड दिखाने से इनकार कर दिया और हीला-हवाली करने लगा। स्थिति को बिगड़ता देख ट्रेन के मैनेजर अंकित कुमार को मौके पर बुलाया गया।

हालांकि, परिवार का यह भी आरोप है कि मौके पर पहुंचे मैनेजर की तरफ से भी उन्हें कोई संतोषजनक जवाब या तत्परता भरा सहयोग नहीं मिला। रेलवे के अधिकृत कर्मचारियों की इस प्रकार की संवेदनहीनता से परिवार का गुस्सा और अधिक भड़क गया। यात्रियों का कहना है कि जहां एक तरफ वंदे भारत जैसी प्रीमियम ट्रेनों में विश्वस्तरीय सुविधाओं का दावा किया जाता है, वहीं ऑन-बोर्ड स्टाफ का यह रवैया बेहद निराशाजनक और गैर-जिम्मेदाराना है।

रेल मदद पोर्टल पर दर्ज कराई गई शिकायत

परिजनों ने इस पूरी घटना के बाद चुप बैठने के बजाय रेलवे के आधिकारिक 'रेल मदद पोर्टल' पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई। अपनी शिकायत में उन्होंने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच की मांग की है और साथ ही सेवा में लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की गुहार लगाई है।

यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा के दावों के बीच इस प्रकार की घटनाएं रेलवे प्रशासन की आंतरिक कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाती हैं। क्या प्रीमियम ट्रेनों में इस्तेमाल होने वाले डिस्पोजेबल बर्तन उच्च गुणवत्ता के नहीं होते? या फिर गर्म तरल पदार्थ परोसते समय सुरक्षा मानकों की अनदेखी की जा रही है? ऐसे कई सवाल अब आम जनता के जेहन में उठ रहे हैं।

नवादा और गया स्टेशन पर मिली चिकित्सा सहायता

घटना के बाद जब ट्रेन नवादा स्टेशन के पास पहुंची, तो वहां बच्चे को किसी तरह प्राथमिक उपचार दिलाया गया। हालांकि, प्राथमिक उपचार से बच्चे के दर्द में कोई खास राहत नहीं मिली और उसकी हालत को देखते हुए परिवार चिंतित बना रहा। इसके बाद जब ट्रेन गया रेलवे स्टेशन पर पहुंची, तो वहां उप स्टेशन प्रबंधक विनोद कुमार सिंह ने त्वरित संज्ञान लिया।

गया स्टेशन पर अधिकारियों ने स्थिति की गंभीरता को समझते हुए बच्चे के उचित इलाज के लिए रेलवे अस्पताल जाने की आधिकारिक पर्ची उपलब्ध कराई। साथ ही, रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों की ओर से परिवार को यह भरोसा दिलाया गया है कि इस मामले में नियमानुसार सभी आवश्यक चिकित्सीय और प्रशासनिक कार्रवाई पूरी की जाएगी ताकि बच्चे को बेहतर इलाज मिल सके।

सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल और सुरक्षा पर बहस

इस पूरी दुर्घटना का एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने की बात सामने आ रही है, जिसमें परिवार का दर्द और रेलवे व्यवस्था के प्रति नाराजगी साफ झलक रही है। हालांकि, इस वायरल वीडियो की किसी भी स्वतंत्र एजेंसी या मंच द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन इसने रेलवे सुरक्षा के मुद्दे को एक बार फिर नेशनल डिबेट का हिस्सा बना दिया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि रेलवे को कैटरिंग और ऑन-बोर्ड सर्विस देने वाले वेंडर्स के लिए कड़े नियम बनाने चाहिए। खासकर जब ट्रेन में छोटे बच्चे सफर कर रहे हों, तो गर्म पानी, चाय या कॉफी जैसे तरल पदार्थ परोसते समय लीक-प्रूफ और मजबूत इंसुलेटेड कंटेनर्स का इस्तेमाल अनिवार्य किया जाना चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की दर्दनाक घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोका जा सके। फिलहाल, सबकी निगाहें रेलवे अधिकारियों की जांच और इस मामले में होने वाली आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

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रोली सिंह

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रोली सिंह पिछले 2 सालों से पत्रकारिता और न्यूज़ रिपोर्टिंग से जुड़ी हैं। वह लोकल न्यूज़ और लोगों से जुड़े मुद्दों को पढ़ने वालों तक पहुंचाने का काम...

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