वाराणसी के चितईपुर से अखरी बाईपास मार्ग पर इन दिनों हालात बेहद खराब हैं। सड़क पर जमा गंदा पानी और जानलेवा गड्ढे रोजाना राहगीरों के लिए मुसीबत का सबब बन चुके हैं। स्थिति यह है कि लोगों का इस रास्ते से गुजरना किसी खतरे से खाली नहीं है। बरसात के बाद से ही इस मार्ग की हालत लगातार बद से बदतर होती चली गई है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की नींद अब तक नहीं खुली है।
अदृश्य गड्ढे और दुर्घटनाओं का बढ़ता खतरा
इस बाईपास मार्ग पर सबसे बड़ी समस्या पानी का भराव है। कई दिनों तक पानी भरे रहने के कारण सड़क पर बने गड्ढों की गहराई का अंदाजा लगाना नामुमकिन हो गया है। परिणामस्वरूप, दोपहिया वाहन चालक रोजाना असंतुलित होकर गिर रहे हैं।
विशेषकर स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों और पैदल चलने वालों के लिए यह रास्ता किसी परीक्षा से कम नहीं है। जरा सी चूक बड़े हादसे का कारण बन सकती है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि आए दिन यहां वाहन फिसलते हैं और लोग चोटिल होते हैं, फिर भी प्रशासनिक स्तर पर अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है.
खानापूर्ति बनी मुसीबत की वजह
स्थानीय लोगों ने बताया कि जब सड़क की हालत ज्यादा खराब हुई, तो कुछ जगह सिर्फ औपचारिकता पूरी करने के लिए गिट्टी डालकर गड्ढों को पाटने का प्रयास किया गया। लेकिन यह उपाय केवल कुछ ही दिनों का साबित हुआ।
पहली हल्की बारिश या वाहनों के भारी दबाव से वह गिट्टी भी बिखर गई और स्थिति फिर से पहले जैसी हो गई। सड़क की डामर परत पूरी तरह उखड़ चुकी है, जिससे वाहन चालकों को धूल और कीचड़ दोनों का सामना करना पड़ रहा है।
जल निकासी का अभाव: मूल जड़
इस विकट समस्या के पीछे सबसे बड़ा कारण पानी की निकासी के लिए किसी पक्की व्यवस्था का न होना है। जानकारों और स्थानीय लोगों का साफ कहना है कि जब सड़क का निर्माण किया गया था, तब इंजीनियरों और ठेकेदारों ने पानी के निकास के लिए नालियों के निर्माण पर कोई ध्यान नहीं दिया।
- सड़क के दोनों ओर पक्की नालियां न होने से बारिश का पानी सीधा सड़क पर ठहर जाता है।
- पानी के निकास का कोई रास्ता न होने के कारण यह गंदा पानी आसपास के रिहायशी मकानों में भी घुस रहा है।
- स्थानीय लोगों के घरों के सामने जलभराव से संक्रामक बीमारियों का खतरा भी तेजी से मंडराने लगा है।
राहगीरों और वाहन चालकों की आपबीती
इस रास्ते से रोजाना गुजरने वाले लोगों का कहना है कि जब कोई चार पहिया वाहन तेज गति से गुजरता है, तो सड़क पर जमा सारा गंदा पानी छितराकर पैदल चल रहे लोगों और स्कूल के बच्चों के यूनीफॉर्म पर गिर जाता है। मजबूरन लोगों को अपने रोजाना के सफर के लिए लंबे और वैकल्पिक रास्तों का सहारा लेना पड़ रहा है, जिससे समय और ईंधन दोनों की बर्बादी हो रही है।
स्थानीय प्रशासन से बड़ी उम्मीदें
क्षेत्र की जनता अब पूरी तरह त्रस्त आ चुकी है और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रही है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द ही इस मार्ग पर पैच वर्क के साथ-साथ दोनों तरफ स्थायी नालियों का निर्माण नहीं कराया गया, तो आने वाले दिनों में जनता बड़ा प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होगी।
फिलहाल, 2026 के इस दौर में भी एक प्रमुख मार्ग का इस तरह खस्ताहाल होना शहर के विकास के दावों की पोल खोलता नजर आ रहा है। देखना यह होगा कि कब तक स्थानीय प्रशासन इस गंभीर समस्या का संज्ञान लेकर जनता को राहत पहुंचाता है।