दिल्ली से सटे नोएडा में औद्योगिक क्षेत्रों की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। शुक्रवार, 18 September 2026 की सुबह नोएडा के पॉश और व्यस्त औद्योगिक क्षेत्र सेक्टर-63 की एक गारमेंट फैक्ट्री में अचानक भीषण आग भड़क उठी। आग इतनी भयानक थी कि देखते ही देखते इमारत की चौथी मंजिल से ऊंची-ऊंची लपटें उठने लगीं और दूर-दूर तक आसमान में काले धुएं का गुबार छा गया। इस घटना से आसपास की फैक्ट्रियों और इलाक़े में हड़कंप मच गया।
अचानक उठी लपटों से मची भगदड़
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, सुबह के वक्त जब फैक्ट्री में कामकाज शुरू होने की प्रक्रिया चल रही थी, तभी अचानक चौथी मंजिल से धुएं का गुबार निकलता हुआ दिखाई दिया। कुछ ही पलों में आग ने विकराल रूप धारण कर लिया और लपटें खिड़कियों से बाहर आने लगीं। गनीमत यह रही कि समय रहते सतर्कता बरती गई, जिससे एक बड़ा मानवीय संकट टल गया। जैसे ही आग लगने का अहसास हुआ, फैक्ट्री के अंदर मौजूद कर्मचारियों ने तुरंत सुरक्षित बाहर निकलना शुरू कर दिया। देखते ही देखते वहां अफरातफरी का माहौल बन गया।
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और दमकल विभाग (Fire Department) को तुरंत अलर्ट किया गया। आग की गंभीरता को देखते हुए फौरन राहत और बचाव कार्य शुरू किए गए।
8 दमकल गाड़ियों ने डेढ़ घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद पाया काबू
आग की सूचना मिलते ही मुख्य अग्निशमन अधिकारी के निर्देश पर गाजियाबाद और नोएडा के विभिन्न फायर स्टेशनों से दमकल की गाड़ियों को तुरंत रवाना किया गया। घटनास्थल पर कुल 8 दमकल गाड़ियां पहुंचीं। आग की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि उस पर पानी की बौछारें डालने के लिए फायर कर्मियों को खासी मशक्कत करनी पड़ी।
- चौथी मंजिल पर लगी थी आग: आग फैक्ट्री की ऊपरी मंजिल पर केंद्रित थी, जिससे दमकल कर्मियों को पानी ऊपर तक पहुंचाने में तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
- डेढ़ घंटे का रेस्क्यू ऑपरेशन: लगातार पानी और फोम का इस्तेमाल करते हुए दमकल कर्मियों की टीम ने करीब डेढ़ घंटे की कड़ी मेहनत के बाद आग की लपटों पर पूरी तरह काबू पा लिया।
- कूलिंग ऑपरेशन जारी: आग बुझने के बाद भी किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए कूलिंग ऑपरेशन चलाया गया ताकि सुलग रहे हिस्सों को पूरी तरह शांत किया जा सके।
शॉर्ट सर्किट या कुछ और? आग लगने के कारणों की जांच शुरू
प्रारंभिक जांच में आग लगने का मुख्य कारण शॉर्ट सर्किट (Short Circuit) बताया जा रहा है, हालांकि दमकल विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन ने अभी तक इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। फैक्ट्री के भीतर रखा लाखों रुपये का गारमेंट मटेरियल, कच्चा माल और मशीनें जलकर खाक होने की आशंका जताई जा रही है। नुकसान का वास्तविक आंकलन फैक्ट्री प्रबंधन और प्रशासन की संयुक्त जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
प्रशासन अब यह भी जांच कर रहा है कि क्या संबंधित फैक्ट्री में आग बुझाने के पर्याप्त यंत्र (Fire Fighting Equipment) और एनओसी (NOC) के नियम कायदों का पालन हो रहा था या नहीं। यदि जांच में सुरक्षा मानकों की अनदेखी पाई जाती है, तो संबंधित प्रबंधन के खिलाफ सख्त वैधानिक कार्रवाई की जा सकती है।
औद्योगिक सुरक्षा पर उठ रहे गंभीर सवाल
नोएडा और ग्रेटर नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में इस तरह की आग की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं। आए दिन फैक्ट्रियों और गोदामों में आग लगने की खबरें सामने आती रहती हैं, जो यहां की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलती हैं। जानकारों का मानना है कि गर्मियों और त्योहारी सीजन के दौरान बिजली के लोड बढ़ने से इस तरह के हादसे और अधिक बढ़ जाते हैं।
स्थानीय निवासियों और उद्यमियों ने प्रशासन से मांग की है कि सभी औद्योगिक इकाइयों में नियमित रूप से फायर ऑडिट (Fire Audit) कराया जाना चाहिए ताकि समय रहते ऐसी बड़ी दुर्घटनाओं को रोका जा सके। फिलहाल, सेक्टर-63 की इस गारमेंट फैक्ट्री के पास स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और पुलिस मामले की गहनता से छानबीन कर रही है।