काशी की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों में शुमार विश्व प्रसिद्ध रामनगर की रामलीला को लेकर प्रशासन अब पूरी तरह से सतर्क हो गया है। रामलीला के दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संभावित भारी भीड़ को ध्यान में रखते हुए नगर निगम ने अपनी तैयारियों को अंतिम और पुख्ता रूप देना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में प्रशासनिक अमले ने खुद मैदान में उतरकर व्यवस्थाओं की कमान संभाल ली है, ताकि आने वाले दर्शकों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।
निरीक्षण के दौरान खुले प्रशासनिक इंतज़ामों के पन्नेअक्टूबर 2026 के इस दौर में जब त्योहारी सीजन और ऐतिहासिक आयोजनों की तैयारियां जोरों पर हैं, तब नगर निगम के शीर्ष अधिकारियों की सक्रियता देखते ही बनती है। हाल ही में, महापौर अशोक कुमार तिवारी और नगर आयुक्त हिमांशु नागपाल ने खुद रामनगर रामलीला मैदान का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ जलकल महाप्रबंधक अनूप सिंह, मुख्य अभियंता सुरेश चंद्र, अधिशासी अभियंता विकास कुरील सहित कई स्थानीय पार्षद और गणमान्य नागरिक भी मौजूद रहे।
निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य रामलीला क्षेत्र में साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, जलापूर्ति और जल निकासी के पुख्ता इंतजामों का जायजा लेना था। अधिकारियों ने रामलीला मैदान के चप्पे-चप्पे का बारीकी से मुआयना किया और मौके पर मौजूद कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
जलभराव और गंदे पानी पर फूटा अधिकारियों का गुस्सा
निरीक्षण के दौरान जब प्रशासनिक दल रामबाग के सामने वाले मैदान में पहुंचा, तो वहां हल्का जलभराव देखने को मिला। इस स्थिति को देखकर महापौर और नगर आयुक्त ने गहरी नाराजगी व्यक्त की। मैदान में पानी जमा होने से श्रद्धालुओं को होने वाली असुविधा को भांपते हुए महापौर ने तत्काल प्रभाव से पानी निकलवाने के निर्देश दिए।
इसके साथ ही, मैदान को समतल और उपयोग के योग्य बनाने के लिए उस पर भस्सी डालने के भी निर्देश दिए गए। अधिकारियों को दो टूक शब्दों में समझाया गया कि श्रद्धालुओं की आवाजाही वाले किसी भी मार्ग या स्थान पर पानी का ठहराव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
रामबाग तालाब में गंदा पानी जाने पर जताई कड़ी आपत्ति
निरीक्षण का एक और अहम पहलू रामबाग तालाब के पास देखने को मिला। चंदौली की ओर से एक नाले के जरिए आ रहे गंदे पानी को सीधे तालाब में गिरते देख महापौर ने मौके पर मौजूद संबंधित अधिकारियों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने तुरंत इस नाले के पानी को तालाब में मिलने से रोकने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था करने और ठोस कदम उठाने के आदेश दिए।
तालाबों और जल स्रोतों की स्वच्छता को बनाए रखने के लिए यह कदम बेहद अहम माना जा रहा है। अधिकारियों को यह भी चेतावनी दी गई कि पर्यावरण और धार्मिक आस्था के इन केंद्रों के आसपास किसी भी प्रकार की गंदगी या जल प्रदूषण नहीं फैलना चाहिए।
प्रमुख चौराहों और मार्गों पर विशेष फोकस
रामलीला क्षेत्र के आसपास जल निकासी की समस्या से स्थायी रूप से निपटने के लिए नगर निगम ने कई अहम रणनीतियां बनाई हैं। निरीक्षण के दौरान:
- खेदू पहलवान बीर बाबा रोड: इस मार्ग पर जलभराव की समस्या के समाधान के लिए तत्काल प्रभाव से पंप और सक्शन मशीनें लगाने के निर्देश दिए गए।
- पंचवटी त्रिमुहानी: इस व्यस्त चौराहे पर भी पानी की निकासी को सुचारू बनाने के वास्ते विशेष मशीनों की तैनाती के आदेश जारी किए गए।
- स्थलीय निगरानी: मौके पर मौजूद जेई (junior engineer), एई (assistant engineer) और स्वास्थ्य निरीक्षकों को सख्त निर्देश दिए गए कि जब तक सभी व्यवस्थाएं पूरी तरह दुरुस्त नहीं हो जातीं, वे क्षेत्र में ही कैंप करेंगे।
दिन में दो बार होगी रिपोर्टिंग, लापरवाही पर होगी कार्रवाई
व्यवस्थाओं में किसी भी तरह की कोताही को रोकने के लिए नगर निगम ने निगरानी के स्तर को काफी बढ़ा दिया है। महापौर ने स्पष्ट किया है कि रामलीला की तैयारियों में यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही बरती गई, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
इस पूरी व्यवस्था की मॉनिटरिंग सीधे तौर पर बड़े अधिकारियों के हाथ में होगी। मुख्य अभियंता और प्रभारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे प्रतिदिन कम से कम दो बार रामलीला क्षेत्र का दौरा करेंगे और उसकी रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को सौंपेंगे।
श्रद्धालुओं की सुविधा सर्वोपरि
विश्व प्रसिद्ध रामनगर की रामलीला अपनी अनूठी शैली और पौराणिक परंपरा के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है। यहां आने वाले हर एक दर्शक और श्रद्धालु के लिए यह अनुभव दिव्य और अलौकिक होता है। नगर निगम के इन कड़े और समय पर उठाए गए कदमों से यह साफ जाहिर होता है कि प्रशासन इस बार व्यवस्थाओं में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ना चाहता।
स्थानीय नागरिकों और पार्षदों ने भी नगर निगम के इस त्वरित कदम की सराहना की है। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि रामलीला शुरू होने से पहले क्षेत्र की सभी समस्याओं का शत-प्रतिशत समाधान कर लिया जाएगा, ताकि काशी की इस सांस्कृतिक धरोहर के गवाह बनने आने वाले देश-विदेश के पर्यटकों को एक बेहतरीन और सुगम अनुभव प्राप्त हो सके।