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वाराणसी में पटरी दुकानदारों का फूटा गुस्सा, 72 घंटे का अल्टीमेटम

वाराणसी में पटरी दुकानदारों का फूटा गुस्सा, 72 घंटे का अल्टीमेटम

वाराणसी में पटरी व्यवसायियों और प्रशासन के बीच तनाव अब अपने चरम पर पहुंच गया है। शहर के छोटे दुकानदारों और ठेला-खोमचा लगाने वालों की आजीविका पर मंडरा रहे खतरे को देखते हुए राष्ट्रीय फेरी पटरी ठेला व्यवसायी महासंघ ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है। संगठन ने स्थानीय प्रशासन को सीधे तौर पर 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। यदि इस तयशुदा समय के भीतर उनकी मांगें नहीं मानी जाती हैं, तो काशी की सड़कों पर एक बड़ा आंदोलन देखने को मिलेगा।

इंग्लिशिया लाइन में गरजी महासंघ की आवाज

शुक्रवार को इंग्लिशिया लाइन स्थित जवाहरलाल नेहरू मार्केट में संगठन के कार्यालय पर एक महत्वपूर्ण प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस दौरान राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक निगम ने नगर निगम और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर बेहद तीखे सवाल उठाए। उन्होंने खुले तौर पर आरोप लगाया कि अधिकारी पथ विक्रेता (आजीविका संरक्षण और विनियमन) अधिनियम, 2014 के नियमों और प्रावधानों को ताक पर रखकर काम कर रहे हैं।

अभिषेक निगम ने मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि अधिनियम का मूल उद्देश्य देश के हर कोने में छोटे पथ विक्रेताओं को सुरक्षा प्रदान करना और उनकी आजीविका को कानूनी संरक्षण देना है। लेकिन वाराणसी में इसके बिल्कुल उलट हो रहा है, जहां गरीब वेंडर्स को प्रताड़ित करने का सिलसिला लगातार जारी है।

63 में से 26 वेंडिंग जोन खत्म करने पर बड़ा विवाद

महासंघ की सबसे बड़ी नाराजगी वेंडिंग जोनों को लेकर है। संगठन के मुताबिक, वाराणसी नगर निगम ने शुरुआत में शहर भर में कुल 63 वेंडिंग जोन चिन्हित किए थे, जहां ये छोटे कारोबारी अपनी रोजी-रोटी चला सकते थे। लेकिन बाद के दिनों में इनमें से 26 वेंडिंग जोनों को बिना किसी ठोस वैकल्पिक व्यवस्था के अचानक समाप्त कर दिया गया।

इस फैसले के कारण सैकड़ों की संख्या में पटरी व्यवसायी रातों-रात बेरोजगार हो गए हैं। उनके सामने अपने परिवार का भरण-पोषण करने का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। कारोबारियों का कहना है कि जब तक सरकार उनके लिए स्थायी और सुगम वैकल्पिक व्यवस्था नहीं करती, तब तक इस तरह की मनमानी कार्रवाइयों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

सरकारी योजनाओं और जमीनी हकीकत में भारी विरोधाभास

केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी 'पीएम स्वनिधि योजना' का जिक्र करते हुए महासंघ ने दोहरी नीति पर सवाल खड़े किए। अभिषेक निगम ने कहा कि एक तरफ केंद्र सरकार इस योजना के जरिए पटरी व्यवसायियों को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और उन्हें आसान ऋण (लोन) उपलब्ध कराने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय स्तर पर लिए जा रहे प्रशासनिक निर्णय इन गरीबों के कारोबार को पूरी तरह तबाह कर रहे हैं। लोन चुकाने का दबाव एक तरफ है और कमाई के जरिए छीने जा रहे हैं, जिससे वेंडर्स कर्ज के दलदल में फंसते जा रहे हैं।

चौकाघाट नाइट मार्केट और सारनाथ फूड हब पर गंभीर आरोप

प्रेस वार्ता के दौरान शहर के अन्य प्रमुख व्यावसायिक केंद्रों की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल उठाए गए। महासंघ ने निम्नलिखित मुद्दों को प्रमुखता से उठाया:

  • चौकाघाट-लहरतारा फ्लाईओवर नाइट मार्केट: आरोप है कि यहां फ्लाईओवर के नीचे बने नाइट मार्केट में मूल और वास्तविक पटरी व्यवसायियों को दरकिनार कर दिया गया और दुकानों का आवंटन नियमों के विरुद्ध किया गया। बाद में जब नाइट मार्केट को हटाया गया, तो वहां व्यवसाय करने वालों को दोबारा बसाने के लिए प्रशासन की तरफ से कोई सार्थक कदम नहीं उठाया गया।
  • सारनाथ हवेलिया तिराहा स्ट्रीट फूड हब: संगठन ने यहां फूड हब के आवंटन में भारी अनियमितता का आरोप लगाया है। दावा किया गया कि जो स्ट्रीट वेंडर्स लंबे समय से वहां अपनी दुकानें चला रहे थे, उन्हें उजाड़कर अन्य लोगों को दुकानें आवंटित कर दी गईं।
  • दशाश्वमेध क्षेत्र में कार्रवाई: विश्व प्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट के आसपास के इलाकों में अस्थायी स्ट्रीट वेंडर्स के खिलाफ हो रही लगातार पुलिसिया कार्रवाई और उनके सामान को जब्त किए जाने की घटना की भी कड़ी निंदा की गई।

प्रशासन को 72 घंटे का अल्टीमेटम और आंदोलन की चेतावनी

इन तमाम समस्याओं और प्रशासनिक उदासीनता से आहत महासंघ ने अब अंतिम चेतावनी जारी कर दी है। संगठन ने प्रशासन को स्पष्ट शब्दों में कहा है कि उनके पास केवल 72 घंटे का समय है। इस समयावधि के भीतर निम्नलिखित पांच सूत्रीय मांगों पर गंभीरता से विचार किया जाए:

  1. नाइट मार्केट में उजाड़े गए स्ट्रीट वेंडर्स को तुरंत व्यवस्थित और पुनर्स्थापित किया जाए।
  2. सारनाथ हवेलिया स्ट्रीट फूड हब के आवंटन की पूरी प्रक्रिया की उच्चस्तरीय जांच कराकर इस पर पुनर्विचार हो।
  3. दशाश्वमेध और अन्य पर्यटक क्षेत्रों में अस्थायी वेंडर्स को शांतिपूर्ण ढंग से व्यवसाय करने की अनुमति दी जाए।
  4. नगर निगम द्वारा पहले समाप्त किए गए सभी वेंडिंग जोनों के फैसले की समीक्षा की जाए।
  5. पटरी व्यवसायियों के खिलाफ पुलिस प्रशासन द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न और अवैध वसूली पर पूरी तरह रोक लगाई जाए।

महासंघ के पदाधिकारियों ने दो टूक कहा है कि यदि निर्धारित 72 घंटों के भीतर उनकी इन न्यायसंगत मांगों को नहीं माना गया, तो वे चुप नहीं बैठेंगे। आने वाले सप्ताह से वाराणसी में चरणबद्ध तरीके से उग्र आंदोलन की शुरुआत की जाएगी, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और नगर निगम की होगी।

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निवेदिता ठाकुर

निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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