सितंबर के महीने में अगर अचानक से सर्द हवाएं चलने लगें और नवंबर जैसी ठंड का अहसास होने लगे, तो यह किसी हैरान कर देने वाले प्राकृतिक बदलाव से कम नहीं है। उत्तर प्रदेश के धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र वाराणसी (काशी) में इन दिनों कुछ ऐसा ही अनोखा नजारा देखने को मिल रहा है। ओडिशा के पास बने एक प्रभावी चक्रवाती तंत्र के कारण उत्तर प्रदेश के कई जिलों में मौसम ने अचानक यू-टर्न ले लिया है। काशी की सड़कों पर अचानक सुबह-सुबह झमाझम बारिश शुरू हो गई, जिसने उमस भरी गर्मी से जूझ रहे लोगों को बड़ी राहत तो दी ही, साथ ही मौसम विभाग के पूर्वानुमान को भी बिल्कुल सटीक साबित कर दिया।
अचानक बदला मौसम: अलसुबह शुरू हुई मानसूनी बौछारें
गुरुवार का दिन वाराणसी के लिए आम दिनों जैसा बिल्कुल नहीं था। आसमान में छाए घने काले बादलों और अलसुबह से शुरू हुई तेज बारिश ने पूरे शहर की रफ्तार को एक बार के लिए थाम दिया। सुबह से ही शुरू हुआ यह बारिश का सिलसिला रुक-रुक कर पूरे दिन भर जारी रहा। कभी तेज तो कभी रिमझिम फुहारों के बीच चली ठंडी हवाओं ने शहर के तापमान में भारी गिरावट दर्ज कराई। स्थानीय लोगों के लिए सितंबर के अंतिम सप्ताह में इस तरह की ठंडक का अनुभव करना एक सुखद आश्चर्य की तरह था, क्योंकि अमूमन इस महीने में लोग उमस और तीखी धूप से परेशान रहते हैं।
मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इस एक दिन की बारिश ने शहर के पारे को धड़ाम से नीचे गिरा दिया। वाराणसी में लगभग 30 मिलीमीटर तक बारिश दर्ज की गई, जिसने जमीन की प्यास बुझाने के साथ-साथ वातावरण को पूरी तरह से तरबतर कर दिया। दिनभर बादलों की आवाजाही और लगातार बरसते पानी के चलते सूर्यदेव के दर्शन दुर्लभ रहे।पारा धड़ाम: सामान्य से 6.3 डिग्री नीचे पहुंचा तापमान
मौसम में आए इस अचानक बदलाव का सबसे बड़ा असर तापमान पर देखने को मिला। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वाराणसी का अधिकतम तापमान सामान्य से सीधे 6.3 डिग्री सेल्सियस नीचे लुढ़क गया। गुरुवार को शहर का अधिकतम तापमान 27 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि न्यूनतम तापमान 23.6 डिग्री सेल्सियस के आसपास रिकॉर्ड किया गया।
इतनी बड़ी गिरावट अमूल्य रूप से इस मौसम में बहुत कम देखने को मिलती है। यही वजह है कि लोगों को सितंबर के महीने में ही नवंबर और दिसंबर की शुरुआती सिहरन का अहसास होने लगा। सुबह और शाम के वक्त घरों में हल्के गर्म कपड़ों या चादरों की जरूरत महसूस होने लगी है।
तेज हवाओं ने बढ़ाई ठंडक
सिर्फ बारिश ही नहीं, बल्कि हवाओं के तेवर भी काफी तीखे रहे। दिनभर करीब 25 से 30 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से ठंडी हवाएं चलती रहीं। इन तेज हवाओं और बारिश के मेल ने वातावरण में नमी की मात्रा को काफी बढ़ा दिया। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इतनी तेज गति से हवाएं चलने के कारण ही तापमान में इतनी भारी गिरावट दर्ज की गई है। उमस और चिपचिपी गर्मी से परेशान हो चुके काशीवासियों के लिए यह किसी बड़े वरदान से कम नहीं था।
ओडिशा चक्रवात और निम्न दबाव का असर
आखिर अचानक मौसम में इस तरह का भारी उलटफेर क्यों हुआ? इसके पीछे की तकनीकी वजह बताते हुए मौसम विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि ओडिशा तट के पास एक चक्रवाती सिस्टम और पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर बने निम्न दबाव के क्षेत्र (Low Pressure Area) ने मिलकर इस मानसूनी गतिविधि को बढ़ावा दिया है। इसी मौसमी तंत्र के प्रभाव से पूरे पूर्वांचल में बादलों का डेरा जमा हुआ है और लगातार बारिश की स्थितियां बन रही हैं।
मौसम विज्ञान केंद्र के जानकारों का कहना है कि यह मौसमी सिस्टम अभी पूरी तरह से शांत नहीं हुआ है। इसका असर आने वाले कुछ और दिनों तक उत्तर प्रदेश के पूर्वी हिस्सों पर बना रहेगा।
आगामी मौसम का पूर्वानुमान: क्या अभी और बरसेगा पानी?
यदि आप वाराणसी या आसपास के जिलों में यात्रा करने की योजना बना रहे हैं या फिर खुले में किसी कार्यक्रम का हिस्सा बनने वाले हैं, तो आपको थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है। मौसम विभाग की ताजा चेतावनी के मुताबिक, पूर्वी उत्तर प्रदेश में अभी बारिश का यह दौर थमने वाला नहीं है।
- लगातार बारिश की संभावना: अगले कुछ दिनों तक रुक-रुक कर बारिश का सिलसिला जारी रहने के आसार हैं।
- वज्रपात और तेज हवा की चेतावनी: विभाग ने बारिश के साथ-साथ आकाशीय बिजली (वज्रपात) गिरने और तेज हवाएं चलने की चेतावनी भी जारी की है।
- प्रभाव की अवधि: इस मौसम का यह बदला हुआ मिजाज और बारिश का यह दौर आगामी 27 सितंबर तक पूरी सक्रियता के साथ बना रह सकता है।
आम जनजीवन और कृषि पर प्रभाव
मौसम के इस अचानक करवट लेने से जहां एक तरफ आम जनता को भीषण गर्मी और उमस से राहत मिली है, वहीं दूसरी तरफ किसानों के लिए भी यह बारिश मिली-जुली खबर लेकर आई है। धान की फसल के लिए इस समय पानी की जरूरत होती है, ऐसे में यह बारिश फसलों के लिए फायदेमंद साबित हो सकती है। हालांकि, जिन इलाकों में अत्यधिक जलभराव की स्थिति बन गई है, वहां निचले इलाकों के लोगों को कुछ असुविधाओं का सामना भी करना पड़ रहा है।
प्रशासन और स्थानीय निकायों ने भी बदलते मौसम के मद्देनजर अपनी कमर कस ली है। जलभराव वाले प्रमुख मार्गों पर पानी निकासी के इंतजाम किए जा रहे हैं ताकि यातायात बाधित न हो।
कुल मिलाकर देखा जाए तो वाराणसी में मौसम का यह नया रूप अपने साथ एक सुहावना और ठंडक भरा माहौल लेकर आया है। जहां एक तरफ मानसून की यह विदाई आम दिनों से बिल्कुल अलग और सर्द अंदाज में हो रही है, वहीं दूसरी तरफ लोगों को गर्मी से राहत का एक अंतिम मौका मिल गया है। अगले 24 से 48 घंटों के दौरान मौसम के तेवर ऐसे ही बने रहने की उम्मीद है, इसलिए घर से निकलने से पहले मौसम के मिजाज को भांपना और छाता या रेनकोट साथ रखना आपके लिए बेहद समझदारी भरा कदम होगा।