महाराष्ट्र के विदर्भ क्षेत्र से एक बेहद चिंताजनक और गंभीर तस्वीर सामने आ रही है। इस साल मानसून की बेरुखी और मूसलाधार बारिश के अभाव ने अन्नदाताओं की कमर तोड़ कर रख दी है। स्थिति की गंभीरता को भांपते हुए राज्य सरकार ने आखिरकार बड़ा कदम उठाया है और नागपुर जिले की सभी 14 तहਸੀलों समेत पूरे राज्य की 265 तहसीलों में सूखे की आधिकारिक घोषणा कर दी है। खेतों में लहलहाती फसलें सूख चुकी हैं और कुएं तथा बोरवेल जवाब देने लगे हैं, जिसके चलते ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं।
कम बारिश ने बदला फिजा का रंग, खेत हुए वीरान
मौसम के बदलते मिजाज और बारिश के असमान वितरण ने इस साल किसानों के सपनों पर पानी फेर दिया है। जून से लेकर सितंबर के आखिरी हफ्तों तक जिस पैमाने पर बादलों को बरसने की उम्मीद थी, वह पूरी नहीं हो सकी। नागपुर संभाग सहित विदर्भ के कई जिलों में औसत से बेहद कम बारिश दर्ज की गई। नतीजतन, सोयाबीन, कपास और धान जैसी प्रमुख खरीफ फसलें शुरुआती दौर में ही दम तोड़ गईं। किसानों ने कर्ज लेकर महंगे बीज और खाद खरीदे थे, लेकिन आसमान की तरफ टकटकी लगाए देखने के अलावा उनके पास कुछ नहीं बचा।
प्रशासनिक रिपोर्टों और ग्राउंड ज़ीरो से मिली जानकारियों के आधार पर सरकार ने यह माना है कि इन 265 तहसीलों में कृषि उत्पादन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। पानी की भारी किल्लत के कारण इंसानों के साथ-साथ मवेशियों के सामने भी चारे और पीने के पानी का संकट खड़ा हो गया है।
सरकार का बड़ा फैसला: किसानों को मिलेंगी ये खास राहत और रियायतें
सूखे की मार झेल रहे किसानों को फौरी तौर पर आर्थिक और मानसिक संबल देने के लिए महाराष्ट्र सरकार ने कई महत्वपूर्ण राहत पैकेजों और रियायतों का ऐलान किया है। इन उपायों का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि संकट के इस दौर में किसानों को कर्ज के बोझ तले आत्महत्या जैसे चरम कदम न उठाने पड़ें।1. कर्ज वसूली पर तत्काल रोक (Moratorium on Loan Recovery)
सूखाग्रस्त घोषित की गई तहसीलों में बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा किसानों से कृषि ऋण की वसूली पर रोक लगा दी गई है। अब कोई भी बैंक या वित्तीय एजेंसी किसानों पर लोन चुकाने का दबाव नहीं बनाएगी। इसके अलावा, अल्पकालिक ऋणों को मध्यमकालिक ऋणों में बदलने की प्रक्रिया भी शुरू की जा रही है, ताकि किसानों को चुकाने के लिए पर्याप्त समय मिल सके।
2. बिजली बिलों में भारी छूट और राहत
किसानों के कृषि पंपों के बिजली बिलों को लेकर भी सरकार ने बड़ा रियायती फैसला लिया है। जिन इलाकों में सूखा पड़ा है, वहां के किसानों के कृषि उपयोग वाले बिजली बिलों में आंशिक से लेकर पूर्ण छूट प्रदान की जा रही है। इसके साथ ही, बिजली कनेक्शन काटने की कार्रवाई पर भी रोक लगा दी गई है, ताकि सिंचाई के जो थोड़े-बहुत साधन बचे हैं, वे चालू रह सकें।
3. बच्चों की स्कूल और कॉलेज की फीस माफ
कृषि संकट के बीच परिवारों का आर्थिक बजट पूरी तरह बिगड़ जाता है। इसे ध्यान में रखते हुए सूखाग्रस्त क्षेत्रों के किसानों के बच्चों की स्कूल और कॉलेज की ट्यूशन फीस माफ किए जाने के निर्देश दिए गए हैं। शिक्षा बाधित न हो, इसके लिए प्रशासनिक स्तर पर यह कदम उठाया गया है।
प्रशासन और स्थानीय निकायों की तैयारियां
स्थिति से निपटने के लिए जिला प्रशासन को युद्ध स्तर पर काम करने के निर्देश दिए गए हैं। जिन गांवों में पीने के पानी की गंभीर समस्या है, वहां टैंकरों के जरिए जलापूर्ति सुनिश्चित की जा रही है। साथ ही, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं, ताकि पलायन को रोका जा सके और किसानों व मजदूरों को दैनिक आजीविका का साधन मिल सके।
- पेयजल आपूर्ति: जिन बस्तियों में जलस्त्रोत सूख चुके हैं, वहां विशेष टैंकर सेवा शुरू की गई है।
- पशु चारा शिविर: मवेशियों के लिए चारा डिपो खोले जा रहे हैं ताकि कम दामों पर या मुफ्त में चारा उपलब्ध कराया जा सके।
- स्वास्थ्य सेवाएं: ग्रामीण अंचलों में स्वास्थ्य शिविर लगाकर कुपोषण और पानी से होने वाली बीमारियों की रोकथाम के प्रयास किए जा रहे हैं।
आगे की राह और विशेषज्ञों की राय
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि केवल फौरी राहत देने से काम नहीं चलेगा, बल्कि विदर्भ जैसे क्षेत्रों में जल संचयन (Water Conservation) और ड्रिप इरिगेशन जैसी आधुनिक तकनीकों को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देना होगा। बार-बार पड़ने वाले सूखे के चक्र को तोड़ने के लिए भूजल स्तर को ऊपर उठाने वाली परियोजनाओं को गति देनी होगी। बहरहाल, वर्तमान संकट की घड़ी में नागपुर सहित 265 तहसीलों में सूखा घोषित होने से किसानों को प्रशासनिक और वित्तीय मोर्चे पर एक बड़ी ढाल जरूर मिली है, जिससे उन्हें इस आपदा से उबरने में मदद मिलेगी।