अस्पताल की चौखट पर उम्मीद और जीवन के बीच सांसें चल रही थीं, लेकिन उसी परिसर के भीतर एक ऐसा साया मंडरा रहा था जो किसी भी परिवार को जिंदगी भर का नासूर दे सकता था। उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के पीडीडीयू नगर स्थित राजकीय महिला चिकित्सालय में बुधवार दोपहर एक ऐसा सनसनीखेज वाकया सामने आया जिसने हर किसी के रोंगटे खड़े कर दिए। मां अस्पताल के बिस्तर पर दर्द और इलाज के बीच अपनी सुध-बुध खोए हुए थी, और बाहर उसकी चार साल की मासूम बेटी एक शातिर संदिग्ध महिला के चंगुल में फंसने ही वाली थी। गनीमत रही कि मौके पर तैनात एक सतर्क सुरक्षा गार्ड की नजर समय रहते उस पर पड़ गई, वरना यह कहानी किसी और ही दर्दनाक मोड़ पर खत्म होती।
अस्पताल परिसर में अचानक मची भगदड़
बुधवार का दिन अस्पताल के सामान्य दिनों की तरह ही शुरू हुआ था। वार्डों में तीमारदारों की आवाजाही थी, डॉक्टर अपने काम में व्यस्त थे और मरीज अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। इसी बीच, अलीनगर थाना क्षेत्र के रेमा गांव की रहने वाली एक प्रसूता महिला इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती थी। उसकी चार साल की नन्हीं बच्ची अस्पताल के गलियारों और परिसर में खेल रही थी। मां अपनी चिकित्सकीय देखरेख में व्यस्त थी और बच्ची अपनी ही दुनिया में मस्त थी।
ठीक इसी बेफिक्र माहौल का फायदा उठाने की नीयत से एक अनजान महिला वहां प्रकट हुई। उस संदिग्ध महिला ने बड़ी ही चालाकी से बच्ची को अपने विश्वास में लिया और उसे दुलारने का नाटक करते हुए अस्पताल के मुख्य गेट की तरफ ले जाने लगी। बच्ची नासमझ थी, उसे क्या पता था कि जिस हाथ को वह थामे हुए है, वह उसे अपनों से कोसों दूर ले जाने की साजिश का हिस्सा है। महिला तेजी से कदमों से गेट की ओर बढ़ रही थी, ताकि वह अस्पताल की चारदीवारी से बाहर निकल सके।
सुरक्षा गार्ड रामकृष्ण यादव की देवदूत जैसी एंट्री
किस्मत को शायद कुछ और ही मंजूर था या यूं कहें कि उस गार्ड की ड्यूटी के प्रति निष्ठा ने एक बड़े अपराध को होने से पहले ही रोक लिया। अस्पताल के मुख्य गेट पर तैनात सुरक्षा गार्ड रामकृष्ण यादव अपनी सामान्य चौकसी पर थे। उनकी नजर अचानक उस महिला और उसके साथ जा रही चार साल की बच्ची पर पड़ी। अनुभव और सहज प्रवृत्ति ने गार्ड को चेताया कि कुछ तो असामान्य है।
गार्ड रामकृष्ण यादव ने बिना एक पल गंवाए तेजी से आगे बढ़कर महिला को रोक लिया और उससे कड़े शब्दों में पूछा कि वह बच्ची को लेकर कहां जा रही है और बच्ची से उसका क्या रिश्ता है। गार्ड के इस अचानक सवाल से महिला घबरा गई। वह कोई भी संतोषजनक जवाब नहीं दे पाई और उसके हाव-भाव पूरी तरह से बदल गए। उसके पास न तो कोई ऐसा तर्क था जिससे यह साबित हो सके कि वह बच्ची की मां या परिजन है, और न ही उसके पास स्थिति को संभालने के लिए कोई बहाना बचा था।
महिला कर्मचारियों का मिला साथ, दबोची गई संदिग्ध
जब गार्ड ने महिला से सख्ती बरती और उसे जाने से रोका, तो उसने जबरन वहां से निकलने की असफल कोशिश की। महिला की हड़बड़ाहट देखकर आसपास मौजूद अस्पताल की अन्य महिला कर्मचारी भी तुरंत सतर्क हो गईं और दौड़कर मौके पर पहुंच गईं। गार्ड और महिला स्टाफ ने मिलकर सूझबूझ का परिचय दिया और संदिग्ध महिला को घेरकर पकड़ लिया।
अस्पताल परिसर में यह सब इतनी तेजी से हुआ कि वहां मौजूद अन्य लोगों को समझने में थोड़ा वक्त लगा। जब लोगों को यह अहसास हुआ कि एक महिला अस्पताल से चार साल की बच्ची का अपहरण करने की कोशिश कर रही थी, तो वहां हड़कंप मच गया। लोग गुस्से में भर गए और तुरंत अस्पताल प्रशासन को इसकी सूचना दी गई।
पुलिस की एंट्री और हैरान करने वाले खुलासे
मामले की गंभीरता को भांपते हुए अस्पताल प्रबंधन ने तुरंत आपातकालीन नंबर 112 डायल कर पुलिस को मौके पर बुला लिया। कुछ ही मिनटों के भीतर अलीनगर थाने की पुलिस टीम अस्पताल पहुंच गई। पुलिस ने तुरंत हरकत में आते हुए संदिग्ध महिला को अपनी हिरासत में ले लिया और उसे थाने लेकर रवाना हो गई।
जब पुलिस ने थाने ले जाकर महिला की तलाशी ली और उससे पूछताछ शुरू की, तो कई चौंकाने वाली बातें सामने आईं। शुरुआती जांच में पुलिस को महिला के पास से तीन अलग-अलग बैंकों की पासबुक बरामद हुई हैं। इन पासबुकों का होना और महिला का इस तरह अस्पताल से बच्चा उठाकर ले जाने की फिराक में होना इस बात की ओर इशारा करता है कि मामला सिर्फ एक साधारण लापरवाही का नहीं है, बल्कि इसके पीछे किसी बड़े संगठित गिरोह या सुनियोजित साजिश का हाथ हो सकता है। पुलिस अब इन सभी बिंदुओं पर बारीकी से तफ्तीश कर रही है।
अधिकारियों के बयान और प्रशासनिक प्रतिक्रिया
घटना के संबंध में अस्पताल के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ. एसके चतुर्वेदी ने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया, "महिला बच्ची को लेकर अस्पताल परिसर से बाहर निकलने की कोशिश कर रही थी। हमारे सुरक्षा गार्ड रामकृष्ण यादव की चौकसी और सतर्कता की वजह से समय रहते उसे रोक लिया गया। हमने तुरंत पुलिस को सूचित किया और बच्ची को सुरक्षित उसकी मां के सुपुर्द कर दिया गया है।"
वहीं, कोतवाली प्रभारी अर्जुन सिंह ने बताया कि पकड़ी गई महिला से पुलिस कस्टडी में गहन पूछताछ की जा रही है। उसके पास से मिली बैंक पासबुकों और उसके पिछले आपराधिक रिकॉर्ड की भी जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या इस महिला के साथ और भी लोग इस अपराध में शामिल थे या वह अकेले ही इस वारदात को अंजाम देने आई थी।
एक छोटी सी चूक बन सकती है बड़ा नासूर: सबक
यह पूरी घटना हमारे समाज के लिए एक गंभीर चेतावनी और आंखें खोलने वाला आईना है। भीड़भाड़ वाले इलाके, अस्पताल, रेलवे स्टेशन और बाजार जैसी जगहों पर अपराधी हमेशा ऐसे ही मौकों की तलाश में रहते हैं जहां लोग अपने निजी कामों या परेशानियों में उलझे हों। अस्पताल में भर्ती मां अपनी बीमारी या प्रसव के दर्द में थी, और उसका पूरा ध्यान अपनी सेहत पर था। ऐसे में असामाजिक तत्वों ने इस कमजोरी का फायदा उठाने की कोशिश की।
माता-पिता और अभिभावकों के लिए जरूरी सावधानियां:
- बच्चों को अकेला न छोड़ें: अस्पताल या सार्वजनिक स्थानों पर कभी भी छोटे बच्चों को अपनी नजरों से दूर न होने दें।
- अपरिचितों से सतर्क रहें: बच्चों को कभी भी किसी अनजान व्यक्ति के पास न छोड़ें, चाहे वह कितना भी भरोसेमंद क्यों न लगे।
- सामूहिक निगरानी रखें: यदि आप परिवार के साथ किसी सार्वजनिक जगह पर हैं, तो बच्चों की जिम्मेदारी बारी-बारी से संभालें।
- तुरंत सूचना दें: यदि कोई संदिग्ध व्यक्ति आपके बच्चे के आसपास मंडराता दिखे, तो तुरंत सुरक्षाकर्मियों या पुलिस को सूचित करें।
इस पूरी घटना का सबसे सकारात्मक पहलू यह रहा कि सुरक्षा गार्ड रामकृष्ण यादव की तत्परता और सूझबूझ ने एक परिवार को उजड़ने से बचा लिया। अगर थोड़ी सी भी देर हो जाती या गार्ड की नजर उस पर न पड़ती, तो शायद वह बच्ची आज अपने परिवार से हमेशा के लिए बिछड़ जाती। यह घटना हमें यह सिखाती है कि सतर्कता केवल पुलिस या प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि हम सभी को अपने आसपास की सुरक्षा को लेकर जागरूक रहना होगा।