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5 August Traffic Light Day: सड़कों की 'लाल-हरी-पीली' बत्ती का वो इतिहास, जो आप नहीं जानते होंगे

5 August Traffic Light Day: सड़कों की 'लाल-हरी-पीली' बत्ती का वो इतिहास, जो आप नहीं जानते होंगे

क्या आपने कभी सोचा है कि अगर हमारी व्यस्त सड़कों पर चौराहों पर लाल, पीली और हरी बत्ती न जले, तो क्या होगा? शायद चंद मिनटों में ही शहरों की रफ्तार थम जाएगी और हादसों का दौर शुरू हो जाएगा। आज हम जिस ट्रैफिक सिग्नल को रोज देखते हैं, उसका इतिहास बेहद दिलचस्प है। हर साल 5 अगस्त को दुनिया भर में 'ट्रैफिक लाइट दिवस' (Traffic Light Day) मनाया जाता है।

अमेरिका के क्लीवलैंड से हुई थी शुरुआत

आज से 110 साल पहले, यानी 5 अगस्त 1914 को अमेरिका के ओहायो राज्य स्थित क्लीवलैंड (Cleveland) शहर में दुनिया का पहला इलेक्ट्रिक ट्रैफिक सिग्नल लगाया गया था। यह ऐतिहासिक सिग्नल यूक्लिड एवेन्यू और ईस्ट 105th स्ट्रीट के कोने पर स्थापित किया गया था। इसे 'अमेरिकन ट्रैफिक सिग्नल कंपनी' ने तैयार किया था।

इस पहले इलेक्ट्रिक सिग्नल को जेम्स हॉग (James Hoge) के डिजाइनों के आधार पर बनाया गया था। खास बात यह थी कि जब लाइट बदलती थी, तो पुलिस अधिकारियों और ड्राइवरों को सचेत करने के लिए इसमें एक बीप या बजर की आवाज भी होती थी।

शुरुआत में सिर्फ दो रंग थे: लाल और हरा

जब पहली बार ट्रैफिक लाइट की शुरुआत हुई, तो इसमें आज की तरह तीन रंग नहीं थे। शुरुआती सिग्नलों में केवल दो ही रंगों का इस्तेमाल किया जाता था:

  • लाल रंग (Red): वाहनों को तुरंत रोकने के लिए।
  • हरा रंग (Green): आगे बढ़ने के संकेत के लिए।

जैसे-जैसे सड़कों पर गाड़ियों की रफ्तार और संख्या बढ़ी, हादसों को रोकने के लिए ड्राइवरों को संभलने का वक्त देना जरूरी हो गया। इसी जरूरत को देखते हुए बाद के सालों में 'पीला रंग' (Yellow Light) जोड़ा गया, जो चालकों को गाड़ी धीमी करने और रुकने की तैयारी का संकेत देता है।

लाल, पीले और हरे रंग का ही चयन क्यों हुआ?

ट्रैफिक लाइट्स में रंगों का चुनाव यूं ही नहीं किया गया, इसके पीछे वैज्ञानिक और मनोवैज्ञानिक कारण हैं:

  • लाल रंग: लाल रंग का वेवलेंथ (Wavelength) सबसे ज्यादा होता है। यह धुंध या दूर से भी बहुत स्पष्ट दिखाई देता है, इसलिए इसे खतरे और रुकने का प्रतीक बनाया गया।
  • पीला रंग: यह रंग आंखों को तुरंत आकर्षित करता है। इसका इस्तेमाल सतर्कता और 'रुकने की तैयारी' दर्शाने के लिए किया गया।
  • हरा रंग: हरा रंग आंखों के लिए सुकून देने वाला और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है, इसलिए इसे 'आगे बढ़ें' का सिग्नल बनाया गया।

स्मार्ट सिग्नल के दौर में सड़क सुरक्षा का संदेश

"ट्रैफिक सिग्नल केवल चौराहे पर लगी बत्तियां नहीं हैं, यह सड़क पर आपकी और आपके परिवार की सुरक्षा की गारंटी हैं।"

आज के डिजिटल युग में AI आधारित स्मार्ट ट्रैफिक सिग्नल्स आ चुके हैं, जो सड़कों पर गाड़ियों के दबाव को देखकर खुद ही टाइमिंग एडजस्ट कर लेते हैं। फिर भी, सबसे बड़ा नियम मनुष्य का अपना नागरिक बोध है। ट्रैफिक लाइट दिवस हमें याद दिलाता है कि लाल बत्ती पर रुकना और नियमों का पालन करना किसी मजबूरी में नहीं, बल्कि अपनी और दूसरों की जान बचाने के लिए बेहद जरूरी है।

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नसीम अहमद

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नसीम अहमद जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती हैं। उन...

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