मुंबई के ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में बीते दिनों हुए एक अनोखे राजनीतिक प्रदर्शन ने महाराष्ट्र की राजनीति में अचानक गर्माहट ला दी है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के बैनर तले मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर हुए इस प्रदर्शन के आयोजक अभिजीत दीपके अब अपने बयानों को लेकर एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। कभी महाराष्ट्र पुलिस की कार्यप्रणाली की तारीफ में कसीदे पढ़ने वाले दीपके ने अब अचानक अपना रुख बदलते हुए पुलिस पर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे राजनीतिक गलियारों में सुगबुगाहट तेज हो गई है।
शिवाजी पार्क का वो प्रदर्शन और पुलिस की सख्त कार्रवाई
घटनाक्रम की शुरुआत 2 अक्टूबर को होती है, जब मुंबई के प्रसिद्ध शिवाजी पार्क मैदान में कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने डेरा डाला। इस प्रदर्शन का मुख्य एजेंडा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करना था। साथ ही, संगठन ने देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार की नीतियों पर भी खुलकर निशाना साधा था। इस हाई-प्रोफाइल विरोध प्रदर्शन में कई नामचीन हस्तियों और कलाकारों के शामिल होने की भी चर्चा रही, जिससे यह मामला तेजी से राष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में आ गया।
हालांकि, इस प्रदर्शन के पीछे एक बड़ा कानूनी पेंच यह था कि इसे आयोजित करने के लिए मुंबई पुलिस से कोई आधिकारिक अनुमति नहीं ली गई थी। बिना प्रशासनिक अनुमति के महानगर के बीचों-बीच इस तरह की बड़ी भीड़ जुटाने को पुलिस प्रशासन ने गंभीरता से लिया। नतीजतन, मुंबई पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके और 400 से 500 अज्ञात लोगों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज कर ली। पुलिस के अनुसार, यह मामला गैरकानूनी तरीके से भीड़ इकट्ठा करने और वैध प्रशासनिक आदेशों की सरेआम अवहेलना करने का है।
तारीफ से नाराजगी तक का सफर: सोशल मीडिया पर छलका दर्द
कानूनी शिकंजा कसने के ठीक बाद अभिजीत दीपके के रुख में आया बदलाव बेहद चौंकाने वाला है। प्रदर्शन के दौरान मीडिया और समर्थकों के सामने महाराष्ट्र पुलिस की व्यवस्था और उनके कामकाज की खुलकर तारीफ करने वाले दीपके ने अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) का सहारा लिया है। अपने इस नए पोस्ट में उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया है कि अब उनका नजरिया बदल चुका है।
दीपके ने अपने सोशल मीडिया हैंडल पर लिखा कि उन्हें अब यह अहसास हो गया है कि महाराष्ट्र पुलिस भी उतनी 'परफेक्ट' नहीं है, जितना उन्होंने पहले समझा था। इस एक लाइन के पोस्ट ने राजनीतिक विश्लेषकों को हैरान कर दिया है क्योंकि कुछ ही दिन पहले वह इसी पुलिस तंत्र को देश की बेहतरीन पुलिस बता रहे थे। हालांकि, अपने इस पोस्ट में उन्होंने इस बात का खुलासा नहीं किया है कि आखिर उनके मन में यह बदलाव क्यों आया और पुलिस की किस बात ने उन्हें आहत किया है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में हो सकते हैं बड़े खुलासे
महाराष्ट्र पुलिस पर अचानक निशाना साधने के बाद अभिजीत दीपके ने यह भी घोषणा की है कि वह जल्द ही मीडिया के सामने आकर अपनी बात रखेंगे। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से जानकारी दी है कि वह दोपहर 12 बजे अपने घर से एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करेंगे। माना जा रहा है कि इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में वह पुलिस कार्रवाई, स्थानीय वकीलों और नागरिकों की शिकायतों तथा एफआईआर से जुड़े कई गंभीर मुद्दों पर खुलकर बोल सकते हैं।
स्थानीय स्तर पर भी इस प्रदर्शन के बाद कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। एक स्थानीय वकील और कुछ नागरिकों द्वारा इस अवैध आयोजन के खिलाफ कड़ी आपत्ति दर्ज कराई गई थी, जिसके बाद से पुलिस पर भी दबाव था कि वह कानून सम्मत कार्रवाई करे।
विवादों के केंद्र में क्यों है कॉकरोच जनता पार्टी का यह एजेंडा?
CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) का यह पूरा विरोध प्रदर्शन सिर्फ एक पद से इस्तीफे तक सीमित नहीं था, बल्कि इसके पीछे चुनावी प्रक्रियाओं और मतदाता सूचियों पर भी गहरे सवाल उठाए गए हैं। संगठन ने 'SIR' यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision) की प्रक्रिया पर अपनी आपत्ति जताई है और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में कथित गड़बड़ियों के आरोप लगाए हैं।
इस प्रदर्शन में बॉलीवुड और कला जगत से जुड़े कुछ चर्चित नाम, जैसे नसीरुद्दीन शाह, शबाना आजमी और संगीतकार विशाल ददलानी जैसे सार्वजनिक हस्तियों के शामिल होने की चर्चा ने इस आयोजन को और अधिक सनसनीखेज बना दिया। हालांकि, पुलिस की ओर से की गई एफआईआर और उसके बाद आयोजकों के रुख में आ रहे बदलाव से यह साफ हो गया है कि यह मामला अभी और तूल पकड़ने वाला है।
आगे क्या हो सकता है?
जैसे-जैसे मामले की जांच आगे बढ़ रही है, मुंबई पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच का यह टकराव कानूनी और राजनीतिक दोनों मोर्चों पर गहराता जा रहा है। एक तरफ जहां पुलिस बिना अनुमति के भीड़ जुटाने के अपने नियमों पर कायम है, वहीं अभिजीत दीपके और उनका संगठन इसे दमनकारी नीति करार देने की कोशिश कर रहा है। आने वाले घंटों में होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि दीपके की नाराजगी की असल वजह क्या है और क्या यह विवाद आने वाले दिनों में किसी बड़े राजनीतिक आंदोलन का रूप लेगा।