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भारत-स्विट्जरलैंड की ऐतिहासिक डील: 10 लाख नौकरियां और 100 अरब डॉलर के निवेश का ब्लूप्रिंट तैयार

भारत-स्विट्जरलैंड की ऐतिहासिक डील: 10 लाख नौकरियां और 100 अरब डॉलर के निवेश का ब्लूप्रिंट तैयार

वैश्विक कूटनीति और आर्थिक गलियारों में सोमवार का दिन भारत और स्विट्जरलैंड के संबंधों के लिहाज से एक नया मील का पत्थर साबित हुआ है। राजधानी नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्विस राष्ट्रपति गाय पारमेलिन के बीच हुई उच्चस्तरीय द्विपक्षीय बातचीत के बाद दोनों देशों ने कई अहम समझौतों पर मुहर लगा दी है। इस मुलाकात के बाद जिस सबसे बड़े आर्थिक लक्ष्य का ऐलान किया गया है, उसने देश के युवाओं और उद्योग जगत में एक नई उम्मीद जगा दी है। आने वाले वर्षों में भारत और स्विट्जरलैंड की साझेदारी से न केवल व्यापारिक रिश्तों को मजबूती मिलेगी, बल्कि रोजगार के बंपर अवसर भी पैदा होंगे।

ऐतिहासिक माइग्रेशन और मोबिलिटी समझौते पर हस्ताक्षर

सोमवार को हुई इस अहम बैठक के दौरान दोनों देशों के शीर्ष नेताओं ने 'माइग्रेशन और मोबिलिटी पार्टनरशिप समझौते' (Migration and Mobility Partnership Agreement) पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किए। यह समझौता दोनों देशों के बीच पेशेवर लोगों, छात्रों और कुशल कामगारों के आने-जाने को बेहद सुगम बनाएगा। स्विस राष्ट्रपति गाय पारमेलिन इन दिनों भारत की तीन दिवसीय आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस साल यह उनकी दूसरी भारत यात्रा है, जो दोनों देशों के बीच प्रगाढ़ होते कूटनीतिक और रणनीतिक संबंधों को साफ तौर पर दर्शाती है। इससे पहले वह इसी साल फरवरी के महीने में भारत में आयोजित एआई (AI) इंपैक्ट समिट में शामिल होने आए थे।

मोबिलिटी और माइग्रेशन समझौते के अलावा दोनों पक्षों के बीच कुल पांच महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए। इनमें 'यंग प्रोफेशनल्स एक्सचेंज स्कीम' (Young Professionals Exchange Scheme) भी शामिल है, जिससे दोनों देशों के युवा पेशेवरों को एक-दूसरे के यहां काम करने और सीखने का शानदार मौका मिलेगा। इसके अलावा, परिवहन तकनीक (Transportation Technology), मोबिलिटी सिस्टम और इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट के क्षेत्र में आपसी सहयोग को बढ़ाने के लिए भी एक बड़ी डील को अंतिम रूप दिया गया है।

15 सालों में 100 अरब डॉलर का निवेश और 10 लाख नई नौकरियां

इस मुलाकात का सबसे बड़ा आकर्षण वह बड़ा आर्थिक विजन रहा, जिसकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की। स्विट्जरलैंड यूरोप में भारत के सबसे भरोसेमंद और बड़े आर्थिक साझीदारों में शुमार है। वर्तमान में भी 330 से ज्यादा स्विस कंपनियां भारत के अलग-अलग सेक्टर्स जैसे कि इंजीनियरिंग, सर्विसेज, प्रिसिजन इंस्ट्रूमेंट्स, केमिकल्स और फार्मास्यूटिकल्स में मजबूती से काम कर रही हैं। इसके विपरीत, कई भारतीय दिग्गज कंपनियां भी आईटी, फार्मास्यूटिकल्स और मशीनरी के क्षेत्रों में स्विट्जरलैंड में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा चुकी हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने इस साझेदारी को रेखांकित करते हुए कहा कि TEPA (ट्रेड एंड इकोनॉमिक पार्टनरशिप एग्रीमेंट) निवेश, इनोवेशन, रोजगार और साझा खुशहाली के लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी ब्लूप्रिंट है। प्रधानमंत्री ने विश्वास जताया कि, "इसके जरिए हम अगले 15 सालों में भारत में 100 बिलियन डॉलर (100 अरब डॉलर) के निवेश और दस लाख डायरेक्ट नौकरियों के अपने लक्ष्य को पूरी तरह से पूरा करेंगे।" यह घोषणा भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बहुत बड़ा बूस्टर डोज मानी जा रही है।

वैश्विक मुद्दों पर भी बनी सहमति

सिर्फ आर्थिक और कारोबारी मुद्दों तक ही यह बैठक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें वैश्विक शांति और वर्तमान भू-राजनीतिक हालात पर भी विस्तार से चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी और स्विस राष्ट्रपति के बीच यूक्रेन विवाद और पश्चिम एशिया (Middle East) के सुलगते हालातों पर भी गंभीर मंथन हुआ। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में इस बात पर जोर दिया कि भारत और स्विट्जरलैंड दोनों ही वैश्विक शांति स्थापना के लिए की जाने वाली सभी सही और सकारात्मक कोशिशों का पूरी मजबूती से समर्थन करते हैं।

इसके अलावा, स्विस बाजार तक भारतीय उत्पादों और एक्सपोर्ट की पहुंच को और अधिक आसान बनाने तथा दोनों देशों के बीच क्रॉस-बॉर्डर इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देने के लिए कई खास और व्यावहारिक फैसले लिए गए हैं। न्यूक्लियर एनर्जी (परमाणु ऊर्जा) और डिफेंस (रक्षा क्षेत्र) के मोर्चे पर भी दोनों देशों ने आपसी सहयोग को और अधिक गहरा तथा व्यापक बनाने की प्रतिबद्धता दोहराई है।

इनोवेशन और एडवांस टेक्नोलॉजी बनेगी नई ताकत

विश्लेषकों का मानना है कि भारत और स्विट्जरलैंड का यह नया गठबंधन महज दो देशों के बीच का व्यापारिक समझौता भर नहीं है, बल्कि यह भविष्य की तकनीकों का एक संगम है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में इनोवेशन, इंफ्रास्ट्रक्चर और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी को भारत-स्विट्जरलैंड पार्टनरशिप का सबसे मजबूत आधार स्तंभ करार दिया। उन्होंने कहा कि दोनों देश अब अपने इस पारंपरिक जुड़ाव को एक नई और तेज रफ्तार देने जा रहे हैं, जिसका सीधा फायदा दोनों देशों के नागरिकों को मिलेगा।

स्विस राष्ट्रपति की यह यात्रा और उस दौरान हुए ये पांचों समझौते इस बात की गवाही देते हैं कि आने वाले समय में भारत वैश्विक निवेश का एक सबसे बड़ा और पसंदीदा केंद्र बनने की ओर तेजी से अग्रसर है। 10 लाख नई नौकरियों और 100 अरब डॉलर के भारी-भरकम निवेश का यह लक्ष्य न केवल भारत के औद्योगिक परिदृश्य को बदलेगा, बल्कि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को एक बिल्कुल नए शिखर पर ले जाएगा।

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अनुराधा दुबे

अनुराधा दुबे

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अनुराधा दुबे एक समर्पित और अनुभवी कंटेंट राइटर हैं, जो भारत से जुड़ी राजनीतिक, सामाजिक और नीतिगत खबरों को गहराई से समझकर पाठकों तक पहुंचाती हैं। उन...

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