क्रिकेट के मैदान पर हार और जीत का सिलसिला तो चलता रहता है, लेकिन कई बार हारने वाली टीम भी दिल जीतने के साथ-साथ पैसों के मामले में बड़ा फायदा उठा ले जाती है। कुछ ऐसा ही हालिया भारत और अफगानिस्तान के बीच खेली गई रोमांचक टी20 सीरीज में देखने को मिला। मेहमान अफगानिस्तान की टीम भले ही इस हाई-वोल्टेज सीरीज को अपने नाम करने में नाकाम रही, लेकिन मैदान पर उनके जुझारू प्रदर्शन और आईसीसी के नियमों के चलते उन्हें जो वित्तीय लाभ हुआ है, उसने सभी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
मैदान पर संघर्ष, लेकिन आर्थिक मोर्चे पर बड़ी सफलता
रोहित शर्मा और विराट कोहली जैसे दिग्गजों की वापसी से सजी टीम इंडिया के खिलाफ खेलना किसी भी युवा या उभरती हुई टीम के लिए लोहे के चने चबाने जैसा होता है। अफगानिस्तान ने इस सीरीज में शुरुआती मुकाबलों में कुछ गलतियां जरूर कीं, लेकिन उनके खिलाड़ियों ने आखिरी मैच तक हार नहीं मानी। सुपर ओवर तक खिंचे मुकाबलों ने यह साबित कर दिया कि अब अफगानिस्तान की गिनती दुनिया की कमजोर टीमों में नहीं होती।
इसी फाइटिंग स्पिरिट का इनाम उन्हें केवल वाहवाही के रूप में नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये की भारी-भरकम राशि के रूप में मिला है। वैश्विक स्तर पर एसोसिएट से लेकर फुल-मेम्बर बनी टीमों के लिए वित्तीय मजबूती बेहद जरूरी है, और इस सीरीज से मिला यह धन उनके क्रिकेट बोर्ड के लिए संजीवनी का काम करेगा।
कितनी मिली प्राइज मनी? आंकड़ों पर एक नजर
बीसीसीआई और मेहमान बोर्ड के बीच तय हुए कमर्शियल समझौतों और ब्रॉडकास्टिंग रेवेन्यू शेयरिंग के तहत, सीरीज हारने के बावजूद अफगानिस्तान क्रिकेट बोर्ड के खजाने में करोड़ों रुपये आए हैं। हालांकि द्विपक्षीय सीरीज में आमतौर पर विजेता टीम को ट्रॉफी और बड़ी प्राइज मनी मिलती है, लेकिन रनर-अप रहने वाली टीम को भी मैच फीस, स्पॉन्सरशिप शेयर और बोर्ड-टू-बोर्ड रेवेन्यू एग्रीमेंट का बड़ा हिस्सा मिलता है।
- मैच फीस और प्रदर्शन बोनस: सीरीज के हर मुकाबले के लिए खिलाड़ियों को तय मैच फीस मिली।
- ब्रॉडकास्टिंग राइट्स का हिस्सा: भारत में हुए इन मैचों के प्रसारण अधिकारों से मिलने वाले राजस्व का एक हिस्सा मेहमान बोर्ड को भी ट्रांसफर किया गया।
- गेట్ मनी और स्पॉन्सरशिप: स्टेडियम में उमड़ी भीड़ और विज्ञापनों से होने वाली कमाई का अनुपात भी टीमों में साझा हुआ।
इन तमाम स्रोतों को मिलाकर कुल राशि भारतीय रुपयों में कई करोड़ रुपये बैठती है, जिससे अफगानिस्तान में घरेलू क्रिकेट ढांचे को मजबूत करने में मदद मिलेगी।
युवा खिलाड़ियों के लिए खुला कमाई और शोहरत का रास्ता
इस सीरीज में अफगानिस्तान के कई युवा खिलाड़ियों ने अपने प्रदर्शन से दुनिया भर के क्रिकेट प्रेमियों को अपना मुरीद बना लिया। इब्राहिम जादरान, गुलबदीन नैब और मुजीब उर रहमान जैसे खिलाड़ियों के खेल ने आईपीएल (IPL) और अन्य ग्लोबल टी20 लीग्स की फ्रेंचाइजी का ध्यान भी खींचा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सीरीज हारने के बाद भले ही ट्रॉफी भारत के पास गई हो, लेकिन व्यक्तिगत स्तर पर अफगान खिलाड़ियों की ब्रांड वैल्यू में जबरदस्त इजाफा हुआ है। भविष्य में इन खिलाड़ियों को दुनिया भर की लीगों में महंगे अनुबंध (Contracts) मिलेंगे, जिससे अंततः उनके देश के क्रिकेट का स्तर और ऊँचा उठेगा।
अफगानिस्तान क्रिकेट के लिए मील का पत्थर
युद्ध और राजनीतिक उथल-पुथल से जूझ रहे देश से आने वाली इस क्रिकेट टीम की कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं है। बुनियादी सुविधाओं की कमी के बावजूद, ये खिलाड़ी जिस जज्बे के साथ मैदान पर उतरते हैं, वह दुनियाभर के युवाओं के लिए मिसाल है। भारत जैसी मजबूत टीम के खिलाफ उसके घर में जाकर कड़ी टक्कर देना और उसके बाद वित्तीय रूप से मजबूत होकर लौटना, अफगान क्रिकेट के स्वर्णिम भविष्य की ओर इशारा करता है।
आने वाले समय में जब अफगानिस्तान की टीम टी20 विश्व कप या अन्य ICC टूर्नामेंट्स में उतरेगी, तो उनके पास बेहतर ट्रेनिंग फैसिलिटी और कोच रखने के लिए पर्याप्त बजट होगा। इस लिहाज से देखा जाए तो यह सीरीज उनके लिए सिर्फ एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि आर्थिक स्थिरता का एक बड़ा जरिया साबित हुई है।
निष्कर्ष
क्रिकेट में जीत-हार अपनी जगह है, लेकिन खेल के जरिए वित्तीय स्वावलंबन हासिल करना आधुनिक युग की सबसे बड़ी जरूरत है। भारत के खिलाफ इस रोमांचक सीरीज ने अफगानिस्तान को खेल के मैदान पर भले ही निराशा दी हो, लेकिन बैंक बैलेंस और भविष्य की संभावनाओं के मामले में वे इस दौरे से मालामाल होकर लौटे हैं।