सुरक्षा एजेंसियों और जेल प्रशासन की नींद उड़ा देने वाली एक बड़ी खबर सामने आ रही है। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता स्थित हाई-सिक्योरिटी प्रेसिडेंसी करेक्शनल होम (प्रेसिडेंसी जेल) में बंद कुख्यात आतंकी अफताब अंसारी के सेल से तलाशी अभियान के दौरान एक स्मार्टफोन, वाई-फाई राउटर और हजारों रुपये की नकदी बरामद की गई है। इस सनसनीखेज खुलासे के बाद से सुरक्षा महकमे में हड़कंप मच गया है और जेल के अंदर की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
छापेमारी के दौरान हुआ बड़ा खुलासा
प्राप्त जानकारी के अनुसार, खुफिया एजेंसियों से मिले इनपुट के आधार पर प्रेसिडेंसी जेल के अंदर एक औचक निरीक्षण और तलाशी अभियान चलाया गया था। इस दौरान सुरक्षा बलों ने जब कुख्यात आतंकी अफताब अंसारी के वार्ड और उसके आसपास के परिसरों की सघन तलाशी ली, तो उनके होश उड़ गए। अंसारी के पास से एक आधुनिक स्मार्टफोन, इंटरनेट चलाने के लिए एक वाई-फाई डिवाइस और लगभग 31 हजार रुपये नकद बरामद किए गए।
एक जेल के भीतर, जहां परिंदा भी पर नहीं मार सकता और जहां बाहरी दुनिया से संपर्क पूरी तरह प्रतिबंधित होता है, वहां एक खूंखार आतंकी के पास इस तरह के हाई-टेक गैजेट्स का पहुंच जाना सुरक्षा तंत्र में एक बड़ी सेंध को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।
कौन है अफताब अंसारी?
अफताब अंसारी वही नाम है जिसने साल 2002 में कोलकाता स्थित अमेरिकी अमेरिकी सूचना केंद्र (American Center) पर हुए घातक आतंकी हमले को अंजाम दिया था। इस नृशंस हमले में कई पुलिसकर्मी और सुरक्षा गार्ड शहीद हो गए थे। इस मामले में अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद से ही अफताब अंसारी को कड़े पहरे के बीच प्रेसिडेंसी जेल की सेल में रखा गया है।
कानून के जानकारों और सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के हाई-प्रोफाइल आतंकवादियों को जेल के अंदर विशेष निगरानी में रखा जाता है ताकि वे बाहरी दुनिया या अपने किसी सिंडिकेट के संपर्क में न आ सकें। ऐसे में उसके पास स्मार्टफोन और वाई-फाई मिलना इस बात का संकेत है कि वह जेल के अंदर से भी अपने किसी पुराने नेटवर्क को ऑपरेट करने की जुगत में था।
कैसे पहुंचा जेल के अंदर स्मार्टफोन और वाई-फाई?
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि आखिर जेल के चप्पे-चप्पे पर पहरा होने के बावजूद स्मार्टफोन और वाई-फाई डिवाइस अंदर तक कैसे पहुंचे? क्या इसमें जेल के भीतर तैनात कुछ भ्रष्ट कर्मचारियों या सुरक्षाकर्मियों की मिलीभगत थी? या फिर इन्हें किसी अन्य शातिर तरीके से तस्करी करके सेल के अंदर पहुंचाया गया था?
इन तमाम सवालों के जवाब तलाशने के लिए अब उच्च स्तर पर जांच बिठा दी गई है। राज्य प्रशासन और जेल निदेशालय इस बात की गहराई से छानबीन कर रहे हैं कि इस अवैध नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल हैं।
प्रशासन और सरकार सख्त, हो सकती है बड़ी कार्रवाई
इस घटना के सामने आने के बाद राज्य सरकार और जेल विभाग के उच्च अधिकारियों ने मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर कुछ जेल कर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जिन पर गाज गिरनी तय मानी जा रही है।
- जेल के अंदर कैदियों की सुरक्षा और गतिविधियों की होगी समीक्षा।
- संदिग्ध जेल कर्मियों और अधिकारियों से पूछताछ शुरू कर दी गई है।
- सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक चाक-चौबंद बनाने के लिए जैमर और अन्य आधुनिक उपकरणों की जांच की जा रही है।
- अफताब अंसारी के पिछले कुछ दिनों के कॉल रिकॉर्ड और डिजिटल फुटप्रिंट्स की तकनीकी जांच शुरू हो गई है।
आतंकी गतिविधियों पर नए सिरे से नजर
सुरक्षा एजेंसियों की चिंता इस बात को लेकर भी बढ़ गई है कि क्या अफताब अंसारी जेल के अंदर बैठकर किसी बड़ी साजिश को रच रहा था? स्मार्टफोन के जरिए वह किन-किन लोगों के संपर्क में था, इसकी जांच के लिए फॉरेंसिक विशेषज्ञों की मदद ली जा रही है। फोन का डेटा रिकवर किया जा रहा है ताकि उसके संपर्कों का कच्चा चिट्ठा सामने आ सके।
आगामी दिनों में इस मामले में कई और बड़े खुलासे होने की उम्मीद है। जेल प्रशासन पर यह दबाव बढ़ गया है कि वह भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाए। फिलहाल, इस सनसनीखेज वाकये ने एक बार फिर जेलों के भीतर कैदियों को मिलने वाली वीआईपी सुविधाओं और सुरक्षा में सेंधमारी के पुराने जख्मों को हरा कर दिया है।
