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आगरा में उतरा त्रेता युग: भव्य रामबरात में दूल्हे बने श्रीराम, उमड़ा जनसैलाब

आगरा में उतरा त्रेता युग: भव्य रामबरात में दूल्हे बने श्रीराम, उमड़ा जनसैलाब

“रामहि देखि बरात जुड़ानी। प्रीति कि रीति न जाति बखानी।।” गोस्वामी तुलसीदास की रामचरितमानस की ये अमर पंक्तियां मंगलवार की देर शाम उत्तर प्रदेश के ऐतिहासिक शहर आगरा में पूरी तरह जीवंत हो उठीं। मौका था साल 2026 के अत्यंत लोकप्रिय और भव्य जनकपुरी महोत्सव का, जहां रावतपाड़ा से जब दूल्हे के रूप में प्रभु श्रीराम की रामबरात ने प्रस्थान किया, तो पूरा शहर श्रद्धा, भक्ति और अद्वितीय उल्लास के महासागर में डूब गया। इस भव्य आयोजन ने एक बार फिर साबित कर दिया कि भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराएं आज भी जन-जन के मन में किस कदर रची-बसी हैं।

रावतपाड़ा में सजा अयोध्या जैसा दरबार, चारों भाइयों के अलौकिक दर्शन

मंगलवार की शाम आगरा का रावतपाड़ा क्षेत्र किसी कल्पित त्रेतायुगीन नगरी से कम नजर नहीं आ रहा था। यहां स्थित ऐतिहासिक लाला चन्नोमल की बारहद्वारी को दुल्हन की तरह सजाया गया था। इस पावन अवसर पर प्रभु श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के स्वरूपों का अत्यंत मनोहारी और भव्य श्रृंगार किया गया। जब चारों भाइयों ने आकर्षक रजत मुकुट धारण किए, तो उनके चेहरे का तेज और दिव्यता देखते ही बनती थी।

प्रस्थान से पूर्व पूरी विधि-विधान के साथ स्वरूपों का पूजन और आरती संपन्न हुई। इस अवसर पर उत्तर प्रदेश सरकार के केंद्रीय पंचायती राज राज्य मंत्री प्रो. एसपी सिंह बघेल, उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय, उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबीता चौहान और आगरा के जिलाधिकारी मनीष बंसल विशेष रूप से उपस्थित रहे। इन सभी गणमान्य अतिथियों ने आगे बढ़कर प्रभु के स्वरूपों की आरती उतारी और उनका आशीर्वाद लिया।

आरती के तुरंत बाद “नृप समीप सोहहिं सुत चारी…” के भाव के साथ चारों भाई अपने-अपने भव्य रथों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए निकले। सबसे आगे शत्रुघ्न जी का रथ चला, उसके बाद क्रमशः भरत और लक्ष्मण जी के रथ आगे बढ़े। अंत में जिस परम आकर्षण और घड़ी की शहरवासियों को सालभर से प्रतीक्षा रहती है, वह पल आ ही गया। जब ऐरावत हाथी की भव्यता और दिव्यता से सजे रथ पर दूल्हे के रूप में प्रभु श्रीराम के दर्शन हुए, तो वहां मौजूद हज़ारों श्रद्धालुओं की आंखें उनके मनोहारी स्वरूप पर ठहर गईं।

“सियावर रामचंद्र की जय” के जयकारों से गूंजे आगरा के बाजार

रघुवर के रथ के आगे बढ़ते ही आगरा के प्रमुख बाजारों और गलियों में आस्था का ऐसा ज्वार उठा जिसे शब्दों में बयां करना कठिन है। रावतपाड़ा, सुभाष बाजार, दरेसी, छत्ता बाजार, कचहरी घाट, बेलनगंज, पटवारी और घटिया समेत रामबरात के पूरे पारंपरिक मार्ग पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। सड़कों पर ज़रा भी जगह नहीं बची थी—इतनी भी नहीं कि तिल का एक दाना रखा जा सके।

रास्ते में पड़ने वाली हर दुकान और हर घर के बाहर लोगों ने कतारबद्ध होकर प्रभु श्रीराम की आरती उतारी। मकानों की छतों से महिलाओं और बच्चों ने फूलों की ऐसी वर्षा की मानो आकाश से देवता स्वयं पुष्पवृष्टि कर रहे हों। गलियों और चौराहों पर लगातार “जय श्रीराम” और “जय सियाराम” के गगनभेदी नारे गूंजते रहे। बच्चे उत्साह से सराबोर होकर रथ के साथ-साथ दौड़ते नजर आए, तो वहीं बुजुर्ग और महिलाएं हाथ जोड़े नम आंखों से प्रभु के इस अलौकिक रूप को अपने भीतर आत्मसात करने का प्रयास कर रहे थे।

जनकपुरी में भी छाया भक्ति का उल्लास, मां गौरा के पूजन को निकलीं माता जानकी

एक तरफ जहां रामबरात शहर के मुख्य मार्गों से गुजर रही थी, वहीं दूसरी तरफ भावना एस्टेट स्थित जनकपुरी क्षेत्र में भी भक्ति और सांस्कृतिक उल्लास का अनूठा संगम देखने को मिल रहा था। रामबरात के जनकपुरी पहुंचने से ठीक पहले, माता जानकी अपनी सखियों के संग सुसज्जित डोले में सवार होकर मां गौरा के विधिवत पूजन के लिए नगर भ्रमण पर निकलीं।

माता जानकी के इस पावन डोले की अगवानी गणेश जी की सवारी ने की। राजा जनक और रानी सुनैना के स्वरूप आगे-आगे चलकर मार्ग में उपस्थित सभी नगरवासियों को राम-जानकी विवाह का विधिवत निमंत्रण दे रहे थे। किशोर बैंड की सुमधुर भजन धुनों, निरंतर गूंजते जय सियाराम के उद्घोष और सतरंगी पारंपरिक साड़ियों में सजी महिलाओं की टोलियों ने पूरे वातावरण को पूरी तरह से आध्यात्मिक और ऊर्जावान बना दिया।

ओंकारेश्वर मंदिर में गूंजे पारंपरिक भजन, गौरा पूजन से जीवंत हुई परंपरा

नगर भ्रमण करते हुए माता जानकी का डोला ऐतिहासिक ओंकारेश्वर मंदिर पहुंचा। यहां उन्होंने विधि-विधान के साथ मां गौरा की पूजा-अर्चना की। मंदिर परिसर में गूंजती पंक्तियां—

“जय जय गिरिराज किशोरी। जय महेस मुख चंद चकोरी।।”

इस पवित्र भावभूमि के बीच माता जानकी द्वारा किए गए मां गौरा के पूजन ने जनकपुरी महोत्सव की प्राचीन धार्मिक परंपराओं को एक बार फिर जीवंत कर दिया। इस दृश्य को देखने के लिए मंदिर और उसके आसपास भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।

बुधवार को होगा भव्य स्वागत, सजेंगे जनक मंच

जनकपुरी महोत्सव समिति से मिली जानकारी के अनुसार, बुधवार की सुबह से ही जनकपुरी में रामबरात के भव्य और ऐतिहासिक स्वागत की अंतिम तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। शाम के समय मुख्य जनक मंच पर प्रभु श्रीराम, माता जानकी और उनके सभी भाइयों के स्वरूप एक बार फिर मंच पर विराजमान होंगे, जहां उनके दर्शन के लिए भारी भीड़ उमड़ने की उम्मीद है। आगरा का यह जनकपुरी महोत्सव एक बार फिर यह साबित कर रहा है कि हमारी साझा संस्कृति और पौराणिक कथाएं आज भी कितनी जीवंत और प्रासंगिक हैं।

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निवेदिता ठाकुर

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निवेदिता ठाकुर जमीनी पत्रकारिता के मजबूत स्तंभ हैं। वे स्थानीय स्तर की उन खबरों को सामने लाते हैं, जो अक्सर बड़े प्लेटफॉर्म पर नजर अंदाज हो जाती है...

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