भारतीय वायु सेना के सामने इस समय रक्षा क्षेत्र की सबसे बड़ी और गंभीर चुनातियों में से एक खड़ी हो चुकी है। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने देश की सुरक्षा तैयारियों को लेकर एक बेहद सनसनीखेज और आंखें खोल देने वाला बयान दिया है। उनके अनुसार, भारत को अपनी लड़ाकू विमानों की घटती ताकत (स्क्वाड्रन स्ट्रेंथ) को संभाल कर रखने और दुश्मनों से निपटने के लिए हर साल कम से कम 36 से 40 नए फाइटर जेट्स की सख्त आवश्यकता है। यदि इस पर तुरंत ध्यान नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में देश की सुरक्षा व्यवस्था को भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है।
चीन और पाकिस्तान से लगातार बढ़ रही है चुनौती
वर्तमान भू-राजनीतिक हालात (Geopolitical Scenario) किसी से छिपे नहीं हैं। भारत की उत्तरी सीमा पर चीन लगातार अपनी सैन्य ताकत और बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहा है, तो वहीं पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान भी अपनी नापाक हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। इन दोनों मोर्चों पर एक साथ निपटने के लिए भारतीय वायु सेना के पास पर्याप्त संख्या में अत्याधुनिक फाइटर जेट्स का होना अनिवार्य है। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने साफ कर दिया है कि मौजूदा वक्त में जिस रफ्तार से विमान बेड़े में शामिल हो रहे हैं, वह नाकाफी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वायु सेना की ताकत का पैमाना उसकी 'स्क्वाड्रन स्ट्रेंथ' से तय होता है। वर्तमान में भारतीय वायु सेना के पास स्वीकृत संख्या से काफी कम स्क्वाड्रन बचे हैं। पुराने होते मिग और अन्य विमानों के रिटायर होने की वजह से यह खाई और गहरी होती जा रही है। ऐसे में हर साल 36 से 40 नए लड़ाकू विमानों का बेड़े में शामिल होना किसी एक विकल्प के रूप में नहीं, बल्कि एक आपातकालीन जरूरत के रूप में देखा जाना चाहिए।
घटती स्क्वाड्रन ताकत पर गहरी चिंता
भारतीय वायु सेना के बेड़े से पुराने विमानों को चरणबद्ध तरीके से बाहर किया जा रहा है। हालांकि, नए विमानों के आने की प्रक्रिया उतनी तेज नहीं है जितनी कि होनी चाहिए। इस अंतर को पाटने के लिए ही वायुसेना प्रमुख ने यह कड़ा संदेश दिया है।
- उत्पादन क्षमता में वृद्धि: देश में डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को और अधिक तेज गति देने की जरूरत है।
- आत्मनिर्भर भारत का लक्ष्य: एचएएल (HAL) जैसे घरेलू संस्थानों पर दबाव और समर्थन दोनों बढ़ाने होंगे ताकि एलसीए तेजस (LCA Tejas) जैसे विमान समय पर मिल सकें।
- विदेशी समझौतों में तेजी: वैश्विक स्तर पर रक्षा सौदों को लटकाने के बजाय उन्हें समयबद्ध तरीके से पूरा करना होगा।
मेक इन इंडिया और घरेलू रक्षा उद्योग की भूमिका
वायुसेना प्रमुख की इस चेतावनी के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि केवल विदेशीिक निर्भरता से काम नहीं चलने वाला है। भारत को अपने घरेलू रक्षा उद्योगों को युद्ध स्तर पर तैयार करना होगा। तेजस एमके-1ए (Tejas Mk-1A) और आगामी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) प्रोजेक्ट्स को तय समय सीमा के भीतर पूरा करना अब देश की सर्वोच्च प्राथमिकता बन जानी चाहिए।
यदि विमानों के निर्माण और उनकी डिलीवरी में इसी प्रकार देरी होती रही, तो वायु सेना की ऑपरेशनल क्षमता पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। आधुनिक युद्धनीति में तकनीक और संख्या दोनों का संतुलन होना बेहद जरूरी है। दुश्मन देशों के पास पांचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट्स और आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम की मौजूदगी भारत के लिए एक बड़ा अलार्म है।
देश की जनता और नीति निर्माताओं के लिए संदेश
यह चेतावनी सिर्फ वायु सेना के लिए नहीं, बल्कि देश के नीति निर्माताओं, रक्षा मंत्रालय और पूरे तंत्र के लिए एक वेक-अप कॉल है। रक्षा बजट का आवंटन और उसकी उपयोगिता अब इस प्रकार होनी चाहिए कि हर साल विमानों की कमी का रोना न रोना पड़े।
आने वाले वर्षों में भारत को एक महाशक्ति के रूप में अपनी स्थिति मजबूत रखनी है, तो आसमान पर उसका नियंत्रण सर्वोपरि होना चाहिए। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के इन शब्दों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर किसी भी तरह की सुस्ती या लापरवाही के लिए कोई गुंजाइश नहीं बची है। अब देखना यह होगा कि सरकार और रक्षा मंत्रालय इस चेतावनी पर कितनी जल्दी और कितनी प्रभावी कार्रवाई करते हैं।