अदालत के साथ धोखाधड़ी करने और कानून की आंखों में धूल झोंकने वाले आरोपियों के खिलाफ न्यायपालिका अब बेहद सख्त रुख अपना रही है। ताजा मामला उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से सामने आया है, जहां इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ऐसे आरोपी के खिलाफ गैर जमानती वारंट (NBW) जारी किया है, जिसने जेल से बाहर आने के लिए अदालत में शादी करने का वादा किया था, लेकिन रिहाई मिलते ही अपने वादे से मुकर गया। हाईकोर्ट के इस कड़े कदम से कानूनी गलियारों में हलचल मच गई है और यह मामला सोशल मीडिया से लेकर आम चर्चाओं तक में छाया हुआ है।
जमानत पाने के लिए दिया था शादी का झांसा
यह पूरा कानूनी प्रकरण मेरठ जिले के सरधना थाने से जुड़ा हुआ है। आरोपी नितीश उर्फ सिद्धार्थ उर्फ सेठी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के साथ-साथ अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (एससी/एसटी) अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज है। इस मामले में आरोपी को काफी समय तक सलाखों के पीछे रहना पड़ा था।
मामले में नया मोड़ तब आया जब आरोपी ने अपनी क्रिमिनल अपील के माध्यम से इसी वर्ष यानी 18 मार्च 2026 को अदालत से जमानत हासिल करने की कोशिश की। सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष की तरफ से न्यायालय में एक विशेष हलफनामा या अंडरटेकिंग दी गई थी। आरोपी के अधिवक्ता ने अदालत को आश्वस्त किया था कि चूंकि आरोपी और पीड़िता पहले से ही रिलेशनशिप में थे, इसलिए आरोपी जेल से बाहर आते ही पीड़िता से विवाह करने के लिए पूरी तरह तैयार है। अदालत ने इसी मानवीय और कानूनी अंडरटेकिंग को आधार बनाते हुए उसे जमानत का लाभ दे दिया था।
जेल से बाहर आते ही बदला आरोपी का तेवर
न्याय के नाम पर मिला यह मौका आरोपी के लिए केवल जेल से बाहर आने का एक हथकंडा साबित हुआ। जैसे ही नितीश उर्फ सिद्धार्थ उर्फ सेठी जेल की सलाखों से बाहर आया, उसने पीड़िता से शादी करने के अपने वादे से किनारा करना शुरू कर दिया। इस धोखे के खिलाफ पीड़िता मानसी ने न्याय की गुहार लगाते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट में जमानत निरस्तीकरण (Bail Cancellation) की अर्जी दाखिल की।
मानसी की ओर से दाखिल की गई इस अर्जी पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने बेहद सख्त तेवर दिखाए। मामले की गंभीरता को समझते हुए न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की अदालत ने इस प्रकरण की नियमित मॉनिटरिंग शुरू की।
सुनवाई के दौरान नदारद रहा आरोपी
इस मामले में पूर्व में भी कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए जा चुके थे। बीते छह अगस्त 2026 को हुई सुनवाई के दौरान अदालत ने इस मामले का संज्ञान लेते हुए विपक्षी को नोटिस जारी किया था। इसके बाद 14 सितंबर को हुई सुनवाई में आरोपी के वकील ने अदालत से कुछ समय की मांग की थी। वकील ने न्यायालय को भरोसा दिलाया था कि वह अगली तारीख पर आरोपी को अदालत के समक्ष पेश करेंगे और शादी के लिए उसकी रजामंदी सुनिश्चित करेंगे।
अदालत ने इसके बाद निर्देश दिया था कि 28 सितंबर को पीड़िता मानसी भी अपनी सहमति के साथ अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहे। निर्धारित तारीख के अनुसार पीड़िता मानसी सोमवार को अदालत में मौजूद रही और उसने न्यायाधीश के सामने एक बार फिर स्पष्ट रूप से आरोपित के साथ विवाह करने की अपनी इच्छा जताई।
लेकिन इसके विपरीत, आरोपी नितीश अदालत में हाजिर नहीं हुआ। जब अदालत ने उसके वकील से इस अनुपस्थिति का कारण पूछा, तो वकील ने बताया कि उन्हें अदालत के आदेश की पूरी जानकारी दी गई थी, इसके बावजूद आरोपी न तो कोर्ट में आया और न ही उसने अपनी गैर-हाजिरी को लेकर कोई वैध स्पष्टीकरण या कारण प्रस्तुत किया।
हाईकोर्ट की कड़ी नाराजगी, एसएसपी मेरठ को सख्त निर्देश
अदालत के आदेश की इस तरह की अवहेलना और पीड़िता के साथ किए गए धोखे को हाईकोर्ट ने बेहद गंभीरता से लिया। न्यायाधीश ने इस बात पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की कि किस प्रकार एक व्यक्ति अदालत को लिखित आश्वासन देकर जमानत प्राप्त करता है और बाद में कानून और अदालत दोनों को धोखा देता है।
न्यायालय ने बिना किसी विलंब के आरोपी नितीश उर्फ सिद्धार्थ उर्फ सेठी के खिलाफ गैर जमानती वारंट (NBW) जारी कर दिया। इसके साथ ही, अदालत ने मेरठ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP Meerut) को यह स्पष्ट और कड़ा आदेश दिया है कि वे जारी किए गए वारंट को आगामी 24 घंटे के भीतर हर हाल में तामील कराएं और आरोपी को पकड़कर अदालत के समक्ष पेश करें।
मामले की अगली सुनवाई आठ अक्टूबर को
अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए आठ अक्टूबर 2026 की तारीख मुकर्रर की है। इस हाई-प्रोफाइल और संवेदनशील मामले में अब पुलिस प्रशासन पर भी दबाव बढ़ गया है कि वह तय समय सीमा के भीतर आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश करे।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के मामलों में अदालतों का यह कड़ा रुख उन लोगों के लिए एक बड़ा सबक है जो अदालत में झूठे वादे या अंडरटेकिंग देकर जमानत हासिल तो कर लेते हैं, लेकिन बाद में अपनी जिम्मेदारियों और वादों से मुकर जाते हैं। अब सबकी निगाहें आठ अक्टूबर की तारीख पर टिकी हैं कि पुलिस इस तय समय में आरोपी को पकड़ने में कितनी कामयाब होती है।