वाराणसी। रामनगर की प्रसिद्ध रामलीला के चौथे दिन सोमवार की शाम पुष्प वाटिका का प्रसंग श्रद्धा, सौंदर्य और मर्यादित प्रेम के भावों से सराबोर रहा। जनकपुर की फुलवारी में श्रीराम और लक्ष्मण के पहुंचते ही सखियों के बीच उनके रूप को लेकर शुरू हुआ संवाद दर्शकों के आकर्षण का केंद्र बना। वहीं, श्रीराम और माता सीता के प्रथम मिलन तथा गौरी पूजन के प्रसंग ने लीला को भक्ति और श्रृंगार के अनूठे संगम में बदल दिया।
रामनगर की रामलीला में पात्रों के अभिनय के साथ आसपास का वातावरण भी कथा का हिस्सा बन जाता है। पुष्प वाटिका की लीला में भी ऐसा ही दृश्य दिखाई दिया। फूलों से सजी फुलवारी में गुरु की आज्ञा से पहुंचे श्रीराम और लक्ष्मण को देखकर जनकपुर की युवतियां उनके व्यक्तित्व और सौंदर्य से प्रभावित नजर आईं।
अष्ट सखी संवाद बना आकर्षण
लीला में अष्ट सखी संवाद के दौरान जनकपुर की सखियों ने राम और लक्ष्मण के रूप की अलग-अलग ढंग से प्रशंसा की। उनके संवादों में दोनों राजकुमारों को लेकर जिज्ञासा के साथ सीता के भावी वर की कल्पना भी दिखाई दी।
इसी दौरान सखियों की ओर से कही गई पंक्ति—“सिया सोने की अंगूठी, राम सांवरो नगीना हैं”—ने दर्शकों का विशेष ध्यान खींचा। संवाद के माध्यम से जनकपुर में राम और लक्ष्मण के आगमन से उत्पन्न उल्लास को प्रस्तुत किया गया।
पुष्प वाटिका में आमने-सामने आए राम और सीता
इसके बाद रामलीला का बहुप्रतीक्षित पुष्प वाटिका प्रसंग सामने आया। फूल चुनने पहुंचीं माता सीता की दृष्टि जब श्रीराम पर पड़ी तो दोनों के प्रथम मिलन का दृश्य साकार हुआ।
इस प्रसंग में संवाद से अधिक भावों और दृष्टि के माध्यम से कथा आगे बढ़ी। राम और सीता का यह प्रथम मिलन मर्यादित प्रेम की उस भावना को दर्शाता है, जिसका वर्णन रामकथा में अत्यंत कोमलता से किया गया है।
पुष्प वाटिका के वातावरण और पात्रों की भाव-भंगिमाओं ने दर्शकों को भी इस प्रसंग से जोड़ दिया। लीला स्थल पर मौजूद श्रद्धालुओं ने राम-सीता के प्रथम दर्शन के दृश्य को भावपूर्वक देखा।
गौरी पूजन में सीता ने की मनोवांछित वर की कामना
पुष्प वाटिका के बाद माता सीता के गौरी पूजन की लीला हुई। सीता ने माता गौरी की आराधना करते हुए मन में श्रीराम जैसा वर पाने की कामना की। प्रसंग में आकाशवाणी के माध्यम से उन्हें मनोवांछित वर प्राप्त होने का आशीर्वाद मिलने का भाव प्रस्तुत किया गया।
गौरी पूजन पूरा होने के बाद सखियां माता सीता को लेकर महल की ओर लौट गईं। दूसरी ओर श्रीराम और लक्ष्मण गुरु के आश्रम की ओर प्रस्थान कर गए।
आरती के साथ चौथे दिन की लीला को मिला विश्राम
चतुर्थ दिवस की लीला का समापन आरती के साथ हुआ। आरती के दौरान लीला स्थल का वातावरण भक्तिमय हो गया और बड़ी संख्या में मौजूद श्रद्धालु भगवान के दर्शन में भाव-विभोर दिखाई दिए।
पुष्प वाटिका, अष्ट सखी संवाद, राम-सीता के प्रथम मिलन और गौरी पूजन जैसे प्रसंगों ने रामनगर रामलीला के चौथे दिन को विशेष बना दिया।