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अयोध्या: अधिवक्ता श्रवण मिश्रा की याद में बनेगा स्मृति द्वार, शोक में डूबा बार

अयोध्या: अधिवक्ता श्रवण मिश्रा की याद में बनेगा स्मृति द्वार, शोक में डूबा बार

अयोध्या की न्यायिक बिरादरी और कानूनी जगत के लिए मंगलवार का दिन एक अपूरणीय क्षति लेकर आया। फैजाबाद बार एसोसिएशन की एल्डर्स कमेटी के चेयरमैन और वरिष्ठ अधिवक्ता श्रवण कुमार मिश्रा (76) का निधन हो गया है। उनके निधन की खबर सुनते ही कचहरी परिसर और पूरे अयोध्या में शोक की लहर दौड़ गई।

कानूनी जगत का एक चमकता सितारा विदा हुआ

स्वर्गीय श्रवण कुमार मिश्रा केवल एक वकील नहीं थे, बल्कि वे अयोध्या की कानूनी परंपराओं के एक जीवंत स्तंभ थे। उन्होंने वर्ष 1974 में फैजाबाद कचहरी से अपने वकालत के सफर की शुरुआत की थी। पांच दशकों से अधिक के अपने करियर में उन्होंने न केवल न्याय की सेवा की, बल्कि सैकड़ों नए अधिवक्ताओं का मार्गदर्शन भी किया।

उनके निधन पर फैजाबाद बार एसोसिएशन के अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा की अध्यक्षता में वकालतखाना में एक विशेष शोक सभा का आयोजन किया गया। इस सभा में अधिवक्ताओं ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके साथ बिताए गए स्मरणीय पलों को साझा किया।

अधिवक्ता संघ का बड़ा निर्णय: स्मृति द्वार का निर्माण

शोक सभा के दौरान फैजाबाद बार एसोसिएशन ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अध्यक्ष कालिका प्रसाद मिश्रा ने घोषणा की कि दिवंगत अधिवक्ता के सम्मान और उनके द्वारा समाज व बार के प्रति दिए गए योगदान को यादगार बनाने के लिए एक 'स्मृति द्वार' का निर्माण किया जाएगा। यह द्वार आने वाली पीढ़ियों के लिए उनके संघर्ष और समर्पण का प्रतीक बनेगा।

  • योगदान: फैजाबाद बार एसोसिएशन की एल्डर्स कमेटी के चेयरमैन के रूप में उनका कार्यकाल अनुकरणीय रहा।
  • विरासत: उन्होंने वकालत के पेशे में अपनी संस्कृति को जीवित रखा, उनके दो पुत्र भी इसी पेशे से जुड़े हैं।
  • सम्मान: स्मृति द्वार का निर्माण उनके प्रति बार एसोसिएशन का कृतज्ञता ज्ञापन है।

अंतिम यात्रा और जनसैलाब

श्रवण कुमार मिश्रा का अंतिम संस्कार सरयू तट पर वैदिक रीति-रिवाजों के साथ संपन्न हुआ। इस दुखद घड़ी में उन्हें अंतिम विदाई देने के लिए शहर के गणमान्य नागरिक और कानूनी विशेषज्ञ बड़ी संख्या में उपस्थित थे। नगर विधायक वेद प्रकाश गुप्ता और शरद त्रिपाठी सहित कई अन्य विशिष्ट हस्तियों ने सरयू घाट पर पहुंचकर अपनी संवेदनाएं व्यक्त कीं।

उनके बड़े पुत्र, अधिवक्ता संजय मिश्रा ने बताया कि उनके पिता का जीवन अनुशासन और निष्ठा का पर्याय था। उन्होंने कहा, 'मेरे पिता ने हमेशा हमें सच्चाई और कानून के दायरे में रहकर समाज सेवा करने की प्रेरणा दी। उनका जाना हमारे परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी कानूनी बिरादरी के लिए एक बड़ी क्षति है।'

शोक सभा में जुटे दिग्गज

शोक सभा के दौरान महामंत्री शैलेंद्र जायसवाल, उपाध्यक्ष राजेश उपाध्याय समेत बार एसोसिएशन के तमाम वरिष्ठ पदाधिकारियों ने अपनी संवेदनाएं व्यक्त की। सभी वक्ताओं ने उनके सरल स्वभाव और मिलनसार व्यक्तित्व का जिक्र करते हुए कहा कि श्रवण मिश्रा जी का मार्गदर्शन हमेशा अधिवक्ताओं के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. अधिवक्ता श्रवण कुमार मिश्रा कौन थे?

श्रवण कुमार मिश्रा अयोध्या के एक वरिष्ठ अधिवक्ता और फैजाबाद बार एसोसिएशन की एल्डर्स कमेटी के चेयरमैन थे। उन्होंने 1974 से वकालत का पेशा शुरू किया था।

2. स्मृति द्वार का निर्माण क्यों किया जा रहा है?

उनके द्वारा कानूनी क्षेत्र में दिए गए योगदान और फैजाबाद बार एसोसिएशन के प्रति उनकी सेवाओं को चिरस्थायी बनाने के लिए स्मृति द्वार का निर्माण किया जा रहा है।

3. उनके निधन पर किन प्रमुख हस्तियों ने शोक व्यक्त किया?

उनके अंतिम संस्कार के समय नगर विधायक वेद प्रकाश गुप्ता, शरद त्रिपाठी और बार एसोसिएशन के समस्त पदाधिकारियों व वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने शोक संवेदनाएं व्यक्त कीं।

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अल्का सिंह

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Senior Content Writer

अल्का सिंह स्वास्थ्य और जीवनशैली से जुड़े विषयों पर गहन शोध के साथ लेखन करती हैं। उनका प्रयास रहता है कि पाठकों को केवल सामान्य जानकारी ही नहीं, बल...

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